MP में कलेक्टरों की परफार्मेंस पर सरकार की नई सख्ती…
संवाददाता
22 May 2025
अपडेटेड: 7:56 AM 0ndGMT+0530
MP में कलेक्टरों की परफार्मेंस पर सरकार की नई सख्ती:
मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने मध्यप्रदेश में कलेक्टरों के बार-बार होने वाले तबादलों पर नियंत्रण पाने के बाद अब उनके काम की गुणवत्ता की परख पर ध्यान देना शुरू कर दिया है. इसके तहत सरकार ने परफॉर्मेंस रेटिंग सिस्टम को और मज़बूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है.
अब कलेक्टरों के काम की रेटिंग सिर्फ स्टेट कॉल सेंटर से प्राप्त फीडबैक के आधार पर नहीं होगी, क्योंकि इससे कई अच्छे कलेक्टरों की रेटिंग कमजोर निकल रही थी. अब सरकार इंडिकेटर पैरामीटर और डायनॉमिक पैरामीटर के आधार पर रेटिंग करेगी, जिससे वास्तविक काम का मूल्यांकन किया जा सके.
मई महीने में हुई समाधान ऑनलाइन बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा था कि उनके पास सभी 55 जिलों के कलेक्टरों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट है, लेकिन इस बार उसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा. इससे कलेक्टरों में हलचल मच गई थी और इसके बाद सरकार ने जिलावार नई ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने की दिशा में काम तेज कर दिया.
400 से अधिक पैरामीटर से बनेगी रिपोर्ट, हर विभाग की योजना होगी शामिल

इस नई व्यवस्था को MPSEDC (मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) के सीईओ आशीष वशिष्ठ देख रहे हैं. उन्होंने बताया कि कलेक्टरों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट 400 से अधिक पैरामीटर के आधार पर तैयार की जाएगी, जो हर विभाग की योजनाओं से जुड़ी होगी.
हर विभाग से ऑनलाइन डेटा लिया जा रहा है और सभी विभागों के पोर्टल आपस में कनेक्टेड हैं, जिससे किसी अलग जानकारी की ज़रूरत नहीं है. रिपोर्ट बनाने का काम डिजिटल रूप से हो रहा है और यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखने की कोशिश की जा रही है.
फिलहाल यह कार्य शुरुआती चरण में है, इसलिए जिलों को सामूहिक तौर पर रिपोर्ट नहीं दी गई है. लेकिन अगले दो माह में सभी पैरामीटर तय कर दिए जाएंगे, जिसके बाद हर महीने परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार होगी.
शासन की प्राथमिकता भी होगी आधार, सीज़नल पैरामीटर होंगे प्रभावी
नई प्रणाली की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ योजनाओं की प्रगति नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं को भी ध्यान में रखा जाएगा. उदाहरण के लिए:
• गर्मी में गेहूं खरीदी
• जून में शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया
• बारिश के दौरान बाढ़ प्रबंधन और राहत कार्य
• त्योहारी सीजन में कानून व्यवस्था
• उद्योग वर्ष के दौरान उद्योगों के लिए भूमि आवंटन आदि.
इस तरह के डायनैमिक पैरामीटर पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कलेक्टर बदलते समय और आवश्यकता के अनुसार तेज़ी से काम कर रहे हैं या नहीं.