AI से तैयार सबूतों पर फैसले लेना गलत: सुप्रीम कोर्ट
संवाददाता
3 March 2026
अपडेटेड: 4:07 PM 0rdGMT+0530
3 मार्च 2026
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए सबूतों के आधार पर निर्णय देने पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि एआई की मदद से बनाए गए साक्ष्यों पर फैसला लिखना गलत है और इसे सामान्य त्रुटि नहीं माना जा सकता।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा, न्यायमूर्ति आलोक की पीठ ने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया से न्यायिक निर्णय की पारदर्शिता और ईमानदारी पर सीधा असर पड़ता है। अदालत ने कहा कि वह इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करना चाहती है, क्योंकि यह न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा प्रश्न है।
दरअसल, अगस्त 2025 में आंध्र प्रदेश की एक ट्रायल कोर्ट ने विवादित संपत्ति से जुड़े मामले में एआई से तैयार की गई एक तस्वीर को आधार बनाकर फैसला सुनाया था। इस पर सवाल उठने के बाद मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि किसी निर्णय का आधार गैर-मौजूद या फर्जी साक्ष्य हो, तो यह केवल एक साधारण गलती नहीं बल्कि गंभीर कदाचार की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
अदालत ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमण, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।