बांग्लादेश ने पाकिस्तान से मांगी 1971 के नरसंहार के लिए माफी

khabar pradhan

संवाददाता

18 April 2025

अपडेटेड: 9:36 AM 0thGMT+0530

बांग्लादेश ने पाकिस्तान से मांगी 1971 के नरसंहार के लिए माफी

52 हजार करोड़ टका बकाया और 1970 के चक्रवात राहत राशि लौटाने की मांग

52 हजार करोड़ टका बकाया और 1970 के चक्रवात राहत राशि लौटाने की मांग

बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ 15 साल बाद हुई पहली विदेश सचिव स्तर की बैठक में कड़े तेवर दिखाए। बांग्लादेश ने 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए नरसंहार के लिए पाकिस्तान से सार्वजनिक माफी की मांग की। इसके साथ ही, बांग्लादेश ने 1971 से पहले संयुक्त पाकिस्तानी परिसंपत्तियों के हिस्से के रूप में 52 हजार करोड़ टका (लगभग 4.3 अरब डॉलर) का बकाया देने और 1970 के भोला चक्रवात के लिए मिली 200 मिलियन डॉलर की राहत राशि लौटाने की मांग उठाई। इस बैठक ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक विवादों को फिर से सुर्खियों में ला दिया।


बैठक का पृष्ठभूमि
यह बैठक ढाका में गुरुवार को आयोजित की गई, जिसमें बांग्लादेश के विदेश सचिव मासुद बिन मोमेन और पाकिस्तान के विदेश सचिव साइरस सज्जाद काजी ने हिस्सा लिया। यह 2010 के बाद दोनों देशों के बीच पहली आधिकारिक द्विपक्षीय वार्ता थी। बांग्लादेश ने इस बैठक में 1971 के मुक्ति संग्राम से जुड़े “ऐतिहासिक रूप से अनसुलझे मुद्दों” को प्रमुखता से उठाया।
1971 में बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) ने पाकिस्तान से स्वतंत्रता हासिल की थी। इस दौरान पाकिस्तानी सेना पर बांग्लादेशियों के खिलाफ नरसंहार, बलात्कार और व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे। बांग्लादेश का दावा है कि इस युद्ध में 30 लाख लोग मारे गए और लाखों लोग विस्थापित हुए। पाकिस्तान इन आंकड़ों को खारिज करता है और नरसंहार के आरोपों को कम करके आंकता है।
बांग्लादेश की तीन प्रमुख मांगें
बांग्लादेश ने इस बैठक में तीन प्रमुख मांगें रखीं, जो पाकिस्तान के लिए असहज साबित हुईं:
1971 के नरसंहार के लिए माफी: बांग्लादेश ने मांग की कि पाकिस्तान 1971 के दौरान हुए नरसंहार और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगे। बांग्लादेश का कहना है कि यह माफी दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की दिशा में पहला कदम होगा।
52 हजार करोड़ टका का बकाया: बांग्लादेश ने 1971 से पहले संयुक्त पाकिस्तान की परिसंपत्तियों में अपने हिस्से के रूप में 52 हजार करोड़ टका (लगभग 4.3 अरब डॉलर) की मांग की। यह राशि बांग्लादेश का दावा है कि उसे विभाजन के समय नहीं मिली।
1970 के चक्रवात राहत राशि की वापसी: बांग्लादेश ने 1970 के भोला चक्रवात के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मिली 200 मिलियन डॉलर की राहत राशि को लौटाने की मांग की। यह चक्रवात, जो इतिहास के सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक था, ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में भारी तबाही मचाई थी। बांग्लादेश का आरोप है कि इस राशि का उपयोग पाकिस्तान ने अपने हितों के लिए किया, न कि प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास के लिए।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने इन मांगों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी अधिकारी इन मांगों से असहज दिखे और उन्होंने इन मुद्दों को “जटिल और ऐतिहासिक” बताकर चर्चा को टालने की कोशिश की। पाकिस्तान ने इस बैठक को दोनों देशों के बीच व्यापार, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा था, लेकिन बांग्लादेश के कड़े रुख ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
ऐतिहासिक संदर्भ
1971 का युद्ध बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच संबंधों में एक गहरी खाई का कारण बना। युद्ध के बाद, 1974 में बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ था, जिसमें युद्धबंदियों की वापसी और कुछ अन्य मुद्दों पर सहमति बनी थी। हालांकि, नरसंहार के लिए माफी और आर्थिक मुआवजे जैसे मुद्दे अनसुलझे रहे। बांग्लादेश ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 1971 के नरसंहार को “जातिसंहार” के रूप में मान्यता देने की मांग भी उठाई है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
बांग्लादेश में इस बैठक और मांगों को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। कई बांग्लादेशी नागरिकों और संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, “1971 के जख्म अभी भी ताजा हैं। पाकिस्तान को माफी मांगनी होगी और बकाया राशि चुकानी होगी। यह इंसाफ का सवाल है।”
वहीं, पाकिस्तान में इस बैठक को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इन मांगों को उठाकर बांग्लादेश पुराने विवादों को हवा दे रहा है, जबकि अन्य का कहना है कि दोनों देशों को अतीत को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए।
विशेषज्ञों की राय
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश का यह रुख दोनों देशों के बीच संबंधों को और जटिल बना सकता है। एक विशेषज्ञ ने कहा, “बांग्लादेश का यह कदम नैतिक और ऐतिहासिक रूप से सही है, लेकिन पाकिस्तान के लिए माफी मांगना और इतनी बड़ी राशि देना राजनीतिक रूप से मुश्किल होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और ध्यान आकर्षित कर सकता है।
भारत का दृष्टिकोण
भारत, जो 1971 के युद्ध में बांग्लादेश का प्रमुख सहयोगी था, ने इस बैठक पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, भारतीय विदेश नीति विश्लेषकों का कहना है कि बांग्लादेश का यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता और ऐतिहासिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण है।

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