पोप फ्रांसिस का निधन: विश्व ने खोया एक महान आध्यात्मिक नायक
संवाददाता
21 April 2025
अपडेटेड: 10:55 AM 0stGMT+0530
पोप फ्रांसिस का निधन: विश्व ने खोया एक महान आध्यात्मिक नायक
को विश्व ने एक युग के अंत का साक्षी बना, जब कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप फ्रांसिस का 88 वर्ष की आयु में वेटिकन सिटी में निधन हो गया। उनके निधन का कारण फेफड़ों और किडनी में गंभीर संक्रमण बताया गया। पोप फ्रांसिस, जिनका मूल नाम जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो था, ने अपने जीवनकाल में न केवल कैथोलिक समुदाय, बल्कि पूरी मानवता के लिए करुणा, विनम्रता और सामाजिक न्याय का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।
एक ऐतिहासिक कार्यकाल
2013 में पोप चुने जाने वाले फ्रांसिस पहले लैटिन अमेरिकी, पहले जेसुइट और एक सहस्राब्दी से अधिक समय में पहले गैर-यूरोपीय पोप थे। अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में एक साधारण परिवार में जन्मे फ्रांसिस ने अपने जीवन को गरीबों और वंचितों की सेवा के लिए समर्पित किया। पोप बनने के बाद भी उन्होंने अपनी सादगी को बनाए रखा। उन्होंने वेटिकन के भव्य निवास की जगह एक साधारण अतिथि गृह, कासा सांता मार्ता, में रहना चुना और बार-बार सामान्य लोगों के बीच समय बिताया।
उनके कार्यकाल की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समावेशन और चर्च में सुधार शामिल हैं। 2015 में प्रकाशित उनका विश्व-पत्र (Encyclical) लौदातो सी पर्यावरण संकट पर एक ऐतिहासिक दस्तावेज था, जिसमें उन्होंने जलवायु परिवर्तन और मानवता की जिम्मेदारी पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने समलैंगिक नागरिक यूनियनों के प्रति समर्थन व्यक्त किया, जो कैथोलिक चर्च के लिए एक क्रांतिकारी कदम था। चर्च में यौन शोषण के मामलों के खिलाफ उनकी जीरो टॉलरेंस नीति ने भी विश्वासियों का भरोसा जीता।

विश्व शांति और करुणा के दूत
पोप फ्रांसिस ने विश्व शांति के लिए अथक प्रयास किए। उन्होंने विभिन्न धर्मों के बीच संवाद को बढ़ावा दिया और इस्लाम, यहूदी धर्म और अन्य विश्वासों के नेताओं के साथ ऐतिहासिक मुलाकातें कीं। उनकी यात्राओं ने विश्व के कई हिस्सों, विशेष रूप से संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में, शांति और एकता का संदेश फैलाया। भारत सहित कई देशों के नेताओं ने उनके इस योगदान को सराहा।
उनके संदेशों में हमेशा मानवता, दया और प्रेम पर जोर रहा। उन्होंने बार-बार कहा, “हमें एक-दूसरे के लिए दीवारें नहीं, बल्कि पुल बनाना चाहिए।” उनकी यह शिक्षाएं आज के विभाजित विश्व में और भी प्रासंगिक हैं।
अंतिम क्षण और वैश्विक शोक
पोप फ्रांसिस ने अपने अंतिम दिनों में वेटिकन के कासा सांता मार्ता में प्रार्थना की और विश्व के लिए शांति का संदेश दिया। उनके निधन की खबर ने विश्व भर में शोक की लहर पैदा कर दी। विश्व नेताओं, धार्मिक संगठनों और आम लोगों ने उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। भारतीय प्रधानमंत्री ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उनकी करुणा और आध्यात्मिक नेतृत्व की प्रशंसा की।
एक अविस्मरणीय विरासत
पोप फ्रांसिस की विरासत केवल कैथोलिक चर्च तक सीमित नहीं है। उनकी शिक्षाएं और कार्य सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और मानवता के लिए एक प्रेरणा बने रहेंगे। उनकी विनम्रता, जिसमें वे बीमारों से मिलने अस्पताल गए, शरणार्थियों के साथ समय बिताया, और गरीबों के लिए भोजन की व्यवस्था की, ने उन्हें एक सच्चा “लोक का पोप” बनाया।
उनका निधन न केवल कैथोलिक समुदाय के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है। फिर भी, उनकी शिक्षाएं और उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि प्रेम, करुणा और सेवा के माध्यम से हम एक बेहतर विश्व का निर्माण कर सकते हैं।