खुद बनाते हैं बच्चों के लिए खाना, आज के माता-पिता से जानें ये खास सबक
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री अनुष्का शर्मा और भारतीय क्रिकेट के दिग्गज विराट कोहली न केवल अपनी प्रोफेशनल सफलताओं के लिए सुर्खियों में रहते हैं, बल्कि अपनी अनूठी और प्रेरणादायक पेरेंटिंग शैली के लिए भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। इस स्टार जोड़े ने अपनी बेटी वामिका (जन्म 2021) और बेटे अकाय (जन्म 2024) की परवरिश में पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक सोच का शानदार तालमेल बनाया है। हाल ही में एक इवेंट में अनुष्का ने खुलासा किया कि वह और विराट अपने बच्चों के लिए घर पर खाना बनाते हैं, जो न केवल उनकी सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि पारिवारिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी एक तरीका है।
अनुष्का ने बताया, “हमने घर पर यह तय किया कि अगर हम अपनी मांओं की तरह खाना नहीं बनाएंगे, तो हमारी पारिवारिक रेसिपी बच्चों तक नहीं पहुंच पाएंगी। इसलिए कभी मैं खाना बनाती हूं, तो कभी विराट। हम अपनी मांओं की रेसिपी को दोहराने की कोशिश करते हैं।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई बार वह अपनी मां से रेसिपी के लिए सलाह लेती हैं। उनके लिए बच्चों को घर का खाना खिलाना और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखना बेहद महत्वपूर्ण है। यह दृष्टिकोण आज के व्यस्त माता-पिता के लिए एक बड़ा सबक है, जो अक्सर समय की कमी के कारण बच्चों को बाहर का खाना, फास्ट फूड या प्रोसेस्ड फूड खिलाने लगते हैं। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, घर का खाना बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी है। साथ ही, यह परिवार के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी बढ़ाता है।
विराट और अनुष्का की पेरेंटिंग का एक और खास पहलू है बच्चों के लिए सख्त रूटीन। अनुष्का ने कहा, “हम बहुत यात्रा करते हैं, लेकिन बच्चों के खाने और सोने का समय हमेशा तय रहता है। इससे उन्हें स्थिरता और अनुशासन मिलता है।” यह आदत बच्चों में व्यवहारिक संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देती है। हालांकि, आजकल के माता-पिता अक्सर बच्चों की दिनचर्या को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका असर उनकी सेहत और व्यवहार पर पड़ता है।
विराट और अनुष्का का यह प्रयास न केवल उनके बच्चों को स्वस्थ और संस्कारित रखता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि व्यस्त जीवन में भी बच्चों के लिए समय निकालना कितना जरूरी है। उनकी यह आदत आज के माता-पिता को प्रेरित करती है कि वे घरेलू खाने की परंपरा को जीवित रखें, बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ें और उनकी परवरिश में गुणवत्ता समय दें। यह स्टार जोड़ा साबित करता है कि सच्ची पेरेंटिंग धन-दौलत से नहीं, बल्कि प्यार, समर्पण और छोटी-छोटी कोशिशों से बनती है।


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