अमेरिका-पाकिस्तान की सीक्रेट डील: क्यों मेहरबान है अमेरिका, क्या भारत को होना चाहिए सतर्क?

khabar pradhan

संवाददाता

16 May 2025

अपडेटेड: 8:18 AM 0thGMT+0530

अमेरिका-पाकिस्तान की सीक्रेट डील: क्यों मेहरबान है अमेरिका, क्या भारत को होना चाहिए सतर्क?

अमेरिका-पाकिस्तान की सीक्रेट डील: क्यों मेहरबान है अमेरिका, क्या भारत को होना चाहिए सतर्क?

भारत और पाकिस्तान के बीच भले ही सीज़फायर लागू हो, लेकिन सीमा पर तनाव कम नहीं हुआ है. हाल ही में पाकिस्तान वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि भारतीय हमले में पाकिस्तान का एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS), जो भोलारी एयरबेस पर तैनात था, बुरी तरह तबाह हो गया है. इसके अलावा भारत की सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान के छह एयरफील्ड्स को भारी नुकसान पहुंचा है. इस हमले की पुष्टि वॉशिंगटन पोस्ट की सैटेलाइट तस्वीरों और वीडियो विश्लेषण से भी हो चुकी है.
लेकिन जो बात सबसे ज्यादा हैरान कर रही है वह यह कि अमेरिका इन हालातों में पाकिस्तान पर मेहरबान क्यों नजर आ रहा है? जवाब है – एक सीक्रेट डील, जो पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई है.

क्या कहती हैं रिपोर्ट्स:
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी फिनटेक कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल, जिसमें ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप, डोनाल्ड जूनियर और दामाद जैरेड कुश्नर की 60% हिस्सेदारी है, ने पाकिस्तान की एक नई बनी क्रिप्टो काउंसिल के साथ बड़ा समझौता किया है. अप्रैल में इस डील पर एक उच्चस्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने इस्लामाबाद में हस्ताक्षर किए, जिसका नेतृत्व कंपनी के संस्थापक ज़ैकरी विटकॉफ़ ने किया. इस टीम का स्वागत खुद पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने किया और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ के साथ एक बंद कमरे की बैठक में यह डील फाइनल की गई.
डील का उद्देश्य पाकिस्तान के वित्तीय ढांचे में ब्लॉकचेन तकनीक को एकीकृत करना और क्रिप्टो अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना बताया गया है. खास बात यह है कि इस डील को विश्वसनीयता देने के लिए पाकिस्तान ने दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज बिनांस के संस्थापक चांगपेंग झाओ को क्रिप्टो काउंसिल का सलाहकार नियुक्त किया है.

राजनीतिक विश्लेषकों का नज़रिया:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह डील अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में नया मोड़ ला सकती है. पहले ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान पर कठोर था, लेकिन इस डील के बाद रुख नरम दिख रहा है. इस संदिग्ध सहयोग की टाइमिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह डील उसी वक्त के आसपास हुई जब भारत के पहलगाम में आतंकी हमला और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हुआ.
ट्रंप परिवार और व्हाइट हाउस ने अभी तक इस डील पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन भारत के लिए यह चेतावनी है कि आर्थिक और कूटनीतिक समीकरण किस तेजी से बदल रहे हैं – और उनका असर सीधा जमीन पर पड़ रहा है.

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