लाहौर में धमाकों की गूंज: पाकिस्तान में दहशत

khabar pradhan

संवाददाता

8 May 2025

अपडेटेड: 7:22 AM 0thGMT+0530

लाहौर में धमाकों की गूंज: पाकिस्तान में दहशत

भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा तनाव

भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा तनाव

पाकिस्तान के लाहौर में गुरुवार सुबह एक के बाद एक जोरदार धमाकों ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। सायरन की आवाजों और लोगों के घरों से बाहर भागने की अफरा-तफरी के बीच लाहौर में दहशत का माहौल है। यह घटना भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद हुई, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था। इन धमाकों ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है। आइए, इस सनसनीखेज घटनाक्रम को विस्तार से जानते हैं।

लाहौर में धमाके: शहर में खौफ का आलम
गुरुवार सुबह करीब 9 बजे लाहौर के वॉल्टन, गोपाल नगर, और नसराबाद जैसे इलाकों में एक के बाद एक तीन जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। स्थानीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाकों की तीव्रता इतनी थी कि लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए। सायरन बजने लगे, और सड़कों पर सेना व पुलिस की भारी तैनाती देखी गई। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि यह मिसाइल हमले हो सकते हैं, जबकि पुलिस ने एक ड्रोन विस्फोट की बात कही। लाहौर हवाई अड्डा तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया, और अस्पतालों के बाहर घायलों की लंबी कतारें देखी गईं। हालांकि, अभी तक मृतकों की संख्या या नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई लोगों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है।
ऑपरेशन सिंदूर: भारत की करारी चोट
ये धमाके भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ठीक एक दिन बाद हुए, जिसमें भारतीय सेना ने बुधवार तड़के 25 मिनट की सटीक कार्रवाई में पाकिस्तान के मुरिदके, बहावलपुर और PoK के कोटली, मुजफ्फराबाद जैसे नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक मारे गए थे। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के ढांचे पर केंद्रित थी, और किसी भी पाकिस्तानी सैन्य सुविधा को निशाना नहीं बनाया गया। भारत की इस कार्रवाई ने पाकिस्तान को बौखला दिया, और लाहौर में धमाकों को इसी तनाव से जोड़ा जा रहा है।
पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई: LOC पर गोलीबारी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LOC) पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी। पूंछ, राजौरी, कुपवाड़ा, और उड़ी सेक्टरों में पाकिस्तानी सेना ने मोर्टार और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे भारतीय पक्ष में कम से कम 13 नागरिकों की मौत और 50 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। भारतीय सेना ने भी जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी चौकियों को भारी नुकसान पहुंचाया। लाहौर में धमाकों को कुछ लोग भारत की ओर से अतिरिक्त कार्रवाई मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे पाकिस्तान के भीतर अस्थिरता का परिणाम बता रहे हैं। पाकिस्तानी पुलिस और सेना अभी जांच में जुटी है, लेकिन कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

अंतरराष्ट्रीय चिंता: शांति की अपील
लाहौर में धमाकों और भारत-पाक तनाव ने वैश्विक समुदाय का ध्यान खींचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वह दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने में मदद के लिए तैयार हैं, लेकिन दोनों को “मिलकर समाधान निकालना चाहिए।” फ्रांस और इजरायल ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की। विश्लेषकों का मानना है कि यह तनाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है, खासकर जब पाकिस्तान की $350 बिलियन की अर्थव्यवस्था पहले से ही IMF के सहारे चल रही है।

लाहौर का इतिहास: बार-बार निशाना
लाहौर का आतंकी हमलों और विस्फोटों का लंबा इतिहास रहा है। पहले भी शहर में कई बार आतंकी संगठनों जैसे तहरीक-ए-तालिबान और जमात-उल-अहरार ने हमले किए हैं। 2016 में गुलशन-ए-इकबाल पार्क में हुए आत्मघाती हमले में 70 से अधिक लोग मारे गए थे, जबकि 2022 में अनारकली बाजार में हुए विस्फोट में तीन लोगों की मौत हुई थी। इन घटनाओं ने लाहौर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, और आज के धमाकों ने एक बार फिर शहर की कमजोर स्थिति को उजागर किया है।

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