तेज प्रताप यादव की RJD से छुट्टी
संवाददाता
2 June 2025
अपडेटेड: 8:35 AM 0ndGMT+0530
तेज प्रताप यादव की RJD से छुट्टी
अब्दुल बारी सिद्दीकी का खुला खत बना सियासी तूफान !
बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। यह फरमान RJD के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के एक खुले खत के जरिए सामने आया, जिसने न केवल तेज प्रताप को बल्कि पूरे सियासी गलियारे को हिलाकर रख दिया। इस खत में तेज प्रताप के आचरण और हाल की गतिविधियों को “पार्टी के मूल्यों के खिलाफ” बताया गया है। यह खबर न सिर्फ बिहार की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर है, बल्कि यह लालू परिवार की एकता पर भी सवाल उठाती है। आइए, इस सियासी भूचाल के हर पहलू को गहराई से समझते हैं।
“पार्टी से बेदखल”: तेज प्रताप पर गिरी गाज
तेज प्रताप यादव, जो अपनी अनोखी शैली और बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं, इस बार अपने ही परिवार और पार्टी के निशाने पर आ गए। अब्दुल बारी सिद्दीकी के खुले खत में साफ कहा गया कि तेज प्रताप का व्यवहार और उनकी हालिया गतिविधियां RJD के सिद्धांतों और सामाजिक न्याय की विचारधारा के खिलाफ हैं। सोशल मीडिया पर तेज प्रताप की एक कथित प्रेमिका के साथ तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद यह कार्रवाई हुई। खत में यह भी उल्लेख किया गया कि तेज प्रताप का निजी जीवन और उनकी गैर-जिम्मेदाराना हरकतें पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही थीं। इस निष्कासन ने न केवल तेज प्रताप के सियासी भविष्य पर सवाल उठाए, बल्कि लालू परिवार की एकता को भी कठघरे में खड़ा कर दिया।
अब्दुल बारी सिद्दीकी का खुला खत: सियासत में हंगामा
अब्दुल बारी सिद्दीकी, जो RJD के वरिष्ठ और सम्मानित नेताओं में से एक हैं, ने इस खुले खत के जरिए तेज प्रताप को निशाना बनाया। खत में उन्होंने लिखा, “तेज प्रताप यादव का आचरण और उनकी गतिविधियां हमारे सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया जाता है।” इस खत ने न केवल तेज प्रताप को, बल्कि पूरे लालू परिवार को सियासी तौर पर असहज स्थिति में डाल दिया। सिद्दीकी ने यह भी कहा कि तेज प्रताप का निजी जीवन उनकी अपनी जिम्मेदारी है, लेकिन इसका असर पार्टी की छवि पर पड़ रहा था। इस खत ने बिहार की सियासत में एक नया तूफान खड़ा कर दिया, और लोग अब यह कयास लगा रहे हैं कि क्या यह लालू परिवार में दरार का संकेत है।
तेज प्रताप की विवादास्पद छवि
तेज प्रताप यादव हमेशा से अपनी अनोखी शैली और बयानों के लिए जाने जाते हैं। चाहे वह “कृष्ण-अर्जुन” वाली टिप्पणी हो या फिर योग और पर्यावरण पर उनके बयान, वह हमेशा चर्चा में रहे हैं। लेकिन इस बार मामला उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियो में तेज प्रताप को एक कथित प्रेमिका के साथ देखा गया, जिसे लालू परिवार ने “AI-जनरेटेड” होने से इनकार कर दिया। इन तस्वीरों ने न केवल उनकी निजी जिंदगी को सवालों के घेरे में ला दिया, बल्कि RJD की छवि पर भी सवाल उठाए। सिद्दीकी के खत में इन गतिविधियों को “गैर-जिम्मेदाराना” बताते हुए तेज प्रताप को पार्टी और परिवार से अलग करने का फैसला लिया गया।
लालू परिवार में दरार?
यह निष्कासन केवल तेज प्रताप तक सीमित नहीं है; यह लालू परिवार की एकता पर भी सवाल उठाता है। लालू प्रसाद यादव, जो RJD के संस्थापक और बिहार की सियासत के दिग्गज हैं, ने इस फैसले का समर्थन किया। सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि लालू ने स्वयं तेज प्रताप को निष्कासित करने का फैसला लिया, क्योंकि उनका व्यवहार परिवार के संस्कारों के अनुरूप नहीं था। यह फैसला एक पिता के लिए कितना मुश्किल रहा होगा, इसकी चर्चा भी सोशल मीडिया पर हो रही है। एक यूजर ने लिखा, “लालू जी ने सिद्धांतों के लिए अपने बेटे को भी नहीं बख्शा। यह साहस हर नेता में नहीं होता।” यह घटना लालू परिवार और RJD के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकती है।
सोशल मीडिया पर सियासी भूचाल
इस खबर के बाद सोशल मीडिया पर हलचल मच गई। कुछ यूजर्स ने लालू और सिद्दीकी के इस फैसले की तारीफ की, इसे पार्टी के सिद्धांतों की जीत बताया। एक यूजर ने लिखा, “तेज प्रताप का निष्कासन RJD की छवि को मजबूत करेगा। यह दिखाता है कि सिद्धांतों से ऊपर कोई नहीं है।” वहीं, कुछ यूजर्स ने इसे लालू परिवार में आंतरिक कलह का संकेत माना। तेज प्रताप के समर्थकों ने उनके निष्कासन को गलत ठहराया और कहा कि यह उनके खिलाफ साजिश का हिस्सा है। यह बहस बिहार की सियासत में एक नया रंग भर रही है, और लोग अब तेजस्वी यादव और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
RJD का भविष्य और बिहार की सियासत
तेज प्रताप का निष्कासन RJD के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है। वह भले ही सियासी तौर पर उतने सक्रिय नहीं थे, लेकिन उनकी मौजूदगी पार्टी के लिए एक प्रतीकात्मक महत्व रखती थी। अब्दुल बारी सिद्दीकी का खुला खत और लालू का समर्थन यह दिखाता है कि RJD अपनी छवि को सुधारने और सिद्धांतों को मजबूत करने के लिए कठोर कदम उठाने को तैयार है। लेकिन यह फैसला पार्टी के भीतर एकता को प्रभावित कर सकता है। बिहार की सियासत में, जहां RJD एक प्रमुख विपक्षी दल है, यह घटना विपक्षी गठबंधन और आगामी चुनावों पर भी असर डाल सकती है।
सियासत का नया अध्याय
तेज प्रताप यादव का RJD से निष्कासन और अब्दुल बारी सिद्दीकी का खुला खत बिहार की सियासत में एक नया अध्याय शुरू करता है। यह फैसला न केवल तेज प्रताप के सियासी करियर पर सवाल उठाता है, बल्कि लालू परिवार और RJD की एकता को भी कठघरे में खड़ा करता है। यह घटना यह भी साबित करती है कि सियासत में सिद्धांत और छवि कितने महत्वपूर्ण हैं। तेज प्रताप के भविष्य और RJD की रणनीति पर अब सभी की नजरें टिकी हैं। क्या यह निष्कासन पार्टी को मजबूत करेगा या नई चुनौतियां खड़ी करेगा? यह सवाल आने वाले समय में ही जवाब देगा।