कब करें Karwa Chauth का व्रत और पूजन: 9 या 10 अक्टूबर-जानें पूजा का सही मुहूर्त
संवाददाता
9 October 2025
अपडेटेड: 7:45 AM 0thGMT+0530
9 अक्टूबर 2025 : हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला उपवास रखती है।
इस बार करवा चौथ के दिन कई शुभ संयोग बनने जा रहे हैं ।
इस दिन सिद्धि योग के साथ-साथ कृतिका नक्षत्र रहेगा ।
गुरु मिथुन राशि में रहेंगे।
करवा चौथ का चांद इस बार कृतिका नक्षत्र में निकलेगा ।
करवा चौथ के दिन शुक्रवार और चतुर्थी तिथि होने के कारण भगवान गणेश की भी विशेष कृपा प्राप्त होगी।
आईए जानते हैं चंद्रमा के निकलने का समय और पूजन का मुहूर्त :
करवा चौथ के दिन चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर गुरुवार रात 10:55 से शुरू हो रही है । जिसका समापन 10 अक्टूबर को शुक्रवार को शाम 7:38 पर हो रहा है। इसलिए इस बार करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर शुक्रवार को रखा जाएगा । जिसमें सुबह से लेकर रात तक व्रत रखा जाएगा।
उदया तिथि के हिसाब से 10 अक्टूबर शुक्रवार को सूर्योदय सुबह 6:25 पर और सूर्यास्त होगा शाम 6:02 पर।
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त है –4:49 से 5:37 तक । इस समय सरगी ग्रहण कर सकते हैं।
अमृत काल रहेगा – दोपहर 3:21 से 4:45 तक।
इसलिए इस बार दोपहर के समय करवा चौथ की कथा कही जाएगी। दोपहर के समय 3:21 से 4:45 तक अमृत काल रहेगा । इस समय करवा चौथ की कथा करने का शुभ मुहूर्त रहेगा।
करवा चौथ के दिन कृतिका नक्षत्र शाम 5:31 तक रहेगा। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा । और इस दिन सिद्धि योग भी बन रहा है जो शाम 5:41 तक रहेगा।
इस दिन राहुकाल सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 तक रहेगा।
जिनके यहां करवा चौथ की कथा शाम के समय की जाती है और पूजन शाम के समय होता है । उन्हें 10 अक्टूबर शुक्रवार शाम 5:57 से 7:38 के बीच पूजन करना होगा।
चंद्रमा की पूजा चंद्र उदय के साथ होगी। इस समय तक आपके घर में चौकी पर करवा चौथ की जो सामग्री है ,उसे बदल लें और सारी पूजा संपन्न कर ले।
10 अक्टूबर को शुक्रवार को चंद्रोदय का समय है- 8:33 ।
इस समय के बाद कभी भी चंद्र देवता को अर्ध्य देकर उपवास या व्रत खोल सकते हैं।
करवा चौथ का व्रत चंद्रमा की पूजा को अर्घ्य देने के बाद पूर्ण होता है।
यदि चंद्रमा ना दिखाई दे तो क्या करें:
यदि इस समय बारिश हो या आसमान में बादल दिखाई दे रहे हैं और चंद्रमा ना दिख रहा है तो चंद्र यंत्र का पूजन कर व्रत खोल सकते हैं।
इसके अलावा भगवान शिव के मस्तक पर भी चंद्र देव विराजमान है। उन्हें अर्ध्य देकर भी व्रत खोला जा सकता है।