जबलपुर में अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन: राम कृष्ण से है भारत की पहचान
संवाददाता
3 January 2026
अपडेटेड: 4:30 PM 0thGMT+0530
अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन:
जगतगुरु रामभद्राचार्य ने रामायण को राष्ट्र ग्रंथ घोषित करने की, की अपील:
मुख्यमंत्री ने कहा भगवान राम और कृष्ण से है भारत की पहचान:
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव कल शुक्रवार को जबलपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे।
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण के जीवन से हमें अनेक जटिल प्रश्नों के उत्तर आसानी से मिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम और कृष्ण के माध्यम से ही विश्व में भारत का नाम है। जहां अंधेरा है वहां प्रकाश फैलाना है । और यही सनातन संस्कृति है। इसी भाव को लेकर भगवान श्री राम ने अन्याय और अत्याचार की समाप्ति के लिए अनेक कार्य किया । इन्हीं ऐतिहासिक आधार के कारण ही भारत विश्व गुरू है।
500 वर्षों संघर्षो के बाद प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर हुआ तैयार: मुख्यमंत्री मोहन यादव:
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामायण काल में महर्षि विश्वामित्र श्री राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले गए थे और संतों द्वारा किए गए यज्ञ में बाधा डालने वाले असुरों का अंत कराया। भगवान श्री राम ने बुद्धि पराक्रम के बल पर राजा जनक के दरबार में स्वयंवर जीता । श्री राम ने निषाद राज और शबरी माता के प्रसंग से मित्रता और प्रेम का संदेश दिया। राम राज्य का स्मरण करने से ही जीवन में कठिन से कठिन दुख दूर हो जाते हैं
। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में भगवान श्री राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ ।
जबलपुर है जाबालि ऋषि की भूमि:
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जबलपुर ऐसी जगह है जो जा बालि ऋषि की भूमि है यहां अंतरराष्ट्रीय कोई भी आयोजन होना महत्वपूर्ण है यह नर्मदा मैया और प्रकृति की लीला भी यहां देखने को मिलती है यहां के काले पत्थर भी उज्जवल और धवल स्वरूप में संगमरमर के रूप में दिखाई देते हैं ।
उन्होंने वहां उपस्थित जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य का आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने रामायण को राष्ट्र ग्रंथ घोषित करने हेतु की अपील:
इस अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन में जगतगुरु रामभद्राचार्य शामिल हुए।
उन्होंने बताया कि राम शब्द में रा का अर्थ है -राष्ट्र और म का अर्थ है- मंगल अर्थात जिसके द्वारा राष्ट्र का मंगल होता है उसका नाम है– राम!
स्वामी रामभद्राचार्य जी ने सुझाव दिया कि वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस की सफलता यह है की रामायण को राष्ट्र ग्रंथ घोषित कर दिया जाए । उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ यादव से कहा कि उन्होंने अपने पुत्र का विवाह सामूहिक विवाह सम्मेलन में किया और उनके बेटा और बहू नर्मदा यात्रा पर निकले हैं । वे सभी बधाई के पात्र हैं।
उन्होंने पहलगाम की घटना को भी याद करते हुए कहा कि दुष्टों को दंड देने के लिए उपयोगी सुझाव पर अमल किया गया और दुष्टों को दंड दिया गया । ऐसे दुष्ट जिन्होंने हमें क्षति पहुंचाई।
उन्होंने कहा कि रामायण में लिखा है कि भय बिन प्रीत न होय-
इसलिए अब हमारा नारा ओम शांति नहीं ,ओम क्रांति क्रांति होना चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी को भी याद करते हुए कहा कि उनका प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीताराम – भी रामचरितमानस से ही लिया गया है।