सरकारी स्कूल के बालक से CJI तक का सफर !

khabar pradhan

संवाददाता

14 May 2025

अपडेटेड: 6:50 AM 0thGMT+0530

सरकारी स्कूल के बालक से CJI तक का सफर !

The journey from a government school boy to the Chief Justice of India!

BR Gavai Oath Ceremony: सरकारी स्कूल से CJI तक का सफर,कौन हैं 52वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ?

सुप्रीम कोर्ट के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस BR Gavai (भूषण रामकृष्ण गवई) ने बुधवार को अपने पद की शपथ ली.. इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस बी.आर गवई को भारत के CJI के रूप में शपथ दिलाई.. Oath Ceremony के वक्त पीएम नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद भी मौजूद रहे.. शपथ लेने के बाद मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने सभी का अभिवादन किया और पीएम मोदी से हाथ मिलाते हुए आगे बढ़े.. इस दौरान उन्होंने अपनी मां का आशीर्वाद भी लिया.. उन्होंने अपनी मां कमलताई गवई के पैर भी छुए जस्टिस बी.आर गवई भारत के पहले बौद्ध चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया हैं.. आजादी के बाद, वह दलित समुदाय से दूसरे सी.जे.आई हैं और उनका कार्यकाल छह महीने का होगा..

CJI BR GAVAI का बचपन और उनकी स्कूली पढ़ाई:
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानों तो पता चलता है कि भारत के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ( BR Gavai ) का बचपन महाराष्ट्र के अमरावती जिले की फ्रीजरपुरा नामक झोपड़पट्टी में बीता. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कक्षा 7 तक नगरपालिका के मराठी स्कूल से पूरी की. उनके जीवन में शिक्षा और संघर्ष से गहरा रिश्ता रहा है. गवई के पिता, रामकृष्ण सूर्यभान गवई, एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता और प्रख्यात अंबेडकरवादी नेता थे. वे रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (गवई) के संस्थापक भी थे. उनके अनुयायी उन्हें स्नेह और सम्मान से “दादासाहेब” कहकर बुलाते थे.
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब रामकृष्ण गवई छोटे थे, तब उनके पिता का सामाजिक जीवन इतना सक्रिय था कि उनकी माता सैकड़ों लोगो के लिए भोजन बनाती थीं. यह उनके परिवार की समाजसेवा और जनसेवा के प्रति समर्पण को दर्शाता है. रामकृष्ण गवई ने बाद में सक्रिय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अमरावती से सांसद चुने गए. इसके साथ ही वे 2006 से 2011 तक बिहार, सिक्किम और केरल जैसे राज्यों के राज्यपाल भी रहे. गवई परिवार का यह योगदान न केवल सामाजिक सुधार में महत्वपूर्ण रहा, बल्कि न्यायिक व्यवस्था तक पहुंचने की प्रेरणा का भी स्रोत बना.

भूषण रामकृष्ण गवई से CJI BR GAVAI बनने तक की कहानी:
कभी महाराष्ट्र के अमरावती की झोपड़पट्टी में जीवन बिताने वाले जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई आज देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हो गए हैं. 14 मई 2025 को उन्होंने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली. मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना के आज रिटायर होने के बाद जस्टिस गवई को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. वे इस पद पर पहुंचने वाले दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश हैं—उनसे पहले वर्ष 2007 में जस्टिस के. जी. बालकृष्णन को यह गौरव प्राप्त हुआ था. जस्टिस गवई का यह सफर चुनौतियों और संघर्षों से भरा रहा है, लेकिन उन्होंने कठिनाइयों को पार करते हुए मेहनत, लगन और संकल्प के बल पर वह मुकाम हासिल किया है, जिसके बारे में बहुत से लोग केवल सपना देखते हैं. उनका जीवन इस बात का प्रतीक है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी व्यक्ति फर्श से उठकर अर्श तक पहुंच सकता है

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