जाने क्या आश्रम -3 पार्ट टू, जिसने दिला दी पम्मी ने हिला दी गद्दी

khabar pradhan

संवाददाता

1 March 2025

अपडेटेड: 8:26 AM 0stGMT+0530

भक्ति और अंधविश्वास के बीच का अंतर समझाने एक बार ओटीटी पर उतरी आश्रम

भक्ति और अंधविश्वास के बीच का अंतर समझाने एक बार ओटीटी पर उतरी आश्रम

ओटीटी की दुनिया में बॉबी देओल स्टारर आश्रम सीरीज का जिक्र जरूर होता है। भक्ति और अंधविश्वास के बीच का अंतर समझाने का काम ये वेब सीरीज करती है। दर्शकों ने इसके तीनों सीजन को पसंद किया है और अब इसके तीसरे सीजन का पार्ट 2 भी रिलीज हो चुका है।

नई दिल्ली। अंधभक्ति के जाल में लोगों को फंसाकर पाखंडी बाबा निराला (बॉबी देओल) आलीशान जीवन जीने का आदी हो जाता है। जब पम्मी पहलवान (आदिति पोहनकर) बाबा के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाकर कानूनी जंग लड़ने की कोशिश करती है, तो बाबा की ताकत के सामने वह खुद ही जेल पहुंच जाती है।

क्या है पार्ट टू की खास बात:
आश्रम सीजन 3 के पार्ट 2 में कहानी को अंत तक पहुंचाया गया है। इसमें पम्मी का बदला लेने का तरीका जरूर बदल जाता है, लेकिन मकसद नहीं। इस बार वह बाबा पर सीधा वार नहीं करती है, बल्कि उसकी मजबूत कड़ी को ही दुश्मन बनाकर उसके सामने खड़ा कर देती है। आइए देखते हैं कि वेब सीरीज के नए सीजन के लिए 2 साल का इंतजार करना सही साबित हुआ या नहीं।

आश्रम 3 के पार्ट 2 की कहानी:
एक बदनाम आश्रम सीजन 3 पार्ट 2 की कहानी पहले पार्ट से आगे बढ़ती है। पम्मी अत्याचार के खिलाफ जंग लड़ने के लिए कोर्ट पहुंच चुकी है, लेकिन बाबा निराला खुद को कोर्ट में नपुंसक घोषित करके बरी हो जाता है। वहीं, पम्मी को झूठे आरोपों के लिए गिरफ्तार कर लिया जाता है। पम्मी समझ चुकी होती है कि जेल से बाहर निकलने का एक ही तरीका है और जब बाबा निराला मिलने आते हैं, तो उन्हें अपने जाल में फंसाने में कामयाब हो जाती है। बाबा निराला एक बार फिर पम्मी को आश्रम ले आता है, लेकिन भोपा स्वामी ने सख्त निर्देश दिए कि वो बिल्कुल भी बाबा के आसपास नजर नहीं आएगी। भोपा ने तो बाबा को चेतावनी भी दी कि ये लड़की भस्मासुर है, जो अपनी आग में पूरे आश्रम को भस्म कर देगी।
पम्मी ने पाखंडी बाबा को हराने के लिए उसके करीबी दोस्त भोपा स्वामी को अपने जाल में फंसा लिया। दोनों के बीच की नजदीकियां लगातार बढ़ती गई। कहानी में बड़ा द्विस्ट आया, जब बाबा निराला ने खुद दोनों को गलत अवस्था में रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद भोपा के शुद्धिकरण का आदेश दे दिया जाता है। शायद बाबा निराला की यही सबसे बड़ी गलती साबित हुई, जिससे उनका अंत करीब आ गया।

सीरीज में सबसे बड़ा मोड़ एपिसोड 4 में आता है, जब भगवान निराला उर्फ मोंटी के बाबा बनने की असलियत का पता चलता है। सब-इंस्पेक्टर उजागर सिंह (दर्शन कुमार) की मुलाकात मनसुख बाबा के प्रधान सेवक से होती है। इसके बाद पूरा इतिहास खुल जाता है कि कैसे उन्होंने भोपा के साथ मिलाकर मनसुख की गद्दी पर अपना कब्जा किया था। आश्रम सीजन 3 के पार्ट 2 की कहानी आखिर तक और रोचक होती जाती है, जब पम्मी और भोपा मिलकर बाबा से बदला लेने की राह पर निकल पड़ते हैं और 3 आपको देखने को मिलेगा कि कैसे बाबा का क अहंकार ने करवा दिया। खैर, आप सीरीज को देखेंगे तो आपको कहानी की रोचकता ज्यादा बेहतर ढंग से समझ आएगी।

एक्टिंग और निर्देशन:
डायरेक्टर प्रकाश झा ने एक बार फिर बेहतरीन काम किया है। इस बार सीरीज को 5 एपिसोड में रिलीज किया गया है, जो ड्रामा, सस्पेंस और द्विस्ट से भरपूर है। खैर, पहले या दूसरे एपिसोड में भोपा और पम्मी के कुछ सीन्स को बेवजह खींचा भी गया है। अगर इसे सीधा मुख्य द्विस्ट तक पहुंचाया जाता, तो शायद कहानी और ज्यादा प्रभावशाली हो जाती। हालांकि, अभी भी सीरीज में निर्देशक के काम को शानदार कहा जा सकता है।

बॉबी देओल ने बाबा निराला के किरदार में शानदार काम किया है। उन्होंने अपने किरदार की तमाम जरूरतों को पूरा किया है। आदिती पोहनकर ने पम्मी के किरदार में इस बार धमाल मचा दिया है। आश्रम का यह पार्ट पूरी तरह से उनके बदले की आग पर आधारित है। चंदन रॉय सान्याल उर्फ भोपा स्वामी का किरदार भी इस बार और ज्यादा निखरकर आया है। इसके अलावा, दर्शन कुमार ने सब-इंस्पेक्टर उजागर सिंह की भूमिका को बेहतरीन ढंग से अदा किया है। आश्रम के बाबा को सजा दिलवाने की प्रक्रिया में उनका बड़ा योगदान रहा है। वहीं, त्रिधा चौधरी (बबिता), परीनीता सेठ (साध्वी माता) जैसे कई अन्य कलाकारों का काम भी तारीफ के काबिल लगा है।

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