शिल्प ग्राम महोत्सव का भव्य समापन..

khabar pradhan

संवाददाता

12 May 2025

अपडेटेड: 7:53 AM 0thGMT+0530

शिल्प ग्राम महोत्सव का भव्य समापन..

शिल्प ग्राम महोत्सव का भव्य समापन:

राज्यपाल ने कहा- जनजातीय कला हमारी सांस्कृतिक धरोहर, संरक्षण जरूरी

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित तीन दिवसीय शिल्प ग्राम महोत्सव के अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने जनजातीय कला और शिल्प को देश की अनमोल धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण और प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। समापन समारोह में जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह सहित कई गणमान्य व्यक्ति और सैकड़ों जनजातीय कलाकार उपस्थित रहे। इस महोत्सव ने न केवल जनजातीय संस्कृति को मंच प्रदान किया, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों को उनकी कला के लिए सम्मान और आजीविका के नए अवसर भी दिए।

शिल्प ग्राम महोत्सव: जनजातीय कला का उत्सव

तीन दिनों तक चले इस महोत्सव में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए जनजातीय कलाकारों ने अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन किया। बेल मेटल, बांस शिल्प, टेराकोटा, हस्तनिर्मित आभूषण और पारंपरिक चित्रकलाओं ने दर्शकों का मन मोह लिया। रवीन्द्र भवन में लगे स्टॉल्स पर शिल्पकारों ने अपनी कारीगरी को न केवल प्रदर्शित किया, बल्कि इसे बिक्री के लिए भी उपलब्ध कराया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को बल मिला। महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य और संगीत ने भी दर्शकों का उत्साह बढ़ाया।

राज्यपाल का संदेश: कला के जरिए सशक्तिकरण

समापन समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा, “जनजातीय कला और शिल्प हमारी लोक संस्कृति की अनमोल धरोहर हैं। ये न केवल हमारी पहचान हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक भी हैं।” उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जनजातीय समुदाय की सतत आजीविका के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। राज्यपाल ने यह भी जोड़ा कि इस तरह के आयोजन शिल्पकारों को नया मंच प्रदान करते हैं और उनकी कला को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करते हैं।

राज्यपाल ने समारोह से पहले सभागार में विभिन्न जिलों से आए जनजातीय कलाकारों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। उन्होंने शिल्पकारों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि उनकी कला को बाजार में उचित मूल्य मिलना चाहिए। इस दौरान बैतूल जिले के शिल्पकारों ने राज्यपाल को बेल मेटल से बनी एक खूबसूरत जनजातीय कलाकृति स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की।

जनजातीय कार्य मंत्री का योगदान

जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने इस अवसर पर कहा कि मध्य प्रदेश सरकार जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि शिल्प ग्राम महोत्सव जैसे आयोजन न केवल कला को बढ़ावा देते हैं, बल्कि शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करते हैं। मंत्री ने यह भी घोषणा की कि भविष्य में ऐसे और आयोजन किए जाएंगे, जिनमें जनजातीय शिल्पकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान किया जाएगा।

समापन समारोह की खासियत

समापन समारोह का शुभारंभ राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मंत्री कुंवर विजय शाह ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। इस दौरान जनजातीय नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिल्पकारों को सम्मानित भी किया गया, जिससे उनका हौसला बढ़ा। आयोजन में स्थानीय जनता की भारी भीड़ ने इस बात का सबूत दिया कि जनजातीय कला आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है।

सरकार के प्रयास: सतत आजीविका की दिशा में कदम

मध्य प्रदेश सरकार ने जनजातीय समुदाय की आजीविका को सतत बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। शिल्प ग्राम महोत्सव इसका एक हिस्सा है, जो शिल्पकारों को अपनी कला के लिए बाजार उपलब्ध कराता है। सरकार की ओर से ऑनलाइन मार्केटप्लेस और ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू किए गए हैं, ताकि शिल्पकार अपनी कला को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ सकें। राज्यपाल ने इन प्रयासों को “सराहनीय” बताते हुए कहा कि इससे जनजातीय समुदाय का सशक्तिकरण होगा।

उत्साह और गर्व

महोत्सव में शामिल होने वाले दर्शकों ने इस आयोजन को “सांस्कृतिक उत्सव” करार दिया। भोपाल निवासी रीता शर्मा ने कहा, “यह देखकर गर्व होता है कि हमारी जनजातीय कला को इतना सम्मान मिल रहा है। सरकार को ऐसे आयोजन हर साल करने चाहिए।” सोशल मीडिया पर भी महोत्सव की तस्वीरें और वीडियो जमकर वायरल हुए, जिसमें लोग जनजातीय शिल्प की तारीफ करते नजर आए।

वैश्विक मंच पर जनजातीय कला

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश की जनजातीय कला में वैश्विक बाजार में अपार संभावनाएं हैं। कला समीक्षक डॉ. अनिल मेहता ने कहा, “बेल मेटल और गोंडी चित्रकला जैसी कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने की जरूरत है। सरकार को इसके लिए विशेष नीति बनानी चाहिए।” महोत्सव के आयोजकों ने भी संकेत दिए हैं कि अगले साल यह आयोजन और बड़े स्तर पर होगा, जिसमें विदेशी खरीदारों को भी आमंत्रित किया जाएगा।

संस्कृति और सशक्तिकरण का संगम

शिल्प ग्राम महोत्सव ने न केवल जनजातीय कला को मंच प्रदान किया, बल्कि यह भी साबित किया कि सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करते हुए आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल के प्रेरक शब्दों और सरकार की प्रतिबद्धता ने शिल्पकारों में नया उत्साह भरा है। यह आयोजन मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि और एकता का प्रतीक बन गया है। जनता से अपील है कि वे स्थानीय कला को प्रोत्साहित करें और शिल्पकारों की मेहनत को उचित सम्मान दें।

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