पहलगाम हमले पर शिवसेना का तीखा तंज
संवाददाता
28 May 2025
अपडेटेड: 10:33 AM 0thGMT+0530
पहलगाम हमले पर शिवसेना का तीखा तंज: '
हां, बालासाहेब होते तो इस्तीफा मांग लिया जाता!’
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने न केवल देश को झकझोरा है, बल्कि इसने महाराष्ट्र की सियासत में भी एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। सामना के संपादकीय में कहा गया, “अगर बालासाहेब ठाकरे आज होते, तो पहलगाम हमले के बाद इस्तीफा मांग लिया जाता!” यह बयान न केवल केंद्र सरकार पर एक करारा प्रहार है, बल्कि यह शिवसेना की उस आक्रामक शैली की याद दिलाता है, जो कभी बालासाहेब ठाकरे की पहचान थी। आइए, इस सियासी तंज और इसके पीछे की कहानी को करीब से समझते हैं।
पहलगाम हमला: देश का गहरा जख्म
पहलगाम, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांति के लिए जाना जाता है, हाल ही में एक आतंकी हमले का शिकार बना। इस हमले में कई जवान और नागरिक शहीद हो गए, जिसने पूरे देश को सदमे में डाल दिया। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में यह एक और दर्दनाक अध्याय बन गया। इस हमले ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय की सुरक्षा नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की नाकामी करार दिया है, और शिवसेना ने इस मुद्दे को सबसे तीखे अंदाज में उठाया है।
सामना के संपादकीय में लिखा गया, “पहलगाम में हमारे जवानों और नागरिकों का खून बहा, और केंद्र सरकार खामोश है। अगर बालासाहेब आज होते, तो वह इस चुप्पी को बर्दाश्त नहीं करते। इस्तीफा मांग लिया जाता!” यह बयान न केवल अमित शाह पर निशाना साधता है, बल्कि यह केंद्र सरकार की आतंकवाद के खिलाफ नीतियों पर भी सवाल उठाता है।
बालासाहेब की विरासत: बेबाक और बुलंद आवाज
बालासाहेब ठाकरे, शिवसेना के संस्थापक, अपनी बेबाक बयानबाजी और देशभक्ति के लिए जाने जाते थे। वह हमेशा राष्ट्रीय सुरक्षा और हिंदुत्व के मुद्दों पर खुलकर बोला करते थे। सामना का यह संपादकीय उसी विरासत को आगे बढ़ाता है। इसमें कहा गया है कि अगर बालासाहेब आज होते, तो वह पहलगाम हमले को लेकर केंद्र सरकार से कड़े सवाल पूछते और गृह मंत्री से जवाबदेही मांगते।
सोशल मीडिया पर इस संपादकीय ने खूब सुर्खियां बटोरीं। एक यूजर ने लिखा, “शिवसेना ने फिर से वही पुराना जोश दिखाया। बालासाहेब की कमी आज खल रही है, लेकिन सामना ने उनकी आवाज को जिंदा रखा है।” वहीं, कुछ लोगों ने इसे सियासी ड्रामा करार दिया और कहा कि शिवसेना केवल केंद्र सरकार को निशाना बनाने के लिए यह मुद्दा उठा रही है।
शिवसेना का तंज: अमित शाह पर सीधा हमला
सामना के संपादकीय में अमित शाह पर सीधा हमला करते हुए कहा गया कि गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन पहलगाम हमले ने उनकी रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। संपादकीय में लिखा गया, “जम्मू-कश्मीर में शांति का दावा करने वाली सरकार को अब जवाब देना होगा। हमारे जवान और नागरिक मर रहे हैं, और गृह मंत्री खामोश क्यों हैं?”
यह तंज न केवल अमित शाह की जवाबदेही पर सवाल उठाता है, बल्कि यह केंद्र सरकार की आतंकवाद विरोधी नीतियों की कमजोरियों को भी उजागर करता है। शिवसेना ने यह भी कहा कि अगर बालासाहेब होते, तो वह इस तरह की नाकामी को बर्दाश्त नहीं करते और इस्तीफे की मांग उठाते।
सियासी ड्रामा या जायज सवाल?
इस संपादकीय ने महाराष्ट्र और राष्ट्रीय सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे शिवसेना की सियासी चाल मान रहे हैं, जिसके जरिए वह केंद्र सरकार को घेरना चाहती है। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी (MVA) का हिस्सा होने के नाते शिवसेना का यह तंज केंद्र की बीजेपी सरकार पर हमले का हिस्सा माना जा रहा है। एक यूजर ने ट्वीट किया, “शिवसेना का यह बयान केवल सियासत है। अगर वह इतने ही देशभक्त हैं, तो पहले अपने गठबंधन की नीतियों पर सवाल उठाएं।”
वहीं, शिवसेना समर्थकों का मानना है कि यह बयान जायज है। एक समर्थक ने लिखा, “पहलगाम में हमारे जवान शहीद हुए, और केंद्र सरकार चुप है। शिवसेना ने वही सवाल उठाया, जो हर भारतीय के मन में है।” यह बहस दर्शाती है कि पहलगाम हमला न केवल एक सुरक्षा मुद्दा है, बल्कि यह सियासी जंग का भी हिस्सा बन गया है।
महाराष्ट्र और केंद्र का टकराव
शिवसेना और बीजेपी के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। 2019 में गठबंधन टूटने के बाद से दोनों पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ तीखे हमले करती रही हैं। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने सामना के जरिए कई बार केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। पहलगाम हमले पर यह ताजा तंज उसी सियासी टकराव का हिस्सा है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना इस मुद्दे के जरिए अपनी खोई हुई सियासी जमीन को फिर से हासिल करने की कोशिश कर रही है। बालासाहेब ठाकरे की बेबाक शैली को अपनाकर वह अपनी पुरानी छवि को मजबूत करना चाहती है। लेकिन यह भी सच है कि पहलगाम हमले जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सियासत करने से विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
जनता की प्रतिक्रिया: गुस्सा और सवाल
पहलगाम हमले ने देश की जनता में गुस्सा और दुख पैदा किया है। सोशल मीडिया पर लोग इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों से जवाबदेही मांग रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “शिवसेना ने सही सवाल उठाया है। हमारे जवान मर रहे हैं, और सरकार क्या कर रही है?” वहीं, कुछ लोगों ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में समय लगता है और इसे सियासत का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।
क्या होगा अगला कदम?
शिवसेना का यह तंज महाराष्ट्र और केंद्र के बीच सियासी जंग को और तेज कर सकता है। पहलगाम हमले ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं, और विपक्ष इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं है। शिवसेना की यह मांग कि अगर बालासाहेब होते तो इस्तीफा मांगा जाता, एक सांकेतिक बयान है, जो केंद्र सरकार को जवाबदेही लेने के लिए मजबूर कर सकता है।
दूसरी ओर, बीजेपी इस तंज का जवाब देने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार जल्द ही इस हमले पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सियासी जंग राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को और जटिल कर देगी?