पहलगाम हमले में जिस AK-47 का हुआ इस्तेमाल, पछता रहा बनाने वाला

khabar pradhan

संवाददाता

26 April 2025

अपडेटेड: 6:56 AM 0thGMT+0530

पहलगाम हमले में जिस AK-47 का हुआ इस्तेमाल, पछता रहा बनाने वाला

पहलगाम हमले में जिस AK-47 का हुआ इस्तेमाल, पछता रहा बनाने वाला

मिखाइल कलाश्निकोव की खोज, जिस पर उन्हें हुआ आजीवन पछतावा

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले में आतंकियों ने बाइसारन घाटी के सुरम्य मैदानों में 28 पर्यटकों की निर्मम हत्या की, जिसमें एके-47 राइफल का इस्तेमाल किया गया। यह राइफल, जिसे दुनिया का सबसे घातक हथियार माना जाता है, मिखाइल कलाश्निकोव ने बनाया था। लेकिन, इसकी खोज के बाद कलाश्निकोव को अपनी जिंदगी में गहरा पछतावा हुआ। आइए, एके-47 के निर्माण, इसके इतिहास और इससे जुड़े 10 महत्वपूर्ण तथ्यों को विस्तार से जानते हैं।
AK-47 का जन्म और मिखाइल कलाश्निकोव: एके-47 का पूरा नाम ‘अवतोमात कलाश्निकोवा 1947’ है, जिसे रूसी सैनिक मिखाइल टिमोफेयेविच कलाश्निकोव ने 1947 में डिजाइन किया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान टैंक कमांडर के रूप में घायल होने के बाद, कलाश्निकोव ने जर्मन हथियारों की डिजाइन से प्रेरित होकर एक ऐसी राइफल बनाई जो हर परिस्थिति में काम कर सके। 1949 में सोवियत सेना ने इसे अपनी मानक राइफल बनाया। उनका मकसद था अपने देश की रक्षा के लिए एक भरोसेमंद हथियार बनाना, लेकिन बाद में इसका दुरुपयोग उन्हें जीवनभर कचोटता रहा।
कलाश्निकोव का पछतावा: मिखाइल कलाश्निकोव ने एके-47 की बिक्री से कभी पैसा नहीं कमाया और 2013 में 94 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। अपने अंतिम दिनों में उन्होंने एक पत्र में लिखा कि एके-47 के आतंकी संगठनों द्वारा दुरुपयोग से उनकी आत्मा को ठेस पहुंची। उन्होंने कहा, “मैंने यह हथियार अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए बनाया था, लेकिन इसके गलत हाथों में पहुंचने का दुख मुझे हमेशा रहेगा।”
AK-47 से पहलगाम हमला: पहलगाम के बाइसारन घाटी में आतंकियों ने एके-47 और अन्य हथियारों का इस्तेमाल कर 28 लोगों की जान ली। हमलावरों ने पर्यटकों से उनकी धार्मिक पहचान पूछी और इस्लामिक छंद पढ़ने को कहा, फिर अंधाधुंध गोलीबारी की। एक तस्वीर में एक आतंकी एके-47 लिए दौड़ता दिखा, जिसे जांच एजेंसियों ने जारी किया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को पाकिस्तान की संलिप्तता के सबूत मिले हैं, और तालिबान से हथियार खरीदे जाने की आशंका भी जताई जा रही है।
AK-47 के बारे में 10 महत्वपूर्ण तथ्य:
नाम और उत्पत्ति: AK-47 का मतलब ‘Automatic Kalashnikov 1947’ है, जो इसके आविष्कारक और निर्माण वर्ष को दर्शाता है।
विश्वसनीयता: यह राइफल पानी, मिट्टी, या रेत जैसे किसी भी वातावरण में काम कर सकती है, यही इसकी लोकप्रियता का कारण है।
सादगी: केवल 8 पुर्जों से बनी इस राइफल को 1 मिनट में जोड़ा-हटाया जा सकता है।
उपयोग में आसानी: इसे बच्चे भी चला सकते हैं, जिसके कारण आतंकी संगठन इसका दुरुपयोग करते हैं।
वैश्विक उत्पादन: रूस के अलावा भारत, चीन, इजरायल, मिस्र, नाइजीरिया जैसे 30 देशों को इसे बनाने का लाइसेंस है।
अवैध व्यापार: एके-47 दुनिया में सबसे ज्यादा अवैध रूप से बिकने वाली राइफल है।
सटीकता: यह 300 मीटर तक सटीक निशाना लगाती है, और अच्छे निशानेबाज के साथ 800 मीटर तक प्रभावी है।
हल्कापन: इसका AKM वर्जन दुनिया की सबसे हल्की राइफलों में से एक है।
गोलीबारी की गति: यह प्रति मिनट 600 गोलियां दाग सकती है, यानी 1 सेकंड में 10 गोलियां।
वैश्विक प्रभाव: अनुमानित 10 करोड़ एके-47 राइफलें दुनिया भर में मौजूद हैं, जो इसे सबसे व्यापक हथियार बनाती हैं।
पहलगाम हमले का प्रभाव: इस हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत आतंकियों और उनके समर्थकों को “पृथ्वी के अंत तक” खोजकर सजा देगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जवाबी कार्रवाई का आश्वासन दिया। हमले की जिम्मेदारी ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली, जो लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन है।

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