हाई कोर्ट का बड़ा फैसला!

khabar pradhan

संवाददाता

14 May 2025

अपडेटेड: 11:40 AM 0thGMT+0530

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला!

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला!


1 मई से पेंशन में छूट के साथ मिलेगा 7% ब्याज, जानिए पेंशनभोगियों के अधिकारों की पूरी डिटेल

प्रकाशित तिथि:14 मई, 2025

*पेंशनभोगियों के अधिकार – हाई कोर्ट ने हाल ही में देश के लाखों पेंशनभोगियों को राहत देते हुए एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। यह निर्णय विशेष रूप से उन तेलुगु सरकारी कर्मचारियों के लिए है जो 30 जून या 31 दिसंबर को सेवा से सेवानिवृत्त हो गए थे। कोर्ट ने कहा कि ऐसे सभी पेंशनभोगियों को 1 जुलाई या 1 जनवरी को नियमित वेतन भत्ते का लाभ भी मिलना चाहिए।
इस फैसले से न केवल पेंशन की राशि के आधार पर उन्हें पुराने वेतनमान (एरियर) का भुगतान भी 7% ब्याज के साथ किया जाएगा। यह एक तरह से आदेश दिया गया कि उन हजारों मझोले कर्मचारियों के लिए जस्टिस की जीत है जो लंबे समय से इस मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे।
*किससे मिलेगा लाभ?
इस फैसले का सीधा असर लगभग 71,000 पेंशनभोगियों पर पड़ा। ये वे कर्मचारी हैं जो 30 जून या 31 दिसंबर को समाप्त हो गए थे, और एक दिन से वे वेतन वृद्धि से शुरू हो गए थे जो हर साल 1 जुलाई और 1 जनवरी को लागू होते हैं। अब कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ एक दिन के अंतर के कारण किसी भी वेतन वृद्धि से विदेशी मुद्रा नहीं ली जा सकती।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए नई पेंशन नीति लागू

  • 31 मई से होगा बड़ा बदलाव वरिष्ठ नागरिकों के लिए नई पेंशन नीति!
    *कोर्ट ने क्या कहा?
    कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह पूरी तरह से अन्याय है कि सेवा समाप्ति की तारीख केवल एक दिन पहले हो रही है क्योंकि किसी भी कर्मचारी को वेतन का लाभ नहीं मिलता है। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि ऐसे सभी सभी पेंशनरों को 1 मई 2023 से एरियर दिया जाए और उस पर 7% ब्याज भी जोड़ा जाए।

ग्रेच्युटी और पेंशन में भी फायदा
इस फैसले का असर केवल पेंशन पर ही नहीं छोड़ा गया, बल्कि ग्रेच्युटी और अन्य बुजुर्गों की नियुक्ति के समय मिलने वाली रकम को भी नए सिरे से पेश किया जाएगा। यानी ग्रेच्युटी की राशि को भी स्नातक और पेंशन का मासिक भुगतान पहले से अधिक करना होगा।

सरकार की जिम्मेदारी
अब यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वो कोर्ट के फैसले को समय पर लागू करे और जिन पेंशनरों को इस लाभ से प्राथमिकता दी जाए, उन्हें न्याय दे। यह आदेश केवल मध्य प्रदेश के कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा, बल्कि दूसरे राज्यों में भी इसी तरह की भर्तियों को बल मिलेगा।

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