अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए छात्रों से बातचीत!
संवाददाता
4 July 2025
अपडेटेड: 1:11 PM 0thGMT+0530
4 जुलाई 2025: खबर प्रधान डेस्क- छात्रों ने पूछा अंतरिक्ष में कैसे सोते हैं क्या कहते हैं!
अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर पहुंचने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने कल 3 जुलाई को उत्तर प्रदेश और केरल के छात्रों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की ।
इस बातचीत के लिए जिन छात्रों को चुना गया वह केरल के कोझिकोड जिले के अपार सेकेंडरी स्कॉलरशिप परीक्षा और साइंस क्लब की गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले थे
इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए छात्रों ने शुभांशु शुक्ला से बहुत से प्रश्न पूछे और शुभांशु शुक्ला ने उसका विस्तार से जवाब दिया । जिसमें मुख्य प्रश्न थे—
अंतरिक्ष में सोते कैसे हैं ? क्या खाते हैं और स्वस्थ कैसे रहते हैं?
इस दौरान छात्रों ने अंतरिक्ष से जुड़े कुछ सवाल पूछे जिनका जवाब शुभांशु शुक्ला ने विस्तार से जवाब दिया छात्रों ने पूछा अंतरिक्ष में सोते कैसे हैं क्या कहते हैं और बीमार पड़ने पर क्या होता है
शुभांशु शुक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष में फर्श या छत जैसी कोई चीज नहीं होती । इसलिए कोई दीवार पर सोता है तो कोई छत पर। सोते समय खुद को बांधकर रखना पड़ता है । ताकि तैरते हुए कहीं और ना चले जाएं ।
ग्रेविटी के अनुसार शरीर को डालना होता है !
शुभांशु शुक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष में माइक्रो ग्रेविटी के अनुसार शरीर ढल जाता है लेकिन पृथ्वी पर लौटते हैं तो फिर से ग्रेविटी के अनुसार शरीर को ढालना पड़ता है। यह एक बड़ी चुनौती होती है । और इसके लिए विशेष तैयारी और अलग-अलग तरह की प्रक्रियाएं अपनाई जाती है।
अंतरिक्ष में एक्सरसाइज भी है जरूरी !
शुभांशु शुक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष में माइक्रोग्रेविटी में शरीर की मांसपेशियों का बहुत नुकसान होता है। इसलिए फिट रहने के लिए रोजाना एक्सरसाइज जरूरी होती है ।उन्होंने बताया कि वहां एक खास तरह की साइकिल होती है जिसमें कोई सीट नहीं होती । बस पैडल से खुद को बांधकर एक्सरसाइज करनी पड़ती है। मानसिक स्वास्थ्य पर उन्होंने बताया अकेलापन फील ना हो इसलिए परिवार और दोस्तों से संपर्क बनाए रखने के लिए तकनीक की मदद ली जाती है। जिससे मनोबल बना रहता है ।
इन छात्रों ने शुभांशु शुक्ला से बातचीत को बेहद प्रेरणादायक बताया है । शुभांशु शुक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष यात्री को बहुत कम समय मिल पाता है । लेकिन जब भी उसे समय मिलता है । तो वह अंतरिक्ष से धरती को निहारते हैं जो काफी खूबसूरत दिखती है ।
एक अन्य छात्र ने पूछा इस बातचीत से हमें अपने भविष्य की दिशा और संभावनाओं की झलक मिली।