भारत-चीन-रूस का नया गठजोड़: विश्व मंच पर उभरती ताकत

khabar pradhan

संवाददाता

31 May 2025

अपडेटेड: 12:48 PM 0stGMT+0530

भारत-चीन-रूस का नया गठजोड़: विश्व मंच पर उभरती ताकत

भारत-चीन-रूस का नया गठजोड़: विश्व मंच पर उभरती ताकत,

अमेरिका की बौखलाहट !

वैश्विक मंच पर एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने के आसार हैं। भारत, चीन और रूस के बीच एक नई साझेदारी की सुगबुगाहट ने विश्व राजनीति में हलचल मचा दी है। हाल ही में रूस के एक वरिष्ठ राजनयिक ने संकेत दिए हैं कि ये तीनों देश एक बार फिर हाथ मिलाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इस खबर ने न केवल वैश्विक समीकरणों को बदलने की संभावना को जन्म दिया है, बल्कि अमेरिका को भी तिलमिला दिया है। जवाब में, अमेरिका ने कथित तौर पर 500% तक टैरिफ लगाने की धमकी दी है। आइए, इस घटनाक्रम के हर पहलू को समझते हैं और जानते हैं कि यह नया गठजोड़ विश्व व्यवस्था को कैसे प्रभावित कर सकता है।

पुरानी दोस्ती, नई शुरुआत

भारत, चीन और रूस का त्रिकोणीय गठजोड़ कोई नई बात नहीं है। इन तीनों देशों ने पहले भी रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिकोण के तहत सहयोग किया है। यह साझेदारी वैश्विक शांति, आर्थिक सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई थी। हाल के वर्षों में भारत और चीन के बीच सीमा विवादों ने इस गठजोड़ को कुछ हद तक कमजोर किया था, लेकिन अब दोनों देशों ने तनाव कम करने के लिए एक समझौते की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। रूस की मध्यस्थता और सामरिक हितों ने इस प्रक्रिया को और तेज किया है। यह नया गठजोड़ न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

क्यों बौखलाया अमेरिका?

इस त्रिकोणीय साझेदारी की खबर ने अमेरिका को असहज कर दिया है। वैश्विक मंच पर अमेरिका लंबे समय से एकध्रुवीय व्यवस्था को बनाए रखने की कोशिश करता रहा है, लेकिन भारत, चीन और रूस जैसे देशों का उभरना उसकी इस रणनीति के लिए चुनौती बन रहा है। खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने इस गठजोड़ को कमजोर करने के लिए आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है। 500% टैरिफ की धमकी इसका एक हिस्सा हो सकती है। यह टैरिफ मुख्य रूप से इन देशों के निर्यात को प्रभावित करने की कोशिश है, जिससे उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव पड़े। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह धमकी वास्तव में इन देशों को रोक पाएगी?

भारत की रणनीतिक चाल

भारत के लिए यह गठजोड़ कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक तरफ, यह भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत स्थिति देता है, वहीं दूसरी तरफ यह देश की कूटनीतिक स्वायत्तता को भी रेखांकित करता है। भारत ने हमेशा से ही गुट-निरपेक्षता की नीति अपनाई है, और यह नया गठजोड़ उसी नीति का विस्तार है। चीन के साथ सीमा तनाव कम करने का समझौता भारत की कूटनीतिक सफलता का प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि भारत बातचीत और सहयोग के जरिए जटिल मुद्दों को सुलझाने में सक्षम है। इसके अलावा, रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंध इस साझेदारी को और मजबूती देते हैं।

चीन का दांव और रूस की भूमिका

चीन के लिए यह गठजोड़ वैश्विक आर्थिक और सामरिक प्रभाव बढ़ाने का एक मौका है। चीन पहले से ही अपनी बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के जरिए वैश्विक व्यापार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। भारत के साथ बेहतर संबंध और रूस की साझेदारी उसे अमेरिका के दबाव का मुकाबला करने में मदद कर सकती है। वहीं, रूस इस गठजोड़ को पुनर्जनन के लिए एक मंच के रूप में देख रहा है। यूक्रेन संकट के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना कर रहे रूस के लिए भारत और चीन जैसे साझेदार महत्वपूर्ण हैं। रूस की मध्यस्थता ने भारत और चीन के बीच विश्वास बहाली में अहम भूमिका निभाई है।

वैश्विक मंच पर क्या बदलेगा?

इस गठजोड़ के कई दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। सबसे पहले, यह वैश्विक शक्ति संतुलन को बहुध्रुवीय दिशा में ले जाएगा। भारत, चीन और रूस मिलकर न केवल आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देंगे, बल्कि जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और साइबर सुरक्षा जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी एकजुट हो सकते हैं। दूसरा, यह गठजोड़ ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे मंचों को और मजबूती देगा। तीसरा, अमेरिका और पश्चिमी देशों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है, क्योंकि यह गठजोड़ उनकी एकध्रुवीय नीतियों को चुनौती देगा।

आर्थिक प्रभाव और टैरिफ की धमकी

अमेरिका की 500% टैरिफ की धमकी से भारत, चीन और रूस की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है, लेकिन ये देश इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। भारत और चीन दोनों ही अपनी अर्थव्यवस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल और चीन की ‘मेड इन चाइना 2025’ योजना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इसके अलावा, रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग इन देशों को आर्थिक स्थिरता प्रदान कर सकता है।

यह गठजोड़ अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके संकेत साफ हैं कि वैश्विक मंच पर नई शक्तियों का उदय हो रहा है। भारत, चीन और रूस के बीच सहयोग न केवल क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अमेरिका की धमकी के बावजूद, ये देश अपनी रणनीति पर अडिग हैं। यह गठजोड़ विश्व को यह संदेश देता है कि सहयोग और संवाद ही भविष्य की राह है।

एक नई विश्व व्यवस्था की ओर

भारत, चीन और रूस का यह गठजोड़ न केवल इन देशों के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक है। यह साझेदारी वैश्विक शांति, समृद्धि और सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है। अमेरिका की बौखलाहट और टैरिफ की धमकी इस गठजोड़ की ताकत को और उजागर करती है। आइए, देखते हैं कि यह नया त्रिकोण विश्व मंच पर क्या कमाल दिखाता है!

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