शरद पवार का INDIA गठबंधन पर बड़ा ट्विस्ट
संवाददाता
3 June 2025
अपडेटेड: 12:45 PM 0rdGMT+0530
A big twist from Sharad Pawar on the INDIA alliance
चिट्ठी पर साइन से इनकार, संजय राउत बोले- ‘मुंबई में होगी बात !
भारतीय सियासत में एक बार फिर नया ड्रामा सामने आया है, और इस बार केंद्र में हैं एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार। विपक्षी गठबंधन INDIA ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विशेष संसद सत्र बुलाने के लिए पत्र लिखा, लेकिन इस पत्र पर शरद पवार की पार्टी के हस्ताक्षर न होने ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। इस मामले पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा, “मैं मुंबई जाकर शरद पवार और सुप्रिया सुले से बात करूंगा।” यह घटनाक्रम न केवल विपक्षी गठबंधन की एकता पर सवाल उठा रहा है, बल्कि यह भी संकेत दे रहा है कि महाराष्ट्र की सियासत में कुछ बड़ा होने वाला है। आइए, इस सियासी तूफान की पूरी कहानी को करीब से समझते हैं।
“INDIA गठबंधन का पत्र, शरद पवार का दांव”
विपक्षी गठबंधन INDIA ने हाल ही में एक विशेष संसद सत्र बुलाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। इस पत्र में गठबंधन के प्रमुख दलों के नेताओं के हस्ताक्षर थे, लेकिन शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के हस्ताक्षर नदारद रहे। यह कोई छोटी बात नहीं है, क्योंकि शरद पवार विपक्षी गठबंधन के सबसे अनुभवी और रणनीतिक नेताओं में से एक माने जाते हैं। उनके इस कदम ने न केवल गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी चर्चा शुरू कर दी कि क्या पवार कोई नया सियासी दांव खेल रहे हैं।
“संजय राउत का गुस्सा: ‘मुंबई में होगी बात'”
शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “शरद पवार हमारे साथ हैं, लेकिन उनकी बेटी सुप्रिया सुले इस समय दिल्ली के बाहर हैं। मैं मुंबई जाकर उनसे इस बारे में बात करूंगा।” राउत का यह बयान न केवल उनकी नाराजगी को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि विपक्षी गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है। राउत ने यह भी साफ किया कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द ही शरद पवार से मुलाकात कर इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करेंगे। यह बयान महाराष्ट्र की सियासत में एक नई जंग की शुरुआत का संकेत देता है।
“शरद पवार की चुप्पी: रणनीति या असमंजस?”
शरद पवार का पत्र पर हस्ताक्षर न करना कई सवाल खड़े करता है। क्या यह उनकी रणनीतिक चुप्पी है, या फिर गठबंधन के भीतर कोई असहमति है? पवार हमेशा से अपनी सियासी चालों के लिए जाने जाते हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम उनकी ओर से एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, जिसके जरिए वह गठबंधन में अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहते हैं। दूसरी ओर, कुछ लोग इसे गठबंधन के भीतर असहमति का संकेत मान रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब पवार ने विपक्षी गठबंधन को चौंकाया हो। उनकी चुप्पी और इस मामले पर कोई स्पष्ट बयान न देना इस विवाद को और रहस्यमयी बना रहा है।
“महाराष्ट्र की सियासत में हलचल”
महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार और संजय राउत दोनों ही बड़े खिलाड़ी हैं। दोनों की पार्टियां—एनसीपी (शरदचंद्र पवार) और शिवसेना (UBT)—महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन MVA (महा विकास अघाड़ी) का हिस्सा हैं। ऐसे में, इस तरह का विवाद गठबंधन की एकता के लिए खतरा बन सकता है। खासकर तब, जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। राउत का यह बयान कि वह मुंबई जाकर पवार से बात करेंगे, इस बात का संकेत देता है कि गठबंधन के भीतर कुछ मतभेद हैं, जिन्हें जल्द सुलझाने की जरूरत है।
“सुप्रिया सुले का रोल: क्यों हैं चर्चा में?”
संजय राउत ने अपने बयान में सुप्रिया सुले का जिक्र किया, जो शरद पवार की बेटी और एनसीपी की सांसद हैं। राउत ने कहा कि सुप्रिया इस समय दिल्ली के बाहर हैं, जिसके कारण शायद पत्र पर हस्ताक्षर नहीं हो सके। लेकिन यह बयान कई सवाल खड़े करता है। क्या सुप्रिया की अनुपस्थिति ही इसकी वजह थी, या फिर एनसीपी के भीतर कोई बड़ा फैसला लिया गया? सुप्रिया सुले को पवार की राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता है, और उनकी भूमिका इस विवाद में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि राउत और सुप्रिया की मुलाकात में क्या नतीजा निकलता है।
“INDIA गठबंधन की एकता पर सवाल”
INDIA गठबंधन पिछले कुछ समय से विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में जुटा है। लेकिन शरद पवार जैसे कद्दावर नेता का इस तरह का कदम गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े करता है। बीजेपी ने इस मौके को भुनाते हुए कहा कि विपक्षी गठबंधन में कोई एकजुटता नहीं है, और यह केवल सत्ता की लालच में बना एक ढीला-ढाला गठजोड़ है। इस बीच, गठबंधन के अन्य नेताओं ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है, जो इस विवाद को और रहस्यमयी बना रहा है।
“सोशल मीडिया पर बहस: पवार की रणनीति या गलती?”
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे ने तीखी बहस छेड़ दी है। कुछ यूजर्स ने शरद पवार की तारीफ करते हुए कहा कि वह हमेशा अपने सियासी दांव से सबको चौंकाते हैं। एक यूजर ने लिखा, “पवार साहब की चाल कोई नहीं समझ सकता। यह उनका मास्टरस्ट्रोक है।” वहीं, कुछ लोगों ने इसे गठबंधन की कमजोरी बताया और कहा कि इससे बीजेपी को फायदा होगा। राउत के बयान को भी कुछ लोगों ने तंज के रूप में देखा, जिसमें वह पवार को गठबंधन में शामिल होने की बात कह रहे हैं।
“महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की तैयारी”
यह विवाद ऐसे समय में आया है, जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। MVA गठबंधन बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार) गठबंधन को टक्कर देने की कोशिश में है। ऐसे में, शरद पवार का यह कदम और संजय राउत का बयान MVA की रणनीति पर असर डाल सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पवार और राउत की मुलाकात के बाद गठबंधन की एकता कितनी मजबूत रहती है।