अबूझमाड़ के जंगल में बड़ी मुठभेड़: 20 नक्सली ढेर, बड़े कैडर के शामिल होने की पुष्टि

khabar pradhan

संवाददाता

21 May 2025

अपडेटेड: 6:59 AM 0stGMT+0530

अबूझमाड़ के जंगल में बड़ी मुठभेड़: 20 नक्सली ढेर, बड़े कैडर के शामिल होने की पुष्टि

अबूझमाड़ के जंगल में बड़ी मुठभेड़: 20 नक्सली ढेर, बड़े कैडर के शामिल होने की पुष्टि

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में अबूझमाड़ के घने जंगलों में बुधवार सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच जोरदार मुठभेड़ हुई. इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 20 नक्सलियों को ढेर कर दिया. मारे गए नक्सलियों में संगठन के बड़े कैडर के सदस्य भी शामिल हैं. सुरक्षाबलों ने घटनास्थल से सभी शव और हथियार बरामद कर लिए हैं.
बसवा राजू की मौजूदगी की सूचना, पुष्टि नहीं:

पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि अबूझमाड़ के बोटेर क्षेत्र में नक्सलियों के पोलित ब्यूरो सदस्य और संगठन के महासचिव बसवा राजू की मौजूदगी है. बसवा राजू पर 1.5 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है. हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह इस मुठभेड़ में मारा गया है या मौके से फरार हो गया. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस संबंध में मृतकों की पहचान कर रही हैं.
मुठभेड़ दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर जिलों की सीमा पर हुई, जहां लंबे समय से नक्सल गतिविधियों की आशंका बनी हुई थी. लगातार चल रहे ऑपरेशन और खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों ने घेराबंदी की, जिससे नक्सलियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा.
सात दिन पहले कर्रेगुट्टा में 31 नक्सली मारे गए:

इस मुठभेड़ से ठीक सात दिन पहले छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर स्थित कर्रेगुट्टा के पहाड़ों पर सुरक्षाबलों ने 24 दिन लंबे ऑपरेशन के बाद 31 नक्सलियों को मार गिराया था. इसमें 16 महिला और 15 पुरुष नक्सली शामिल थे. पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि यह ऑपरेशन एक बड़ी रणनीतिक सफलता है और इससे नक्सल नेटवर्क को गहरा झटका लगा है.
यह मुठभेड़ भी अबूझमाड़ ऑपरेशन की ही तरह व्यापक योजना और कड़ी खुफिया निगरानी के तहत की गई थी. लगातार मिल रही खुफिया जानकारियों के आधार पर सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के ठिकानों को निशाना बनाया.
संगठन में आंतरिक कलह और कमांड में बदलाव:

नक्सल संगठन के अंदर आंतरिक कलह की खबरें भी सामने आई हैं. बस्तर क्षेत्र के नक्सलियों को केवल ढाल के रूप में इस्तेमाल किए जाने की बात को लेकर संगठन के भीतर मतभेद बढ़े हैं. इसी बीच यह भी सामने आया है कि नक्सल कमांडर हिड़मा, जो करीब 40 वर्षों में संगठन के टॉप-2 (सेंट्रल कमेटी) में जगह पाने वाला पहला बस्तरीय नक्सली बना, संगठन की अंदरूनी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहा है.
वहीं दूसरी ओर, देवा बारसे को डीवीसीएम (DVCM) के पद से प्रमोट कर डीकेएसजेडसीएम (DKSZCM) कैडर में शामिल किया गया है और उसे नया कमांडर बनाया गया है. यह बदलाव संगठन की रणनीति और क्षेत्रीय नेतृत्व में बदलाव की ओर संकेत करता है.

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