अमेरिका H-1B वीजा के नियम बदलने की तैयारी: आया नया फरमान, भारतीयों पर क्या होगा असर

khabar pradhan

संवाददाता

24 September 2025

अपडेटेड: 10:18 AM 0thGMT+0530

अमेरिका H-1B वीजा के नियम बदलने की तैयारी: आया नया फरमान, भारतीयों पर क्या होगा असर

24 सितंबर 2025: अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने अब H-1B वीजा में कुछ बदलाव करने का प्रस्ताव किया है।
अब यह वीजा केवल लॉटरी पर ही निर्भर नहीं होगा बल्कि उम्मीदवार के कौशल के स्तर और नौकरी में मिलने वाले वेतन पर होगा । अब नए नियमों के तहत सभी उम्मीदवारों को श्रम विभाग की रिपोर्ट के आधार पर चार वेतन श्रेणियां में रखा जाएगा।

पहली श्रेणी में वे लोग होंगे ,जिन्हें 1,62,500 हर वर्ष वेतन मिलता है। यानी करीब 1.44 करोड रुपए।
इस लॉटरी में चार बार शामिल होंगे– जबकि सबसे नीचे के स्तर में केवल एक बार शामिल होंगे। इसका उद्देश्य अधिक कुशल और ऊंचा वेतन पाने वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के संबंध में है । सरकार ने 22 सितंबर से नया h1b वीजा के आवेदन पर 1लाख डालर यानी 88 लाख रुपए की फीस भी निर्धारित की थी।

ट्रंप प्रशासन का यह मानना है कि यह सुधार बेहतर वेतन और अधिक योग्य उम्मीदवारों को चुनने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इस व्यवस्था में आवेदकों को उनके ओ ई डब्ल्यू एस यानी ऑक्यूपेशनल एंप्लॉयमेंट एंड वेज स्टैटिसटिक्स वर्गीकरण के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी।

भारतीयों पर क्या होगा असर:

एंटी लेवल इंजीनियर और नए ग्रेड ग्रेजुएट के लिए वीजा मिलना कठिन होगा ।क्योंकि नए चयन में वेतन कम होता है । हाय स्किल, एआई, डाटा साइंस ,चिप डिजाइन, साइबर सिक्योरिटी वाले, जिनकी सैलरी करीब डेढ़ लाख डॉलर या करीब 1.33 करोड रुपए हैं उन्हें लाभ हो सकता है।

भारतीय कंपनियों जैसे टीसीएस इन्फोसिस, विप्रो जैसी ज्यादातर कंपनियां एंटी और मिड लेवल कर्मचारियों को ही भेजती हैं। ऐसे कर्मचारियों के लिए दिक्कत हो सकती है । गूगल ,माइक्रोसॉफ्ट, अमेजॉन जैसी कंपनियां हाई स्किल कर्मचारी लेती है, उन्हें फायदा मिल सकता है।

यह नई व्यवस्था कब और किस तरह से काम करेगी :
यह नई व्यवस्था वेतन आधारित चयन प्रणाली का प्रस्ताव फेडरल रजिस्टर में जारी हो चुका है। इस पर 30 दिन में जनता की राय मांगी जाएगी । इस मंजूरी मिलने के बाद व्यवस्था अगले वीजा साइकिल 2026 अप्रैल से लागू की जा सकती है।

ट्रंप का मकसद:

एच-1B वीजा के कारण अमेरिका के निवासियों के लिए जॉब के मौके को बढ़ाना है। वीजा को सिर्फ कुशल और महंगे टैलेंट तक ही सीमित करना है। अमेरिका के लोगों को जाॅब दिलाना ट्रंप का मकसद है। बाहर से सिर्फ अच्छे और कुशल उम्मीदवार ही प्रवेश कर सकें।

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