हिंगलाज माता मंदिर: बलूचिस्तान स्थित सबसे पुराना हिंगलाज माता मंदिर, 51 शक्तिपीठों में से एक
संवाददाता
26 September 2025
अपडेटेड: 9:56 AM 0thGMT+0530
26 सितंबर 2025 : 51 शक्तिपीठों में से एक: जहां गिरा था माता के मस्तक का ऊपरी भाग, हिंगलाज माता शक्तिपीठ : कथा, इतिहास और वर्तमान स्वरूप
भारत उपमहाद्वीप के शक्तिपीठों में हिंगलाज माता शक्तिपीठ का विशेष स्थान है। यह शक्तिपीठ आज पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत के लासबेला ज़िले में, हिंगोल नेशनल पार्क के भीतर स्थित है। प्राकृतिक चट्टानों, मकरान पर्वत श्रृंखला और हिंगोल नदी के किनारे बसी यह गुफा-आधारित शक्ति साधना की भूमि न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शक्तिपीठ की उत्पत्ति कथा:
शक्ति परंपरा के अनुसार, जब दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान किया, तो उनकी पत्नी सती ने यज्ञ अग्नि में आत्माहुति दे दी। शोकाकुल शिव सती का दाह-संस्कार न कर सके और उनके शरीर को उठाकर ब्रह्मांड में विचरण करने लगे। ब्रह्मांड का संतुलन बिगड़ता देख भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को अनेक टुकड़ों में विभक्त कर दिया। जहाँ-जहाँ ये अंग गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई।
परंपरा के अनुसार, हिंगलाज शक्तिपीठ में माता का ब्रह्मरंध्र (माथे का ऊपरी भाग) गिरा था। इसी कारण इसे अत्यंत पावन और शक्तिमय स्थल माना जाता है।
हिंगलाज माता की एक अन्य कथा:
स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, इस क्षेत्र में हिंगल नामक राक्षस का आतंक था। देवी ने उसका वध कर लोगों को भय से मुक्त किया और यहीं गुफा में निवास किया। तभी से यह स्थान हिंगलाज माता के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
मंदिर का स्वरूप:
हिंगलाज माता का मंदिर किसी भव्य स्थापत्य के रूप में नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक गुफा है। यहाँ देवी का स्वरूप शिलाखंड (प्राकृतिक पत्थर) के रूप में विद्यमान है।
गर्भगृह में कोई प्रतिमा नहीं, बल्कि प्राकृतिक चिह्न ही माता का प्रतीक है।
प्रत्येक शक्तिपीठ की तरह यहाँ भी भैरव देव की उपस्थिति मानी जाती है।
मंदिर तक पहुँचने के लिए कठिन पर्वतीय मार्ग और संकरे घाटों से होकर गुजरना पड़ता है, जो यात्रा को आध्यात्मिक तपस्या जैसा अनुभव बना देता है।
हिंगलाज यात्रा:
हर वर्ष यहाँ विशाल हिंगलाज यात्रा आयोजित होती है। यह पाकिस्तान के हिन्दुओं का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव माना जाता है।
यात्रा तीन से चार दिनों तक चलती है।
श्रद्धालु सबसे पहले पास के पवित्र स्थल ‘चंद्रगुप’ (मिट्टी का ज्वालामुखी) पर चढ़कर आहुति अर्पित करते हैं।
इसके बाद वे हिंगलाज गुफा में पहुँचकर माता के दर्शन करते हैं।
यात्रा में पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से हजारों हिन्दू सम्मिलित होते हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों के कारण यह संख्या काफी कम हो गई है l
इस अवसर पर स्थानीय लोग सहयोग करते है और तीर्थयात्रियों की सेवा में भोजन, पानी व चिकित्सा की व्यवस्था की जाती है।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व:
हिंगलाज न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से भी अद्वितीय है।
यह स्थल हिंगोल नेशनल पार्क के भीतर है, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है।
यहाँ की भू-आकृतियाँ, ज्वालामुखीय मिट्टी के पहाड़ और अद्भुत प्राकृतिक दृश्य इसे अनोखा बनाते हैं।
कई अध्ययनों में इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता देने की संभावनाएँ जताई गई हैं।
वर्तमान स्वरूप:
आज हिंगलाज माता शक्तिपीठ पाकिस्तान के हिन्दुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा केन्द्र है।
स्थानीय प्रशासन यहाँ सुरक्षा और यात्री-सुविधाएँ उपलब्ध कराता है।
बलोचिस्तान सरकार इस स्थल को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयासरत है।
भारत से सीधे यात्रा करना कठिन है, परंतु कई श्रद्धालु नेपाल और अन्य देशों से वीज़ा की औपचारिकताओं के बाद इस पवित्र स्थान तक पहुँचते हैं।
यहाँ का वातावरण साम्प्रदायिक सौहार्द का उदाहरण प्रस्तुत करता है क्योंकि यात्रा के समय स्थानीय लोग भी श्रद्धालुओं की सहायता करते हैं।
आध्यात्मिक महत्व:
हिंगलाज माता को सर्वशक्ति स्वरूपा माना जाता है।
माना जाता है कि माता यहाँ साधक को अभय, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
कई भक्त इस स्थान को जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति और आत्मिक उन्नति का केन्द्र मानते हैं।
बलोच क्षेत्र के हिन्दुओं के लिए यह केवल एक मंदिर नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान और आस्था का स्तम्भ है।
हिंगलाज माता शक्तिपीठ आस्था, साहस और सह-अस्तित्व का प्रतीक है। कठिन मार्ग और दूरस्थ स्थान में स्थित होने के बावजूद यह स्थल आज भी लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। पौराणिक कथा, प्राकृतिक सौन्दर्य और वर्तमान सामाजिक सहयोग इसे और भी अनोखा बनाते हैं।
हिंगलाज माता न केवल पाकिस्तान के हिन्दुओं की जीवन-रेखा है, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक धरोहर भी है। यहाँ की यात्रा आत्मा को शक्ति और जीवन को नवीन ऊर्जा प्रदान करती है।