मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण मुद्दा गहराया: हाई कोर्ट में सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
संवाददाता
17 September 2025
अपडेटेड: 10:19 AM 0thGMT+0530
17 सितंबर 2025: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण का विवाद फिर गहरा गया है।
कल मंगलवार 16 सितंबर को जबलपुर हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई हुई। जिसमें जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने पूछा है की पुरानी प्रमोशन पॉलिसी जब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तो नई पॉलिसी क्यों लागू की जा रही है।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने राज्य सरकार से कहा है कि इस मुद्दे पर मौखिक दलीलों से काम नहीं हो सकता । इसमें सरकार को लिखित रूप से स्पष्ट जवाब देना चाहिए। इसकी अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
प्रमोशन में आरक्षण का क्या है विवाद: याचिका कर्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2016 के आदेश की व्याख्या पर सरकार और अनारक्षित वर्ग के बीच मतभेद है। 2016 से पहले आरक्षण में प्रमोशन को सरकार वैध मान रही है ,क्योंकि वे मध्य प्रदेश लोक सेवा नियम 2002 के तहत हुए थे। यह नियम आरक्षण प्रदान करते थे ,जिसमें SC के लिए 16% और ST के लिए 20% आरक्षण दिया गया था। किंतु हाई कोर्ट ने अप्रैल 2016 में इसे रद्द कर दिया।
अब सुप्रीम कोर्ट ने यथा स्थिति बनाए रखने के लिए कहा है ।जिससे पुराने प्रमोशन तो बरकरार रहे, किन्तु नए प्रमोशन रुक गए।
याचिका कर्ता ने यह भी बताया कि सरकार पुरानी प्रमोशन पॉलिसी जो अदालत में विचाराधीन है, उसके रहते नई पॉलिसी लेकर आई । और इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने नई पॉलिसी के तहत प्रमोशन न करने की अंडरटेकिंग दी है। इसके चलते नई पॉलिसी लागू नहीं की जा सकती।
सरकार की ओर से दी गई दलील:
सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने दलील पेश की, जिसमें 2002 के नियम कभी स्थगित नहीं हुए थे । नए नियम अभी लागू नहीं हुए हैं । किंतु याचिकाकर्ता के अनुसार इसी आधार पर 2022 में विवादित प्रावधान दोबारा लागू कर दिए गए।
सरकार ने कोर्ट से नई पॉलिसी के तहत प्रमोशन शुरू करने की अनुमति मांगी किंतु हाई कोर्ट ने अभी फिलहाल राहत देने से मना कर दिया है।
इस केस की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।