अलीगढ़ का कुख्यात सीरियल किलर ‘डॉक्टर डेथ’ देवेंद्र शर्मा राजस्थान से गिरफ्तार, आश्रम में पुजारी बनकर छिपा था….
संवाददाता
21 May 2025
अपडेटेड: 11:08 AM 0stGMT+0530
अलीगढ़ का कुख्यात सीरियल किलर 'डॉक्टर डेथ' देवेंद्र शर्मा राजस्थान से गिरफ्तार, आश्रम में पुजारी बनकर छिपा था
50 से अधिक हत्याओं का आरोपी, कुख्यात सीरियल किलर देवेंद्र शर्मा उर्फ डॉक्टर डेथ को आखिरकार दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राजस्थान के दौसा जिले से गिरफ्तार कर लिया. 67 वर्षीय देवेंद्र शर्मा 2023 में तिहाड़ जेल से पैरोल पर बाहर आने के बाद फरार चल रहा था. पुलिस के अनुसार, वह दौसा के एक आश्रम में पुजारी बनकर प्रवचन दे रहा था, जहां से उसे दबोचा गया.
देवेंद्र शर्मा की हत्या की शैली बेहद खौफनाक रही है. वह टैक्सी ड्राइवरों को निशाना बनाता, पहले टैक्सी बुक करता और फिर सुनसान जगह ले जाकर उनकी हत्या कर देता था. इसके बाद शवों को उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में स्थित हजारा नहर में फेंक देता था, जहां मगरमच्छ लाशों को चट कर जाते थे. इस वजह से सबूत मिट जाते और पुलिस के पास कोई ठोस सुराग नहीं रहता.
हत्या के बाद वह टैक्सियों को ब्लैक मार्केट में बेच दिया करता था. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, देवेंद्र हत्या की सनक से ग्रस्त था और उसने हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के इलाकों में 50 से अधिक लोगों की जान ली है. अब तक 8 मामलों में दोषी सिद्ध हो चुका है, जिनमें 7 में उम्रकैद और एक केस में फांसी की सजा हो चुकी है.
पैरोल पर निकला और पुजारी बन गया
डॉक्टर डेथ के नाम से बदनाम इस अपराधी को 2023 में दो महीने की पैरोल पर रिहा किया गया था, लेकिन 3 अगस्त के बाद वह फरार हो गया. इसके बाद उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए धार्मिक चोला ओढ़ लिया और दौसा के एक आश्रम में पुजारी बन गया. पुलिस को उसकी तलाश में छह से अधिक टीमें लगानी पड़ीं, जो तकनीकी सर्विलांस और ग्राउंड इनपुट्स की मदद से उसे पकड़ने में सफल रहीं.
गिरफ्तारी के समय जब पुलिस की टीम आश्रम पहुंची, तो वह प्रवचन दे रहा था. गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने बताया कि देवेंद्र तिहाड़ जेल में सजा काट रहा था और पैरोल मिलने के बाद लगातार अपनी पहचान बदल-बदल कर भागता रहा.
BAMS डॉक्टर से सीरियल किलर बनने तक का खौफनाक सफर
देवेंद्र शर्मा अलीगढ़ जिले के छर्रा क्षेत्र के पुरैनी गांव का रहने वाला है. उसने बुलंदशहर में पढ़ाई की और पटना से BAMS (आयुर्वेदिक डॉक्टर) की डिग्री ली. वर्ष 1982 में शादी के बाद उसने छर्रा में गैस एजेंसी खोली, जिसमें 11 लाख रुपये का घाटा हो गया. कंपनी भाग गई और वह आर्थिक रूप से बर्बाद हो गया.
पुलिस के अनुसार, इस नुकसान के बाद देवेंद्र ने मानव अंगों की तस्करी का धंधा शुरू किया. 1998 से 2004 के बीच उसने 125 से ज्यादा अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करवाए. इसी दौरान उसने हत्या की वारदातों को अंजाम देना शुरू किया और किडनी रैकेट और मर्डर केस में उसकी गिरफ्तारी हुई.
देवेंद्र पर 1994 में पहला क्रिमिनल केस थाना बरला में दर्ज हुआ था. तभी से वह हिस्ट्रीशीटर बन गया. गांववालों के अनुसार, वह पिछले 33 सालों से गांव नहीं लौटा है और उसका मकान अब खंडहर बन चुका है. उसके भाई सुरेंद्र शर्मा CISF में दरोगा हैं और गांव में पुश्तैनी ज़मीन की देखरेख करते हैं.