अंबाजी शक्तिपीठ- जहां गिरा था मां का हृदय: 51 शक्तिपीठों में से एक अंबाजी मंदिर

khabar pradhan

संवाददाता

25 September 2025

अपडेटेड: 11:22 AM 0thGMT+0530

अंबाजी शक्तिपीठ- जहां गिरा था मां का हृदय: 51 शक्तिपीठों में से एक अंबाजी मंदिर

25 सितंबर 2025:अंबाजी शक्तिपीठ, बनासकांठा, गुजरात…जहां गर्भ गृह में स्थापित है श्री यंत्र

भारत की पावन धरती पर देवी माँ के 51 प्रमुख शक्तिपीठों का विशेष महत्व है। इन शक्तिपीठों में से एक है अंबाजी शक्तिपीठ, जो गुजरात राज्य के बनासकांठा ज़िले में स्थित है। यह मंदिर माँ अम्बा को समर्पित है और इसे आराधना का प्राचीनतम केंद्र माना जाता है। लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष यहाँ माँ के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं। माँ अम्बाजी का यह धाम न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अंबाजी शक्तिपीठ का पौराणिक महत्व:

शक्तिपीठों की उत्पत्ति का सम्बन्ध माँ सती और भगवान शिव की कथा से है। पुराणों के अनुसार, जब माता सती ने अपने पिता दक्ष द्वारा भगवान शिव का अपमान सहन न कर पाने के कारण योगाग्नि में आत्मदाह कर लिया, तब भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए। वे माता सती के जले हुए शरीर को लेकर तांडव करने लगे। ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माँ सती के शरीर को कई भागों में विभाजित कर दिया। जहाँ-जहाँ माँ सती के अंग गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई।

अंबाजी शक्तिपीठ को इसलिए विशेष स्थान प्राप्त है क्योंकि यहाँ माँ सती का हृदय गिरा था। इसीलिए यहाँ माता को अम्बिका या अंबाजी के रूप में पूजा जाता है।

अंबाजी मंदिर का इतिहास और स्थापत्य:

अंबाजी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। माना जाता है कि यह मंदिर द्वापर युग से पूजनीय रहा है। महाभारत काल में पांडवों ने भी अज्ञातवास के दौरान यहाँ माँ की आराधना की थी।

मंदिर की स्थापत्य कला अद्भुत और मनमोहक है। मंदिर बिना लोहे की कीलों के निर्मित है। यहाँ माँ की कोई प्रतिमा नहीं है, बल्कि श्री यंत्र की पूजा की जाती है। यह यंत्र माँ की अदृश्य शक्ति और स्वरूप का प्रतीक है। यह विशेषता अंबाजी मंदिर को अन्य शक्तिपीठों से अलग बनाती है।

धार्मिक महत्व:

अंबाजी मंदिर में श्री यंत्र को अत्यंत रहस्यमय और चमत्कारी माना जाता है। भक्त मानते हैं कि इस यंत्र की पूजा से सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
यहाँ विशेष रूप से भाद्रपद माह की पूर्णिमा पर विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। यह मेला धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक समृद्धि का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

पूजा-पद्धति और विशेष अनुष्ठान:

अंबाजी शक्तिपीठ में दैनिक आरती और विशेष पूजन विधियों का महत्व है।

सुबह और शाम की आरती – भक्तगण भजन-कीर्तन के साथ इसमें शामिल होते हैं।

नवमी और पूर्णिमा – इन दिनों विशेष पूजन और हवन का आयोजन होता है।

नवरात्रि उत्सव – नवरात्रि में मंदिर का वातावरण अत्यंत भव्य और दिव्य हो जाता है। नौ दिनों तक माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है और गरबा-डांडिया जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

अंबाजी मंदिर से जुड़ी कथाएँ:

माँ अंबा और अर्जुन – कहा जाता है कि पांडवों में अर्जुन ने युद्ध कौशल प्राप्त करने के लिए यहाँ माँ अंबा की आराधना की थी। माँ ने प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य शक्तियाँ प्रदान कीं।

श्रीकृष्ण और बलराम – श्रीकृष्ण ने भी बचपन में अपने भाई बलराम के साथ यहाँ माँ के दर्शन किए थे।

पर्यटन और आकर्षण:

अंबाजी केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र भी है। यहाँ आने वाले यात्री आसपास की प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक स्थलों का भी आनंद ले सकते हैं।

गब्बर पर्वत – मंदिर से लगभग 4 किमी की दूरी पर स्थित है। इसे अंबाजी मंदिर का मूल स्थान माना जाता है। यहाँ तक पहुँचने के लिए रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है।

कांकेश्वर महादेव मंदिर – अंबाजी के पास भगवान शिव का यह प्राचीन मंदिर भी दर्शनीय है।

पोसिना और केसारिया जी मंदिर – जैन धर्मावलंबियों के लिए पवित्र स्थल हैं।

पहुँचने का मार्ग:

अंबाजी मंदिर गुजरात के बनासकांठा ज़िले में, अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित है।

सड़क मार्ग से – अहमदाबाद से लगभग 185 किमी और पालणपुर से 65 किमी दूर है।

रेल मार्ग से – निकटतम रेलवे स्टेशन पालणपुर है।

वायु मार्ग से – निकटतम हवाई अड्डा अहमदाबाद है।

अंबाजी धाम हमें माँ शक्ति की महिमा का बोध कराता है। यह मंदिर आस्था, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु न केवल माँ की कृपा पाते हैं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा, शांति और संतुलन का अनुभव भी करते हैं।

अंबाजी शक्तिपीठ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यहाँ माँ अम्बा की भक्ति से मनुष्य के जीवन में नई दिशा और सकारात्मकता आती है।
गुजरात के इस शक्तिपीठ का महत्व केवल भारतीय उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में फैला हुआ है। हर भक्त के लिए यह आस्था और विश्वास का धाम है।

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