कैलाश मानसरोवर यात्रा 2025: जून से अगस्त तक होगी शुरू

khabar pradhan

संवाददाता

26 April 2025

अपडेटेड: 2:06 PM 0thGMT+0530

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2025: जून से अगस्त तक होगी शुरू

सरकार का मास्टर प्लान तैयार, जानिए पूरी डिटेल

हिंदुओं, जैनियों, बौद्धों और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा, जो 2020 से कोविड-19 महामारी और भारत-चीन सीमा तनाव के कारण रुकी हुई थी, अब 2025 में फिर से शुरू होने जा रही है। विदेश मंत्रालय ने 26 अप्रैल 2025 को ऐलान किया कि यह यात्रा जून से अगस्त 2025 के बीच आयोजित होगी। उत्तराखंड के लिपुलेख पास और सिक्किम के नाथू ला पास के रास्ते कुल 15 जत्थे (बैच) यात्रा करेंगे। आइए, सरकार के प्लान, रूट, और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी को विस्तार से जानते हैं।
सरकार का प्लान और यात्रा का शेड्यूल:
विदेश मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन किया जाएगा। इस बार यात्रा दो मुख्य रास्तों से होगी:
लिपुलेख पास (उत्तराखंड): 5 जत्थे, प्रत्येक में 50 यात्री, कुल 250 यात्री। पहला जत्था 10 जुलाई 2025 को चीन में प्रवेश करेगा, और आखिरी जत्था 22 अगस्त 2025 को भारत लौटेगा।
नाथू ला पास (सिक्किम): 10 जत्थे, प्रत्येक में 50 यात्री, कुल 500 यात्री। यह रास्ता मोटर वाहन से सुगम है।
प्रत्येक जत्थे की यात्रा 22 दिन की होगी, जिसमें दिल्ली से शुरू होकर विभिन्न पड़ावों के बाद कैलाश दर्शन और मानसरोवर झील में स्नान शामिल है। कुमाोन मंडल विकास निगम (KMVN) को इस यात्रा के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यात्रा का रूट और पड़ाव (लिपुलेख पास):
दिल्ली से शुरुआत: यात्री दिल्ली से रवाना होंगे।
पड़ाव: तनकपुर (1 रात), धारचूला (1 रात), गुंजी (2 रातें), और नाभीढांग/ताकलाकोट (2 रातें)।
कैलाश दर्शन के बाद वापसी: चीन से लौटते समय बुंडी (1 रात), चौकोरी (1 रात), और अल्मोड़ा (1 रात) में रुककर दिल्ली पहुंचेंगे।
लिपुलेख रास्ते में अब सड़क सुविधा के कारण पैदल यात्रा केवल 1 किमी (भारत और चीन दोनों तरफ) रह गई है, जो पहले 90 किमी थी। यह सुविधा 2020 में बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) द्वारा पूरी की गई थी।
स्वास्थ्य और सुरक्षा उपाय:
स्वास्थ्य जांच: सभी यात्रियों की अनिवार्य स्वास्थ्य जांच दिल्ली और गुंजी (पिथौरागढ़) में होगी। उच्च ऊंचाई (19,500 फीट तक) और कठिन परिस्थितियों के कारण केवल शारीरिक और चिकित्सकीय रूप से फिट यात्री ही यात्रा कर सकेंगे। जांच में ITBP सहयोग करेगा।
जोखिम की जिम्मेदारी: सरकार ने साफ किया है कि यात्रा में मौसम, भूस्खलन, या अन्य जोखिमों की जिम्मेदारी यात्रियों को स्वयं लेनी होगी।
आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन आवेदन kmy.gov.in पर शुरू हो चुके हैं। चयन कंप्यूटर आधारित, लिंग-संतुलित रैंडम प्रक्रिया से होगा।
खर्च और सुविधाएं:
लिपुलेख पास: प्रति यात्री लगभग 1.8 लाख रुपये।
नाथू ला पास: प्रति यात्री लगभग 2.5 लाख रुपये, क्योंकि यह रास्ता मोटर वाहन से सुगम है।
उत्तराखंड सरकार स्थानीय लोगों के लिए 50,000 रुपये की सब्सिडी दे रही है। यात्रियों को तंबू, भोजन, और परिवहन की सुविधा KMVN प्रदान करेगा।
कैलाश मानसरोवर का महत्व:
कैलाश पर्वत को हिंदुओं में भगवान शिव और पार्वती का निवास माना जाता है। मानसरोवर झील में स्नान और पर्वत की परिक्रमा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। जैनियों के लिए यह प्रथम तीर्थंकर के निर्वाण स्थल है, और बौद्ध इसे बुद्ध का निवास मानते हैं। यह यात्रा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अनूठी है।

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