24 अप्रैल 2025 को वरूथनी एकादशी…

khabar pradhan

संवाददाता

23 April 2025

अपडेटेड: 1:32 PM 0rdGMT+0530

24 अप्रैल 2025 को वरूथनी एकादशी

24 अप्रैल 2025 को वरूथनी एकादशी –
वरुथिनी एकादशी के दिन भूलकर भी ना करें यह काम:
मां लक्ष्मी हो जाएंगीं रुष्ठ !
वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहते हैं ।इस दिन स्नान दान ,व्रत ,पूजा, पाठ, हवन आदि का बहुत महत्व होता है । इस दिन व्रत करने से मनुष्य को सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। और जीवन में सुख समृद्धि आती है। यह व्रत दुख और दरिद्रता को दूर करने वाला बताया गया है ।

इस व्रत को करने के कुछ प्रमुख नियम बनाए गए हैं ।

क्या करें क्या ना करें-

एकादशी के दिन क्यों नहीं खाते चावल :

इस दिन भूलकर भी अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। और चावल नहीं खाना चाहिए। माना जाता है कि एकादशी के दिन चावल खाना मांस खाने के बराबर माना गया है।

पौराणिक मान्यता में एक कथा के अनुसार मां भगवती किसी बात से महर्षि मेधा से रूष्ठ हो गई ।महर्षि मेधा भगवती के क्रोध से घबराकर ,उन्होंने अपने शरीर का त्याग कर दिया और इसके बाद उनके शरीर के अंश धरती में समा गए।
माना जाता है कि उन अंश के धरती में समाने की वजह से धरती से चावल के पौधे की उत्पत्ति हुई ।इस कारण चावल को पौधा नहीं बल्कि जीव माना जाता है ।
ऐसा माना जाता है कि जिस दिन महर्षि मेधा ने शरीर त्यागा था उसे दिन एकादशी था ।इस दिन इसलिए इस दिन चावल खाना निषेध माना गया है ।इस दिन चावल खाने से पाप लगता है और व्यक्ति अगले जन्म में सर्प के रूप में जन्म लेता है ।

वैज्ञानिक कारण-

एकादशी के दिन चावल ना खाने के पीछे एक वैज्ञानिक कारण है। इसके अनुसार चावल में जल की मात्रा अधिक होती है। और जल पर चंद्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है ।चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है। उसे मन विचलित होता है। मन के विचलित होने से व्रत के नियम पालन करने में बाधा आती है ।इसलिए एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है।

वरुथिनी एकादशी के दिन क्या करें :

इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, अन्न ,फल और अन्य खाद्य सामग्री का दान करें ।इसके अलावा इस दिन पंछियों को पानी देना। गाय को हरा चारा खिलाना और पानी पिलाना शुभ माना गया है ।इस दिन मटके का दान का बहुत महत्व है। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है और सुख समृद्धि आती है।

मनोकामना पूर्ति हेतु

मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को तुलसी के पत्तों पर शहद लगाकर भोग लगे और शाम को तुलसी के गमले पर दीपक जलाएं

सुख समृद्धि हेतु

ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः का मंत्र का 108 बार जाप करें।

धन प्राप्ति हेतु

विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।पीले फल और पीले वस्त्र का दान करें।

कार्य में बाधाओं के निराकरण हेतु:

वस्त्र और चप्पलों का दान करें। पानी का दान करें। मटके के दान का विशेष महत्व होता है।

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