कब करें महालक्ष्मी हाथी पूजा 2025: जानें सही तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

khabar pradhan

संवाददाता

13 September 2025

अपडेटेड: 1:09 PM 0thGMT+0530

कब करें महालक्ष्मी हाथी पूजा 2025: जानें सही तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

13 सितंबर 2025 : पितृपक्ष की अष्टमी तिथि- गजलक्ष्मी रूप का पूजन
भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर 15 दिनों तक चलने वाला यह व्रत अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर पूर्ण होता है।

यह गज लक्ष्मी पूजा श्राद्ध के दिनों में यानि पितृ पक्ष के अष्टमी तिथि पर की जाती है। इस पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन हम धन और वैभव की देवी मां गजलक्ष्मी के स्वरूप की पूजा करते हैं।

माना जाता है कि यह गज लक्ष्मी की पूजा दीपावली पर की गई महालक्ष्मी की पूजा से अधिक महत्व रखती है। इस दिन हाथी पर सवार लक्ष्मी जी की प्रतिमा को स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत करके विधि विधान से मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है।

इसलिए इसे हाथी पूजा भी कहते हैं।

16 दिनों की यह पूजा:
यह व्रत कम से कम 16 दिनों तक रखा जाता है ।माना जाता है कि माता लक्ष्मी की धन की देवी की पूजा की जाती है और इस पूजन से जीवन में धन संबंधी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता।
इस वर्ष यह व्रत 31 अगस्त से शुरू हो चुका है जो 14 सितंबर तक चलेगा। कुछ लोग 16 दिन की यह पूजा करते हैं। वहीं कुछ लोग अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन हाथी पर सवार गजलक्ष्मी माता का एक दिवसीय पूजन करते हैं।

आईए जानते हैं शुभ मुहूर्त:
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 14 सितंबर रविवार सुबह 5:04 से प्रारंभ हो रही है और रात में 3:06 पर पूर्ण हो रही है । उदयातिथि से अष्टमी तिथि महालक्ष्मी का पूजन 14 सितंबर को किया जाएगा । अष्टमी तिथि पूरे दिन रहेगी।
यानि इस वर्ष महालक्ष्मी पूजन 14 सितंबर रविवार को किया जाएगा।

पूजा विधि:
सबसे पहले व्रत के नियमों का पालन करें । घर में साफ सफाई करें । घर में गंगाजल छिड़क कर शाम को शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी की प्रतिमा या हाथी पर बैठी हुई लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित करें।

सबसे पहले चौकी पर एक लाल कपड़ा बिछायें।
पूजा स्थल पर हल्दी से कमल दल बनाएं या चौक बनाएं।
हाथी पर बैठी हुई लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित करें।
पूजन में श्री यंत्र अवश्य रखें क्योंकि मां लक्ष्मी को श्री यंत्र अत्यंत प्रिय है।

इसके साथ ही सोने चांदी के सिक्के, फल ,फूल ,माता के श्रृंगार का सामान रखें ।

एक कलश में शुद्ध जल में गंगाजल मिलाकर पूजा स्थान पर रखें।
इस कलश में पान का पत्ता भी रखें और उस पर नारियल रखें।
महालक्ष्मी को लाल रंग का फूल अर्पित करें ।
सिंदूर से तिलक करें । चंदन अबीर, गुलाल ,दुर्वा,नारियल चढ़ायें।

पूजा के दौरान 16–16 की संख्या दूर्वा चढ़ाएं।
माता के लिए बेसन से आभूषण बनाए जाते हैं, आभूषण चढ़ाएं। धूप दीप जलाएं ।
विधि विधान से हाथी की पूजा करें । माता को खीर का भोग लगाएं ।
देवी लक्ष्मी की पूजा के बाद हाथी की पूजा करें ।
बेसन से बने पकवानों का हाथी को भोग लगाएं। हाथी को दुर्वा अवश्य चढ़ाएं।

मां लक्ष्मी की कथा करें और आरती करें । मां को प्रणाम करें और महालक्ष्मी मंत्र का जाप करें। और हवन अवश्य करें। यदि संभव हो तो श्री सूक्त का पाठ अवश्य करें।

लक्ष्मी जी के मंत्रों का जाप:
आद्यलक्ष्मै नमः
विद्यालक्ष्मै नमः
सौभाग्य लक्ष्मै नमः
अमृतलक्ष्मै नमः
कामलक्ष्मै नमः
सत्यलक्ष्मै नमः
भोगलक्ष्मै नमः
योगलक्ष्मै नमः

महालक्ष्मी की पूजा के समय इन मंत्रों के जाप से घर में धन ,वैभव ,सुख और समृद्धि आती है।

ॐ महालक्ष्मै नमो नमः
ॐ श्री विष्णु प्रियायै नमो नमः
ॐ धनप्रदाय नमो नमः
ॐ विश्वजनन्यै नमो नमः

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