पितृ मोक्ष अमावस्या 2025 : कैसे करें पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण, जानें
संवाददाता
16 September 2025
अपडेटेड: 1:11 PM 0thGMT+0530
16 सितंबर 2025: कैसे करें पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण: जानें तिथि- महत्व, पूजन विधि और लाभ
भारतीय संस्कृति में पूर्वजों का सम्मान और स्मरण विशेष स्थान रखता है। उनके आशीर्वाद से ही परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। इन्हीं पितरों को तृप्त करने के लिए भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को आने वाली पितृ मोक्ष अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या / महालय अमावस्या) का विशेष महत्व है।
इस वर्ष पितृ मोक्ष अमावस्या 21 सितंबर 2025 (रविवार) को पड़ेगी। यह दिन पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है और जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, उनके लिए भी इस दिन श्राद्ध व तर्पण करना सर्वमान्य माना गया है।
पितृ मोक्ष अमावस्या का महत्व:
- यह दिन पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
- जो लोग पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाए, वे इस दिन अनुष्ठान करके सभी पूर्वजों को तृप्त कर सकते हैं।
- इस तिथि को किया गया श्राद्ध व तर्पण पितृ दोष को शांत करता है और परिवार में सुख-समृद्धि लाता है।
- आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन कृतज्ञता और स्मरण का प्रतीक है, जो हमें अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ता है।
पूजन-विधि:
प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो गंगा स्नान या गंगाजल का प्रयोग करें।
- तिल, कुशा और जल से पितरों का तर्पण करें।
- चावल या आटे से बने पिण्ड अर्पित करें।
- सत्त्विक भोजन बनाकर ब्राह्मणों को भोजन कराएँ।
- गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन खिलाना शुभ माना जाता है।
- दान और पुण्य कर्म:
वस्त्र, अन्न, फल, धान्य या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें। - स्मरण और प्रार्थना:
दीपक जलाकर अपने पूर्वजों का स्मरण करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।
श्रद्धा और तर्पण क्यों है जरूरी–क्यों करना चाहिए?
- पितरों की आत्मा को संतोष और मोक्ष मिलता है।
- वंशजों पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है।
- जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और उन्नति प्राप्त होती है।
- पितृ दोष दूर होता है और पारिवार का कल्याण होता है।
- घर-परिवार में समृद्धि और सौहार्द्र बढ़ता है।
- मानसिक शांति और आत्मिक संतोष मिलता है।
- दान और पुण्य कर्म से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
पितृ मोक्ष अमावस्या केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह हमारे पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का अवसर है। इस दिन किए गए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध से पितृ प्रसन्न होकर वंशजों को सुख, शांति और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसलिए इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक अनुष्ठान करना हर किसी के लिए शुभ और कल्याणकारी है।
पितरों की कृपा पाने के आसान उपाय-
- दीपदान करें:
शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर घी का दीपक जलाएँ और पितरों का स्मरण करें। यह पितृ तृप्ति का सबसे सरल उपाय है। - तिल और जल अर्पण:
सुबह-सुबह ताजे जल में काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की ओर खड़े होकर तीन बार अर्पण करें और मन में पूर्वजों का नाम लें। - अनाज और भोजन दान:
घर पर बने सत्त्विक भोजन (खिचड़ी, पूरी-सब्ज़ी, मिठाई आदि) में से एक हिस्सा गाय, कुत्ते, कौवे और गरीबों को अवश्य दें। - पौधे लगाएँ:
पितृ अमावस्या के दिन पीपल, तुलसी, या आँवले का पौधा लगाना शुभ माना जाता है। यह पितरों को प्रसन्न करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है। - दान-दक्षिणा:
वस्त्र, अन्न, तिल, धान्य या अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद को दान करें। माना जाता है कि यह दान सीधे पितरों तक पहुँचता है। - पितृ स्मरण प्रार्थना:
घर के शांत कोने में बैठकर पूर्वजों के नाम लें और उनके प्रति आभार व्यक्त करें। यदि संभव हो तो “ॐ पितृदेवाय नमः” का 108 बार जाप करें। इन छोटे-छोटे उपायों से पितरों की आत्मा को संतोष और शांति मिलती है।
परिवार में पितृ दोष से संबंधित बाधाएँ दूर होती हैं।घर में सुख-शांति, धन-धान्य और सौभाग्य बना रहता है।