बाबा रामदेव का ‘शरबत जिहाद’ पर नया बयान

khabar pradhan

संवाददाता

18 April 2025

अपडेटेड: 4:02 PM 0thGMT+0530

बाबा रामदेव का ‘शरबत जिहाद’ पर नया बयान

बाबा रामदेव का 'शरबत जिहाद' पर नया बयान

कहा- मैंने रूह अफजा का नाम नहीं लिया, उन्होंने खुद समझा, मतलब वे जिहाद कर रहे होंगे

योग गुरु और पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक बाबा रामदेव के ‘शरबत जिहाद’ बयान पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। रामदेव ने हाल ही में एक और बयान देकर इस मामले को और तूल दे दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पिछले बयान में रूह अफजा या हमदर्द कंपनी का नाम नहीं लिया था, लेकिन अगर रूह अफजा वालों ने इसे अपने ऊपर लिया, तो इसका मतलब है कि “वे खुद मानते हैं कि वे जिहाद कर रहे होंगे।” इस बयान ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है, जिसमें कुछ लोग इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश बता रहे हैं, तो कुछ इसे रामदेव की मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।


बयान का विवरण
रामदेव ने 10 अप्रैल को एक कार्यक्रम में ‘शरबत जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि एक कंपनी (संभवतः रूह अफजा) अपनी कमाई से मस्जिदें और मदरसे बनवाती है, जबकि पतंजलि का शरबत पीने से गुरुकुल बनेंगे। इस बयान की तीखी आलोचना हुई, जिसमें पत्रकारों, विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे सांप्रदायिक और नफरत फैलाने वाला करार दिया। रूह अफजा बनाने वाली कंपनी हमदर्द, जो 100 साल से अधिक पुरानी है, ने इस बयान पर आपत्ति जताई थी।
इसके बाद, रामदेव ने अपने नए बयान में सफाई देने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “मैंने किसी कंपनी का नाम नहीं लिया था। अगर रूह अफजा वालों ने मेरे बयान को अपने ऊपर लिया, तो इसका मतलब है कि वे खुद मानते हैं कि वे जिहाद में शामिल हैं। मैंने तो सिर्फ सांप्रदायिक तत्वों की बात की थी।” रामदेव ने यह भी दावा किया कि उनका उद्देश्य केवल पतंजलि के उत्पादों को बढ़ावा देना था, न कि किसी समुदाय को निशाना बनाना।
हमदर्द कंपनी की प्रतिक्रिया
हमदर्द कंपनी ने रामदेव के पहले बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे आधारहीन और सांप्रदायिक बताया था। कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा था, “हमदर्द 1906 से भारत में लोगों की सेवा कर रही है। हमारा मिशन स्वास्थ्य और एकता को बढ़ावा देना है, न कि किसी तरह का धार्मिक या सांप्रदायिक एजेंडा। रामदेव का बयान हमारी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने की कोशिश है।” कंपनी ने कानूनी कार्रवाई की संभावना पर भी विचार करने की बात कही थी।
रामदेव के नए बयान पर हमदर्द ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, कंपनी इस मामले में कानूनी सलाह ले रही है।
सोशल मीडिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
रामदेव का यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। X पर कई यूजर्स ने इसे नफरत फैलाने की कोशिश बताया। एक यूजर ने लिखा, “रामदेव पहले सांप्रदायिक बयान देते हैं, फिर सफाई देकर और विवाद बढ़ाते हैं। यह उनकी 100 साल पुरानी कंपनी को बदनाम करना शर्मनाक है।”
वहीं, कुछ यूजर्स ने रामदेव का समर्थन करते हुए इसे उनकी मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा बताया। एक अन्य यूजर ने लिखा, “रामदेव ने ‘शरबत जिहाद’ कहकर पतंजलि का शरबत बेचने की चाल चली। यह उनका पुराना तरीका है।”
विपक्षी दलों ने भी इस बयान की निंदा की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “रामदेव का यह बयान सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है। सरकार को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।” समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, “यह शर्मनाक है कि एक व्यापारी धार्मिक भावनाओं को भड़काकर अपना माल बेच रहा है।”
BJP के कुछ नेताओं ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है, जबकि कुछ ने इसे रामदेव का निजी बयान बताकर पल्ला झाड़ लिया। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, “यह रामदेव का व्यक्तिगत विचार है। सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है।”
कानूनी पहलू
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि रामदेव का बयान भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153A (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) और 505 (सार्वजनिक शरारत पैदा करने वाले बयान) के तहत आपराधिक मामला बन सकता है। एक वरिष्ठ वकील ने कहा, “अगर हमदर्द कंपनी शिकायत दर्ज करती है, तो रामदेव के खिलाफ जांच शुरू हो सकती है। उनके बयान में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की क्षमता है।”
हालांकि, अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। पुलिस ने कहा कि अगर कोई शिकायत मिलती है, तो वे कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे।
रामदेव का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब रामदेव अपने बयानों या कार्रवाइयों के कारण विवादों में आए हैं।
**2021 में, रामदेव ने कोविड-19 के इलाज के लिए पतंजलि की दवा ‘कोरोनिल’ को WHO से मंजूरी मिलने का दावा किया था, जिसे बाद में गलत साबित किया गया।
**2020 में, उन्होंने आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) को “बेकार विज्ञान” कहा था, जिसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने उनके खिलाफ कानूनी नोटिस जारी किया था।
इसके अलावा, पतंजलि के कई उत्पादों पर भ्रामक विज्ञापन और गलत दावों के आरोप लग चुके हैं।
इन विवादों के बावजूद, रामदेव का पतंजलि ब्रांड भारत में एक बड़ा नाम बना हुआ है, और उनके समर्थकों की संख्या भी कम नहीं है।
विशेषज्ञों की राय
सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रामदेव का यह बयान उनकी मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा हो सकता है। एक विश्लेषक ने कहा, “रामदेव जानबूझकर विवादास्पद बयान देते हैं ताकि सुर्खियों में रहें और अपने उत्पादों का प्रचार करें। यह उनकी पुरानी रणनीति है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के बयान सामाजिक तनाव को बढ़ा सकते हैं, खासकर तब जब देश पहले से ही धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों पर संवेदनशील है।
एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा, “रामदेव का बयान हमदर्द जैसे स्थापित ब्रांड को बदनाम करने की कोशिश है। रूह अफजा भारत की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, और इसे धार्मिक रंग देना गलत है।”
हमदर्द और रूह अफजा की विरासत
हमदर्द कंपनी की स्थापना 1906 में हकीम हाफिज अब्दुल मजीद ने की थी, और रूह अफजा इसका सबसे लोकप्रिय उत्पाद है। यह शरबत न केवल भारत, बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, और मध्य पूर्व के देशों में भी लोकप्रिय है। हमदर्द ने अपनी आय का एक हिस्सा सामाजिक कार्यों, जैसे स्कूल, अस्पताल, और चैरिटेबल ट्रस्ट के लिए दान किया है, जिसे कंपनी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा मानती है।
रूह अफजा को भारतीय संस्कृति में एक खास जगह मिली है, खासकर रमजान के दौरान, जब इसे इफ्तार के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। रामदेव का इसे ‘जिहाद’ से जोड़ना कई लोगों को नागवार गुजरा है।
आगे की राह
रामदेव के इस बयान ने सामाजिक और कानूनी स्तर पर कई सवाल खड़े किए हैं। हमदर्द कंपनी के अगले कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे। अगर कंपनी कानूनी कार्रवाई करती है, तो रामदेव को कोर्ट में जवाब देना पड़ सकता है। दूसरी ओर, अगर यह मामला शांत होता है, तो यह रामदेव के लिए एक और विवादास्पद बयान के रूप में दर्ज हो जाएगा।
प्रशासन ने इस मामले में अभी तक कोई सक्रिय हस्तक्षेप नहीं किया है, लेकिन सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने सरकार से कार्रवाई की मांग की है। यह देखना बाकी है कि क्या यह विवाद केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहेगा या इसका व्यापक प्रभाव होगा।

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