वक्फ कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, 20 मई को होगी सुनवाई

khabar pradhan

संवाददाता

19 May 2025

अपडेटेड: 9:12 AM 0thGMT+0530

वक्फ कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, 20 मई को होगी सुनवाई

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नई दिल्ली: देश में लागू किए गए नए वक्फ कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी जंग तेज होती जा रही है. इस कानून को चुनौती देने वाली 70 से ज्यादा याचिकाएं दायर की गई हैं, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने केवल 5 मुख्य याचिकाओं पर ही सुनवाई करने का फैसला लिया है. इन याचिकाओं में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी की याचिका भी शामिल है.
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह 20 मई को केवल अंतरिम राहत के मुद्दे पर दलीलें सुनेगा. इससे पहले, 15 मई को CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अनुपस्थिति में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति अगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि सिर्फ अंतरिम राहत पर ही चर्चा होगी, बाकी याचिकाओं पर फिलहाल विचार नहीं किया जाएगा.

केंद्र ने कानून को बताया संवैधानिक, विरोधियों ने ठहराया असंवैधानिक
नया वक्फ कानून अप्रैल 2025 में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ. इसे लोकसभा में 288 और राज्यसभा में 128 सांसदों का समर्थन मिला था. केंद्र सरकार ने 25 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि यह कानून पूरी तरह से संवैधानिक है और इसे संसद से पारित किया गया है, इसलिए इस पर रोक नहीं लगाई जा सकती.
सरकार ने अपने 1332 पन्नों के हलफनामे में दावा किया कि 2013 के बाद से वक्फ संपत्तियों में 20 लाख एकड़ से अधिक का इजाफा हुआ है, जिससे कई बार निजी और सरकारी जमीनों पर विवाद पैदा हुए हैं. इसी कारण नए कानून को लाना जरूरी था.
हालांकि, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सरकार के इन आंकड़ों को गलत करार दिया है और कहा कि कोर्ट में झूठा हलफनामा दायर करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए. बोर्ड ने कानून को मुसलमानों के धार्मिक और सामाजिक अधिकारों का हनन बताया है.

AIMPLB ने फिर शुरू किया ‘वक्फ बचाओ अभियान’, देशभर में प्रदर्शन
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 16 मई तक स्थगित किए गए ‘वक्फ बचाओ अभियान’ को 18 मई से फिर से शुरू कर दिया है. बोर्ड ने एक बयान में कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” और देश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए संघर्ष फिर तेज किया जाए.
देश के कई हिस्सों में इस अभियान के तहत प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं. AIMPLB का कहना है कि यह कानून वक्फ संपत्तियों को सरकारी नियंत्रण में लाकर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं को कमजोर करेगा.

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