भारत-पाक तनाव के बीच अटारी-वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी स्थगित
संवाददाता
7 May 2025
अपडेटेड: 12:17 PM 0thGMT+0530
भारत-पाक तनाव के बीच अटारी-वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी स्थगित:
पंजाब के अमृतसर जिले में स्थित अटारी-वाघा बॉर्डर, जो भारत और पाकिस्तान के बीच एकमात्र सक्रिय स्थलीय सीमा रहा है, अब एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बन रहा है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई, ने दोनों देशों के बीच तनाव को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। इस हमले के बाद भारत सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए अटारी-वाघा बॉर्डर पर होने वाली दैनिक रिट्रीट सेरेमनी, जिसे ‘बीटिंग रिट्रीट’ के नाम से जाना जाता है, को पूरी तरह स्थगित कर दिया है। यह निर्णय न केवल सीमा पर बढ़ते तनाव को दर्शाता है, बल्कि दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी परंपरा में एक बड़े बदलाव का संकेत भी देता है।
रिट्रीट सेरेमनी: एक परंपरा का इतिहास
1959 से शुरू हुई अटारी-वाघा बॉर्डर की रिट्रीट सेरेमनी दोनों देशों की सीमा सुरक्षा बलों—भारत की बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) और पाकिस्तान की रेंजर्स—के बीच एक अनोखा सैन्य प्रदर्शन रही है। हर शाम सूर्यास्त से पहले होने वाली इस सेरेमनी में दोनों देशों के सैनिक उच्च कदमताल, जोशीले नृत्य जैसे हावभाव और तीखी नजरों के साथ एक-दूसरे का सामना करते हैं। यह न केवल दोनों देशों की प्रतिद्वंद्विता को दर्शाता है, बल्कि आपसी सम्मान और भाईचारे का प्रतीक भी रहा है। सेरेमनी के अंत में दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच हाथ मिलाना और झंडे उतारना एक परंपरा रही है, जो दर्शकों के लिए गर्व और देशभक्ति का क्षण लेकर आती थी।
हर साल लाखों पर्यटक इस अनोखे प्रदर्शन को देखने अमृतसर पहुंचते थे। भारत की ओर से “भारत माता की जय” और पाकिस्तान की ओर से “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे गूंजते थे। लेकिन पहलगाम हमले के बाद इस परंपरा पर पूर्ण विराम लग गया है।
पहलगाम हमले ने बदला माहौल
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले ने भारत को झकझोर दिया। इस हमले में 26 लोग, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे, मारे गए। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के ऑफशूट ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) को जिम्मेदार ठहराया। इसके जवाब में भारत ने कई कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाए, जिनमें अटारी-वाघा बॉर्डर को बंद करना और पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना शामिल है।
हमले के तुरंत बाद, बीएसएफ ने सेरेमनी को “स्केल डाउन” करने का फैसला किया, जिसमें गेट नहीं खोले गए और न ही पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ हाथ मिलाया गया। लेकिन अब, ताजा जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने इस सेरेमनी को पूरी तरह स्थगित करने का निर्णय लिया है। यह कदम भारत की ओर से एक मजबूत संदेश है कि सीमा पार से आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सीमा पर बदली तस्वीर
अटारी-वाघा बॉर्डर, जो कभी व्यापार और पर्यटन का केंद्र था, अब एक सुनसान तस्वीर पेश कर रहा है। 30 अप्रैल 2025 को भारत ने इस सीमा को पूरी तरह बंद कर दिया, जिसके बाद सैकड़ों पाकिस्तानी नागरिक अपने देश लौट गए। हालांकि, पाकिस्तान ने अपनी ओर से वाघा बॉर्डर को बंद कर दिया, जिसके कारण कई पाकिस्तानी नागरिक भारत में फंस गए। इनमें से कई लोग कड़ी धूप और पानी की कमी का सामना करते हुए सीमा पर इंतजार करते देखे गए।
इस बीच, भारत ने मानवीय आधार पर कुछ राहत दी और पाकिस्तानी नागरिकों को अटारी बॉर्डर से लौटने की अनुमति दी, लेकिन पाकिस्तान की ओर से गेट न खोले जाने के कारण स्थिति जटिल बनी हुई है। सीमा बंद होने से न केवल व्यापार, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है। पोर्टर, टैक्सी चालक, और छोटे दुकानदारों का कहना है कि पर्यटकों की कमी और व्यापार रुकने से उनकी आजीविका पर गहरा असर पड़ा है।
क्या कहते हैं लोग?
पहलगाम हमले के बाद से ही कई भारतीय, जिनमें सैन्य विशेषज्ञ, राजनेता और आम नागरिक शामिल हैं, इस सेरेमनी को बंद करने की मांग कर रहे थे। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कंवल जीत सिंह ढिल्लन ने इसे “नौटंकी” करार देते हुए कहा कि यह कोई सैन्य परेड नहीं, बल्कि एक अनावश्यक प्रदर्शन है। जियो-स्ट्रैटेजिक विशेषज्ञ सुशांत सरीन ने इसे “शर्मनाक” बताया और कहा कि भारत जैसे देश को ऐसी सेरेमनी की जरूरत नहीं। शिव सेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इसे “आतंकिस्तान” के साथ होने वाली सेरेमनी को बंद करने की मांग की।
वहीं, कुछ लोग इसे दोनों देशों के बीच एक सांस्कृतिक और सैन्य सेतु मानते हैं। उनके लिए यह सेरेमनी केवल प्रतिद्वंद्विता नहीं, बल्कि आपसी सम्मान का प्रतीक थी। लेकिन मौजूदा तनाव ने इन भावनाओं को पीछे छोड़ दिया है।
आगे क्या?
अटारी-वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी का स्थगन दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास का स्पष्ट संकेत है। भारत ने न केवल सीमा बंद की, बल्कि सिंधु जल संधि को निलंबित करने, पाकिस्तानी जहाजों पर प्रतिबंध लगाने और हवाई मार्ग से डाक विनिमय रोकने जैसे कदम भी उठाए हैं। पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने हवाई क्षेत्र को भारतीय विमानों के लिए बंद कर दिया और भारतीय राजनयिकों को निष्कासित किया।