काशी विश्वनाथ मंदिर में हाई-अलर्ट: 600 जवानों की तैनाती

khabar pradhan

संवाददाता

7 May 2025

अपडेटेड: 12:19 PM 0thGMT+0530

काशी विश्वनाथ मंदिर में हाई-अलर्ट: 600 जवानों की तैनाती

मॉक ड्रिल के साथ एयर अटैक से सुरक्षा की रिहर्सल

मॉक ड्रिल के साथ एयर अटैक से सुरक्षा की रिहर्सल

वाराणसी, उत्तर प्रदेश: भारत की आध्यात्मिक नगरी काशी में स्थित विश्वनाथ मंदिर, जो लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, आज एक अभूतपूर्व सुरक्षा अभ्यास का गवाह बना। मंगलवार, 7 मई 2025 को सुबह से ही काशी विश्वनाथ मंदिर के अंदर और बाहर 600 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के साथ एक व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस ड्रिल का उद्देश्य आतंकी हमले, विशेष रूप से हवाई हमले, जैसी आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। सायरन की गूंज के साथ शुरू हुआ यह अभ्यास न केवल सुरक्षा बलों की तत्परता का प्रदर्शन था, बल्कि देश की संवेदनशील धार्मिक स्थलों को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक बना।
मॉक ड्रिल: सुरक्षा की नई परिभाषा
सुबह 9 बजे जैसे ही काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में सायरन बजा, मंदिर को तुरंत खाली कराया गया। यह मॉक ड्रिल एक सुनियोजित रणनीति के तहत आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने हिस्सा लिया। बम निरोधक दस्ता (बम स्क्वॉड), मेडिकल टीमें, डॉग स्क्वॉड, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), और स्थानीय पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों ने मिलकर इस अभ्यास को अंजाम दिया। इस दौरान, जवानों को हवाई हमले (एयर अटैक) से बचाव और त्वरित प्रतिक्रिया की विशेष ट्रेनिंग दी गई।
ड्रिल के दौरान, मंदिर के आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया गया। नकली आपात स्थिति का निर्माण किया गया, जिसमें आतंकी हमले की आशंका को आधार बनाया गया। सुरक्षाकर्मियों ने न केवल मंदिर परिसर की सुरक्षा की, बल्कि आसपास के गलियारों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में भी तलाशी अभियान चलाया। बम स्क्वॉड ने संदिग्ध वस्तुओं की जांच की, जबकि मेडिकल टीमें घायलों को प्राथमिक उपचार देने की प्रक्रिया में जुटी रहीं। डॉग स्क्वॉड ने विस्फोटकों का पता लगाने में अपनी भूमिका निभाई, और NDRF ने किसी बड़े हादसे की स्थिति में बचाव कार्यों की रिहर्सल की।
क्यों जरूरी थी यह मॉक ड्रिल?
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई, ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को और सतर्क कर दिया है। इस हमले ने एक बार फिर धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर आतंकी खतरों की आशंका को उजागर किया। काशी विश्वनाथ मंदिर, जो न केवल धार्मिक, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का प्रतीक है, हमेशा से ही संवेदनशील स्थलों की सूची में रहा है। ऐसे में, इस मॉक ड्रिल का आयोजन सुरक्षा बलों की तैयारियों को परखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने की रणनीति को मजबूत करने के लिए किया गया।
इस ड्रिल का एक प्रमुख उद्देश्य हवाई हमले जैसी असामान्य परिस्थितियों के लिए तैयार रहना भी था। ड्रोन हमलों और अन्य आधुनिक आतंकी तकनीकों के बढ़ते खतरे को देखते हुए, सुरक्षा बलों को ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया गया। यह अभ्यास न केवल तकनीकी दक्षता को परखने का अवसर था, बल्कि विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को भी मजबूत करने का प्रयास था।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा पहली प्राथमिकता
मॉक ड्रिल के दौरान, श्रद्धालुओं को मंदिर से सुरक्षित बाहर निकाला गया और उन्हें ड्रिल के बारे में जानकारी दी गई। कई श्रद्धालुओं ने इस अभ्यास की सराहना करते हुए कहा कि इससे उन्हें सुरक्षा के प्रति आश्वस्ति मिली। वाराणसी के स्थानीय निवासी रमेश यादव ने कहा, “काशी विश्वनाथ मंदिर हमारी आस्था का केंद्र है। यह देखकर खुशी हुई कि सरकार और
सुरक्षा बलों की तैनाती और मॉक ड्रिल से श्रद्धालुओं में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा।
सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव
इस मॉक ड्रिल के बाद, काशी विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में और सख्ती की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे, मेटल डिटेक्टर, और ड्रोन निगरानी प्रणाली स्थापित की जा सकती है। इसके अलावा, मंदिर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की कड़ी जांच और सामान की स्कैनिंग को और प्रभावी किया जाएगा।

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