Operation Sindoor के बाद कई मुस्लिम देशों की रुचि ब्रह्मोस मिसाइल !
संवाददाता
15 May 2025
अपडेटेड: 6:55 AM 0thGMT+0530
ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई मुस्लिम देशों की रुचि --ब्रह्मोस मिसाइल!
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद भारत के ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की होड़ !कई मुस्लिम देशों की भी है भी रुचि..
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकियों के गढ़ में घुसकर सटीक प्रहार किए थे। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान की ओर से किए गए हमलों का भी सटीक जवाब दिया था। इससे अब अंतराष्ट्रीय बाजारों में भारत के मिसाइलों की मांग बढ़ गई है।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद भारत और रूस के सहयोग से तैयार हुए ब्रह्मोस मिसाइल एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
आईए जानते हैं क्या है ब्रह्मोस मिसाइल !
ब्रह्मोस विश्व की सबसे तीव्रगामी मिसाइल है। ब्रह्मोस के समुद्री तथा थल संस्करणों का पहले ही सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है तथा भारतीय सेना एवं नौसेना को सौंपा जा चुका है।
ब्रह्मोस मिसाइल की रफ्तार 3400 किलोमीटर/घंटा है. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की रेंज 400 किमी तक है. ब्रह्मोस मिसाइल को BrahMos Aerospace बनाती है.भारत और वियतनाम के बीच ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री का समझौता लगभग तय है, जिसकी कीमत लगभग 700 मिलियन डॉलर (5976 करोड़ रुपए से ज्यादा) है. यह मिसाइल वियतनाम की नौसेना को मजबूत बनाने में मदद करेगी.
ब्रह्मोस के समुद्री तथा थल संस्करणों का पहले ही सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है तथा भारतीय सेना एवं नौसेना को सौंपा जा चुका है।
ब्रह्मोस भारत और रूस के द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है।
- कई रिपोर्ट्स में यह पुष्टि की गई कि भारत ने पाकिस्तान की कार्रवाई का जवाब देने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया। जानकारी के मुताबिक यह पहली बार है जब इस मिसाइल को किसी युद्ध में इस्तेमाल किया गया है। हालांकि भारत ने आधिकारिक तौर पर इसके इस्तेमाल की पुष्टि नहीं की है, लेकिन पाकिस्तान ने ब्रह्मोस से हुई तबाही का जिक्र किया है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल फैसिलिटी के उद्घाटन में दौरान इसका जिक्र किया था। इन सब के बीच अब अंतराष्ट्रीय बाजार में ब्रह्मोस की मांग और बढ़ गई है।
*ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा किया गया है। इसे भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया के बीच एक साझेदारी के तहत डेवलप किया गया है। ब्रह्मोस मिसाइलों को पनडुब्बियों, जहाजों, विमानों और जमीन से भी लॉन्च किया जा सकता है। इसके अलावा ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज लगभग 300 किलोमीटर है। वहीं यह 200 से 300 किलो वजन का वारहेड भी ले जा सकता है। यह 2.8 मैक की तीव्र गति से उड़ान भरता है। ब्रह्मोस मिसाइल अपनी सटीकता के लिए भी जाना जाता है। - ब्रह्मोस में रुचि दिखाने वाले कई देश!
कई देशों ने ब्रह्मोस में गहरी रुचि दिखाई है। फिलीपींस ने जनवरी 2022 में भारत के साथ ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों के लिए एक सौदा किया था। इस सौदे के तहत भारत फिलीपींस को तीन खेप भेजने वाला था। भारत ने हाल ही में अप्रैल 2025 में इसकी दूसरी खेप फिलीपींस को डिलीवर की है। वहीं भारत और इंडोनेशिया भी जल्द ही ऐसी एक डील फाइनल कर सकते हैं। लगभग 450 मिलियन डॉलर के इस सौदे पर पिछले एक दशक से बातचीत चल रही है।
*इसके अलावा वियतनाम भी अपनी सेना और नौसेना के लिए ब्रह्मोस मिसाइलें खरीदने की योजना बना रहे हैं। वियतनाम भारत के साथ 700 मिलियन डॉलर का सौदा कर सकता है। वहीं मलेशिया अपने सुखोई Su-30MKM लड़ाकू विमानों और केदाह श्रेणी के युद्धपोतों के बदले ब्रह्मोस मिसाइलों का सौदा कर सकता है।
*अरब देशों ने भी दिखाई रुचि!
इसके अलावा थाईलैंड, सिंगापुर, ब्रुनेई, ब्राजील, चिली, अर्जेंटीना, वेनेजुएला, मिस्र के अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और ओमान जैसे अरब देशों ने भी ब्रह्मोस मिसाइलों में रुचि दिखाई है। इस मामले पर जानकारों का मानना है कि इंडो पेसिफिक क्षेत्र के कई देश दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता को देखते हुए ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं इसके एडवांस वर्जन ने अरब देशों को भी अपनी तरफ आकर्षित किया है।