कैसे करें सूर्य ग्रहण पर पितरों का तर्पण: साल का अंतिम सूर्य ग्रहण, साथ ही पितृ मोक्ष अमावस्या

khabar pradhan

संवाददाता

18 September 2025

अपडेटेड: 9:07 AM 0thGMT+0530

कैसे करें सूर्य ग्रहण पर पितरों का तर्पण: साल का अंतिम सूर्य ग्रहण, साथ ही पितृ मोक्ष अमावस्या

18 सितंबर 2025: 21 सितंबर 2025: सूर्य ग्रहण और सर्व पितृ अमावस्या
21 सितंबर साल का अंतिम सूर्य ग्रहण है ।इस दिन सर्वपितृ अमावस्या भी है।
ऐसे में सभी के मन में यह सवाल उठना जायज है कि क्या इस दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।

आईए जानें सूर्य ग्रहण का समय:

भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण रात में 10:49 पर प्रारंभ होगा।
ग्रहण का मध्यकाल होगा 1:49 पर और
ग्रहण की समाप्ति रात में 3:23 पर होगी

सर्व पितृ अमावस्या पितृपक्ष का अंतिम दिन होता है, जब अपने पितरों को तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार के कल्याण के लिए श्रद्धा से किए गए कर्म अत्यंत फलदायी होते हैं। वर्ष 2025 में यह तिथि और भी विशेष है क्योंकि इसी दिन सूर्य ग्रहण भी लगेगा।

सूर्य ग्रहण और सूतक का प्रभाव:

21 सितंबर 2025 को सूर्य ग्रहण होने जा रहा है, जो भारतीय समयानुसार रात 10:59 बजे शुरू होगा। इसका चरम समय 22 सितंबर की आधी रात के बाद लगभग 1:11 बजे आएगा और यह ग्रहण रात 3:23 बजे समाप्त होगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका प्रत्यक्ष दर्शन संभव नहीं है। फिर भी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय विशेष महत्व रखता है और लोग इसे ध्यान, प्रार्थना तथा आत्मचिंतन के लिए शुभ मानते हैं।

चूँकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक का प्रभाव यहाँ लागू नहीं होगा। इसका अर्थ है कि पूजा-पाठ और तर्पण जैसे कार्य सामान्य रूप से किए जा सकते हैं, परंतु इन्हें शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए।

क्या करें:

इस दिन प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और पवित्र स्थान पर पितरों का स्मरण करें। पूर्वजों के नाम से तर्पण और पिंडदान करें। शास्त्रों के अनुसार सुबह 11:50 बजे से दोपहर 1:27 बजे तक का समय श्राद्ध और तर्पण के लिए सबसे उत्तम रहेगा। इस दिन अनाज, गुड़, चावल, वस्त्र आदि का दान अवश्य करें। दीपक जलाकर और धूप दिखाकर वातावरण को पवित्र बनाएँ तथा श्रद्धा और भक्ति भाव से पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें।

क्या न करें:

ग्रहण की अवधि के दौरान किसी प्रकार का धार्मिक अनुष्ठान, जप, हवन या श्राद्ध नहीं करना चाहिए। रात्रि में तर्पण भी नहीं किया जाता। इस दिन क्रोध, विवाद, अपवित्रता और अशुभ कर्मों से बचना चाहिए। नाखून काटना, बाल कटवाना इत्यादि कार्य करना भी वर्जित माना गया है।

सूर्य ग्रहण और सर्व पितृ अमावस्या का यह संयोग दुर्लभ है। इस अवसर पर श्रद्धा और भक्ति भाव से पितरों का स्मरण, तर्पण और दान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और वंशजों के जीवन में शांति, समृद्धि और सुख का वास होता है।

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