शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: मैकाले की चंगुल से बाहर होगी शिक्षानीति:
संवाददाता
5 January 2026
अपडेटेड: 4:24 PM 0thGMT+0530
भारत की शिक्षा व्यवस्था पर आए दिन सवाल उठते हैं । कहा जाता है एक ये सिस्टम प्रैक्टिकल नहीं है। इससे रोजगार नहीं मिलता। कुछ लोगों ने इस पद्धति को पूरी तरह खोखला बताया जाता है । लेकिन इन बहसों के बीच एक सच है जो अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
भारत के वास्तविक शिक्षा परंपरा:
सवाल ये है कि क्या ये वाकई भारत की शिक्षा परंपरा है। तो इसका जवाब है नहीं क्योंकि सच्चाई ये है कि भारत का मूल शिक्षा तंत्र कभी भी सिर्फ डिग्री या नौकरी तक सीमित नहीं रहा। भारतीय शिक्षा व्यवस्था हमेशा से नैतिकता, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों पर आधारित रही है । मैकाले की शिक्षा पद्धति को लेकर सियासत में शिक्षा में अक्सर विचारधारा की बहस में सुनाई देती है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की नई पीढ़ी को मैकाले की मानसिकता से बाहर निकालना चाहते हैं, और इसका सबसे बड़ा माध्यम बनेगी राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP !
क्यों लागू है मैकाले की शिक्षा नीति:
लेकिन सवाल ये है कि आखिर ये मैकाले की मानसिकता क्या है? मैकाले कौन था? और NEP इसे खत्म कैसे करेगी? तो चलिए सबसे पहले समझते हैं मैकाले कौन था। मैकाले, जिसे लॉर्ड मैकाले भी कहा जाता है, उसका पूरा नाम था थॉमस बैबिंगटन मैकाले। वो ब्रिटिश शासन के दौरान एक नेता, लेखक और पॉलिसी मेकर यानी नीति निर्माता था ।
1834 में मैकाले को भारत में गवर्नर जनरल की काउंसिल में कानूनी सदस्य बनाया गया । शिक्षा के मामलों में ब्रिटिश सरकार के अंदर उसकी राय को सबसे अहम माना जाता था और यहीं से भारत की शिक्षा व्यवस्था की दिशा हमेशा के लिए बदल गई। साल 1835 में मैकाले ने एक दस्तावेज लिखा, जिसे इतिहास में जाना जाता है ।
मैकाले का स्मरण-पत्र या अंग्रेज़ी में Macaulay’s Minute on Education…इस दस्तावेज का मकसद साफ था कि ऐसे भारतीय तैयार करना जो रंग से भारतीय हों, लेकिन सोच, भाषा और मूल्यों में अंग्रेज हों। इस स्मरण-पत्र को तत्कालीन गवर्नर जनरल विलियम बैंटिक ने स्वीकार कर लिया और इसी फैसले ने भारत की शिक्षा नीति को जड़ से बदल दिया। मैकाले के फैसले का सबसे बड़ा असर पड़ा भारत की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था पर। गुरुकुल प्रणाली को धीरे-धीरे खत्म किया गया, संस्कृत और अरबी जैसी भाषाओं को शिक्षा के केंद्र से हटाया गया,संस्कृत में चलने वाले गुरुकुलों को मान्यता देने से इनकार कर दिया गया और इनकी जगह कॉन्वेंट स्कूल,अंग्रेज़ी मीडियम सिलेबस, और पश्चिमी पाठ्यक्रम को बढ़ावा दिया गया। मैकाले का मानना था कि संस्कृत और अरबी बेकार हैं और अंग्रेज़ी ही “उपयोगी और व्यावहारिक” भाषा है…ऐसे में अब आते हैं सबसे अहम सवाल पर मैकाले की मानसिकता आखिर है क्या.. मैकाले ने एक सिद्धांत दिया था, जिसे कहा जाता है Downward Filtration Theory यानी अधोगामी निस्पंदन सिद्धांत इसका मतलब था भारत के केवल उच्च और मध्यम वर्ग के एक छोटे हिस्से को अंग्रेज़ी शिक्षा दी जाए,जिससे वही वर्ग आगे चलकर प्रशासन संभाले, समाज को दिशा दे, और ब्रिटिश शासन का समर्थन करे। यही सोच आगे चलकर मैकाले की मानसिकता कहलाई और मैकाले की मानसिकता का सीधा अर्थ है –अपनी भाषा को हीन समझना,अपनी संस्कृति और ज्ञान परंपरा को कमतर मानना, अंग्रेज़ी को इंटेलिजेंस और स्टेटस का पैमाना समझना,भारतीय इतिहास को पिछड़ा या गैर-जरूरी मानना और ब्रिटिश शासन द्वारा थोपी गई ये मानसिकता आज भी भारतीय समाज, शिक्षा और प्रशासन में दिखाई देती है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी मानसिकता से देश को बाहर निकालने की बात करते रहे हैं।
पीएम मोदी का मानना है कि गुलामी सिर्फ राजनीतिक नहीं होती, मानसिक गुलामी उससे भी खतरनाक होती है । 17 नवंबर को नई दिल्ली में पीएम मोदी ने कहा था कि मैकाले द्वारा भारत की सांस्कृतिक और शैक्षिक नींव के खिलाफ किए गए अपराध को 2035 में 200 साल पूरे हो जाएंगे। अगले दशक में हमें मैकाले की गुलामी वाली मानसिकता से खुद को मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिए। यही वजह है कि पीएम मोदी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मैकाले की मानसिकता से बाहर निकलने का सबसे बड़ा जरिया बताते हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि NEP अब अपने छठे साल में है और आने वाले समय में यह शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगी। मातृभाषा में शिक्षा योग्यता आधारित पढ़ाई,स्किल बेस्ड एजुकेशन और रोजगार देने वाला युवा तैयार करना NEP का मुख्य लक्ष्य है । युवा सिर्फ नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने और यही असली आज़ादी है। तो कुल मिलाकर, मैकाले की मानसिकता सिर्फ इतिहास का विषय नहीं, बल्कि आज के भारत की सबसे बड़ी वैचारिक चुनौती है। और NEP 2020 को सरकार भाषा, संस्कृति और आत्मविश्वास की वापसी का माध्यम मान रही है।