ओवैसी ने बहरीन में पाकिस्तान को लताड़ा, सुले के नेतृत्व में दोहा में सर्वदलीय दल

khabar pradhan

संवाददाता

25 May 2025

अपडेटेड: 9:00 AM 0thGMT+0530

ओवैसी ने बहरीन में पाकिस्तान को लताड़ा, सुले के नेतृत्व में दोहा में सर्वदलीय दल

ओवैसी ने बहरीन में पाकिस्तान को लताड़ा, सुले के नेतृत्व में दोहा में सर्वदलीय दल

भारत की हुंकार:

भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत का पक्ष रखने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने खाड़ी देशों का दौरा शुरू किया है। इस कड़ी में, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बहरीन में पाकिस्तान को जमकर लताड़ा, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की सांसद सुप्रिया सुले के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल अब दोहा, कतर पहुंच चुका है। यह दौरा भारत की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाना और पाकिस्तान की साजिशों को बेनकाब करना है।

बहरीन में ओवैसी की हुंकार: पाकिस्तान की सच्चाई उजागर

असदुद्दीन ओवैसी, जो अपनी बेबाक और तीखी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं, ने बहरीन में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर करारा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “पाकिस्तान एक आतंकी मुल्क है, जो न केवल भारत बल्कि पूरी मानवता के लिए खतरा बना हुआ है।” ओवैसी ने वहां मौजूद गणमान्य व्यक्तियों और अधिकारियों को भारत में आतंकवादी गतिविधियों के सबूत पेश किए, जिसमें कश्मीर में सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकी हमलों में पाकिस्तान की भूमिका को रेखांकित किया गया।

उनके भाषण ने न केवल बहरीन के नेताओं का ध्यान खींचा, बल्कि यह भी साबित किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है। ओवैसी ने यह भी जोर दिया कि भारत शांति और सह-अस्तित्व का समर्थक है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ उसका रुख अडिग रहेगा।

सुप्रिया सुले का नेतृत्व: दोहा में कूटनीति की नई उड़ान

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही सुप्रिया सुले ने दोहा में कतर के शीर्ष अधिकारियों और नेताओं के साथ मुलाकात की। इस दौरे का मकसद न केवल आतंकवाद के खिलाफ भारत का पक्ष रखना है, बल्कि खाड़ी देशों के साथ भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना भी है। सुप्रिया सुले ने अपने संबोधन में कहा, “भारत एक शांतिप्रिय राष्ट्र है, लेकिन हमारी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।” उन्होंने कतर के नेताओं से अपील की कि वे आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मिलकर काम करें और पाकिस्तान की हरकतों पर कड़ा रुख अपनाएं।

सुले के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल सऊदी अरब, कुवैत और अल्जीरिया का भी दौरा करेगा, जहां वे विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और अधिकारियों के साथ मुलाकात करेंगे। यह दौरा भारत की कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता एकजुट होकर राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं।

भारत की रणनीति: वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता

यह सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भारत सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जो पाकिस्तान के आतंकवादी गतिविधियों को वैश्विक मंच पर उजागर करने के लिए बनाई गई है। हाल के वर्षों में, भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने बार-बार सबूत पेश किए हैं कि पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों को पनाह देता है और उन्हें आर्थिक व सैन्य सहायता प्रदान करता है। इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न दलों के नेताओं का शामिल होना यह दर्शाता है कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत में कोई राजनीतिक मतभेद नहीं है।

इस दौरे में शामिल अन्य प्रमुख नेताओं में विभिन्न दलों के सांसद और वरिष्ठ नेता हैं, जो भारत के पक्ष को और मजबूती से रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह कदम न केवल भारत की कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत अपने पड़ोस में शांति और स्थिरता के लिए कितना गंभीर है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?

यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पहला, यह खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को और गहरा करने का एक अवसर है। खाड़ी देश न केवल भारत के लिए महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं, बल्कि वहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी भी रहते हैं। दूसरा, यह दौरा आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहमति बनाने में मदद करेगा। तीसरा, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने की भारत की रणनीति को यह दौरा और बल देगा।

भारत का अडिग संकल्प

भारत का यह सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल न केवल आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि भारत एकजुट और शक्तिशाली है। ओवैसी की बेबाकी और सुप्रिया सुले की कूटनीतिक सूझबूझ ने इस दौरे को और प्रभावी बनाया है। आने वाले दिनों में, यह प्रतिनिधिमंडल अन्य देशों में भी भारत का पक्ष रखेगा और वैश्विक समुदाय को यह बताएगा कि भारत न केवल अपनी सुरक्षा के लिए, बल्कि विश्व शांति के लिए भी प्रतिबद्ध है।

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