अमित शाह का बड़ा बयान: अडानी रिश्वत मामले पर तोड़ी चुप्पी
संवाददाता
24 May 2025
अपडेटेड: 10:45 AM 0thGMT+0530
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अडानी समूह से जुड़े रिश्वत मामले पर पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसने देश की सियासत में नया तूफान खड़ा कर दिया है। यह मामला, जिसमें अडानी समूह पर विदेशी निवेशकों को रिश्वत देने के आरोप लगे हैं, विपक्ष के लिए केंद्र सरकार पर हमला करने का बड़ा हथियार बन गया है। शाह के बयान ने इस विवाद को और गर्म कर दिया है, और सोशल मीडिया से लेकर संसद तक इसकी चर्चा जोरों पर है। आइए, इस मामले की पूरी कहानी और शाह के बयान के मायने समझते हैं।
अडानी रिश्वत मामला: क्या है विवाद की जड़?
हाल ही में अमेरिका में अडानी समूह के खिलाफ एक जांच में रिश्वत और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। दावों के मुताबिक, अडानी समूह ने विदेशी निवेशकों और अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए बड़ी रकम की रिश्वत दी। इस खबर ने न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल मचा दी। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, यह आरोप लगाते हुए कि सरकार ने अडानी समूह को संरक्षण दिया है। इस पृष्ठभूमि में अमित शाह का बयान इस मामले में सरकार का पहला आधिकारिक जवाब माना जा रहा है।
शाह का जवाब: ‘आरोप बेबुनियाद, जांच होगी’
अमित शाह ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और सरकार इसकी निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा, “विपक्ष इस मुद्दे पर सियासी रोटियां सेंक रहा है। अडानी समूह के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने आएगी, और भारत की न्यायिक प्रणाली इसकी जांच करेगी।” शाह ने यह भी जोर दिया कि केंद्र सरकार किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी, और अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो कठोर कार्रवाई होगी।
विपक्ष का पलटवार: ‘सच छिपाने की कोशिश’
विपक्ष ने शाह के बयान को खारिज करते हुए इसे सरकार की सफाई बताने की कोशिश करार दिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मांग की है कि इस मामले की जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) गठित की जाए। एक विपक्षी नेता ने टिप्पणी की, “शाह जी का बयान केवल समय टालने की कोशिश है। अडानी मामले में पारदर्शिता तभी आएगी, जब स्वतंत्र जांच होगी।” यह विवाद अब संसद के आगामी सत्र में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
जनता की राय
शाह के बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। कुछ यूजर्स ने सरकार के रुख का समर्थन करते हुए लिखा, “अमित शाह ने साफ कर दिया कि जांच होगी, अब विपक्ष का ड्रामा बंद होना चाहिए।” वहीं, दूसरों ने इस बयान को बचाव की कोशिश बताया। एक यूजर ने लिखा, “अडानी केस में सच्चाई सामने लाने के लिए JPC ही एकमात्र रास्ता है। सरकार क्यों डर रही है?” यह बहस दर्शाती है कि यह मामला जनता के बीच भी गहरी रुचि का विषय बन गया है।
जांच या सियासी जंग?
अमित शाह का यह बयान इस विवाद को शांत करने की बजाय और हवा दे सकता है। अगर जांच में पारदर्शिता नहीं दिखी, तो विपक्ष इसे और बड़ा मुद्दा बना सकता है। दूसरी ओर, सरकार का दावा है कि वह इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद सियासी जंग में बदलता है या निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आती है।