कोहरे के कारण गड्ढे में गिरी कार-
समय पर नहीं हुआ रेस्क्यू- मौत
संवाददाता
19 January 2026
अपडेटेड: 7:22 PM 0thGMT+0530
27 वर्षीय इंजीनियर की हुई मौत:
फोन कर कहा, पापा बचा लो: समय पर नहीं हो पाया रेस्क्यू:
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर- 150 में घने कोहरे और कम विजिबिलिटी के बीच एक 27 वर्षीय इंजीनियर की मौत हो गई।
यह हादसा शनिवार की आधी रात के बाद हुआ, जब वह काम के बाद घर लौट रहे थे।
रात 12:30 बजे उनकी कार एक मोड़ पर नियंत्रण खो बैठी और सड़क किनारे बने नाले की बाउंड्री वॉल को तोड़ते हुए पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी।
बताया जा रहा है कि यह गड्ढा एक अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग के बेसमेंट के लिए तैयार किया गया था, जिसमें काफी पानी भरा हुआ था।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता कार के अंदर ही फंस गए और उन्होंने अपने पिता राजकुमार मेहता को फोन कर मदद मांगी।
उन्होंने पिता से कहा, पापा बचा लो, मैं डूब रहा हूं, मरना नहीं चाहता।
उनकी चीख सुनकर कई राहगीर इकट्ठा हुए, लेकिन गहरा गड्ढा होने के कारण कोई भी नीचे उतर नहीं सका।
पुलिस मौके पर पहुंची, किंतु अंधेरा अधिक होने के कारण रेस्क्यू में देरी हुई।
करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद युवराज को बाहर निकला, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
एक प्रत्यक्षदर्शी डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने बताया कि यह हादसा आधी रात के आसपास हुआ और रात करीब पौने दो बजे वह मौके पर पहुंचा । उसने बताया कि वह युवक कार के अंदर फंसा हुआ था और पौने दो घंटे तक मदद मांगता रहा, कि किसी भी तरह बचा लो। प्रत्यक्षदर्शी मोनिंदर ने बताया कि मौके पर पुलिस एसडीआरएफ और फायर ब्रिगेड मौजूद थे ,लेकिन किसी ने भी पानी में उतरकर मदद नहींकी। वे वह कह रहे थे ,पानी बहुत ठंडा है ,अंदर लोहे की राॅड है । मोनिंदर ने कहा कि उसने कपड़े उतार कर रस्सी बांधी और 50 मीटर अंदर जाकर तलाश किया। लेकिन कार और युवक नहीं मिले । सुबह 5:30 बजे तक कुछ भी नहीं निकल सका था।
इस हादसे के बाद पुलिस ने लापरवाही के आरोप में दो कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर एफआईआर दर्ज की है। और आरोप लगाया है कि गड्ढे के पास पर्याप्त बैरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए थे । इसके पहले भी सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग की गई थी ,किंतु कार्रवाई नहीं हुई।
नोएडा में 27 साल के इंजीनियर की मौत मामले से जुड़ा बड़ा अपडेट आया है। नोएडा इंजीनियर डेथ केस में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गई है। 27 वर्षीय युवराज की मौत मामले में PM रिपोर्ट में सामने आया कि दम घुटने से मौत हुई है पोस्टमार्टम में हार्ट फेलियर भी रिपोर्ट हुआ। फिलहाल इस मामले में पुलिस ने दो रियल स्टेट डेवलपर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है….बता दें कि ये हादसा तब हुआ जब 27 साल के इंजीनियर युवराज मेहता गुरग्राम से अपने ऑफिस से घर आ रहे थे। रात में घना कोहरा था और रास्ते पर सही निर्देश ना होने की वजह से उनकी गाड़ी निर्माणधीन मॉल के बेसमेंट में गिर गई, जिसमें पानी भरा हुआ था…इसी में डूबने से उनकी मौत हो गई….पानी में गिरने के बाद युवराज ने अपनी जान बचाने की बेहद कोशिश की… वह गाड़ी की छत पर आकर लेट गये और फिर वहां से अपने पिता को फोन भी किया।
पिता ने इसकी जानकारी पुलिस को दी, जिसके बाद दमकलकर्मी मौके पर आए युवराज फ्लैश लाइट जला कर बचाओ-बचाओ चिल्लाते रहे, लेकिन न ही पुलिस न दमकलकर्मी उसे बचा पाए। और युवराज की जान चली गई ।
सेक्टर 150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में रहने वाले युवराज गुरुग्राम की एक प्रतिष्ठित कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे । वह शनिवार तड़के काम से घर लौट रहा था तभी यह दुर्घटना हुई। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है बचाव कार्य में देरी हुई। समय पर कार्रवाई की जाती तो इंजीनियर की जान बचाई जा सकती थी।
ज्यादा ठंड में लोहे की छड़ों की मौजूदगी के कारण बचाव कर्मी पानी में उतरने से हिचकिचा रहे थे… उनके पिता अब इस हादसे से पूरी तरह से टूट गये हैं….इकलौते बेटे थे युवराज….हाथ जोड़ कर प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि जो उनके साथ हुआ वो किसी और के साथ ना हो। अपनी आंखों से अपने बेटे को डूबता हुआ देख एक पिता की स्थिति होगी ये समझने की जरूरत है न कि बताने की…बेटा आंखो के सामने डूबता रहा मगर उसे बचा नहीं पाए। वो इस हादसे को प्रशासन की लापरवाही बता रहे हैं।
पिता का कहना है कि युवराज कभी तेज रफ्तार से गाड़ी नहीं चलाता था, उसके आखिरी शब्द थे, पापा प्लीज बचा लो….तो घोर लापरवाही में एक होनहार बच्चे की जान चली गई…..औऱ किसी के घर का चिराग बुझ गया….