चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड -पहुंची तीन लाख पार :
संवाददाता
20 January 2026
अपडेटेड: 5:21 PM 0thGMT+0530
वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिका की ओर से संभावित टैरिफ बढ़ोतरी की आशंकाओं का सीधा असर भारत में सोने और चांदी की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर में उतार-चढ़ाव और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा व्यापारिक शुल्क बढ़ाने की धमकियों के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत के सर्राफा बाजारों में भी सोना और चांदी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। हालिया कारोबार में देश के प्रमुख बाजारों में 24 कैरेट सोना करीब 1,45,000 से 1,46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार कारोबार करती देखी गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है और शेयर बाजारों में जोखिम का माहौल बनता है, तब सोना और चांदी निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प बन जाते हैं। भारत में भी यही रुझान दिखाई दे रहा है, जहां घरेलू निवेशक, ज्वैलर्स और बड़े संस्थागत खरीदार कीमती धातुओं में निवेश बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी का असर आयात लागत पर पड़ता है, जिससे घरेलू बाजार में भाव और ऊपर चले जाते हैं।
ट्रंप के टैरिफ का असर:
ट्रंप की ओर से यूरोप और अन्य देशों पर संभावित टैरिफ लगाने की चेतावनियों ने वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका को फिर से हवा दी है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है, क्योंकि भारत बड़ी मात्रा में सोने-चांदी का आयात करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना रहता है तो आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों में और मजबूती देखने को मिल सकती है। हालांकि ऊंची कीमतों के कारण आम ग्राहकों की खरीदारी पर असर पड़ रहा है, खासकर शादी-विवाह और त्योहारों के मौसम से पहले। कुल मिलाकर, वैश्विक घटनाक्रमों के बीच भारत में सोना-चांदी एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में उभरकर सामने आया है और बाजार की नजर आगे के अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर टिकी हुई है।