धन-धान्य, समृद्धि, वैभव की देवी महालक्ष्मी पूजा- शुभ दीपावली
Khabar Pradhan Desk
संवाददाता
16 October 2025, 12:10 PM
16 अक्टूबर 2025: बड़ी दीपावली (महालक्ष्मी पूजा): प्रकाश, समृद्धि और आध्यात्मिक जागरण का पर्व
भारत के सबसे पवित्र और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है — दीपावली, जिसे बड़ी दीपावली या महालक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है।
यह दिन न केवल भौतिक समृद्धि और उत्सव का प्रतीक है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का संदेश देता है।
दीपावली हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है।
यह पाँच दिवसीय पर्व का सबसे मुख्य दिन होता है — जहाँ आरंभ धनतेरस से होकर, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज तक जाता है।
बड़ी दीपावली को विशेष रूप से महालक्ष्मी पूजन के लिए शुभ माना गया है।
वैदिक पृष्ठभूमि और पौराणिक कथा:
दीपावली का मूल वैदिक अर्थ है — दीपों की पंक्ति।
वैदिक युग में यह अमावस्या के अंधकार को दूर करने के लिए अग्नि और प्रकाश की आराधना का दिन माना जाता था।
यजुर्वेद में कहा गया है —
तमसो मा ज्योतिर्गमय — “मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो।”
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का गहरा संबंध इस दिन से जुड़ा है।
जब समुद्र मंथन हुआ, तब चौदह रत्नों के साथ महालक्ष्मी जी प्रकट हुईं।
उसी दिन अमावस्या तिथि थी, और उसी रात को सभी देवताओं ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया।
तभी से इस दिन दीप जलाकर महालक्ष्मी पूजन की परंपरा आरंभ हुई।
एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम इसी दिन 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे।
उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाए और पूरा नगर प्रकाशमय हो गया।
यह घटना “प्रकाश पर्व” के रूप में अमर हो गई।
महालक्ष्मी पूजा का महत्व:
महालक्ष्मी पूजा केवल धन की देवी की आराधना नहीं है, बल्कि यह सदाचार, पवित्रता, श्रम और संतोष के माध्यम से समृद्धि प्राप्त करने का प्रतीक है।
- लक्ष्मी जी के तीन स्वरूप:
- धनलक्ष्मी – भौतिक संपत्ति और आर्थिक सुख का स्रोत।
- ध्यानलक्ष्मी – ज्ञान, बुद्धि और विवेक की दात्री।
- गजलक्ष्मी – शक्ति, संतुलन और सौंदर्य की प्रतीक।
इन तीनों स्वरूपों की पूजा से व्यक्ति के जीवन में न केवल भौतिक, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संपन्नता आती है।
- दीपों का महत्व:
दीपक केवल रोशनी नहीं देता, बल्कि यह अंधकार, भय और अज्ञान को मिटाने का प्रतीक है।
ज्योति जलाकर हम यह संकल्प लेते हैं कि —
“हम अपने जीवन से अंधकार रूपी नकारात्मकता को मिटाएँगे और सत्य का प्रकाश फैलाएँगे।”
महालक्ष्मी पूजन विधि (Lakshmi Puja Vidhi)
- पूजन की तैयारी:
- घर की संपूर्ण सफाई करें — इसे लक्ष्मी स्वागत का प्रतीक माना जाता है।
- दरवाजे पर मंगल चिह्न, स्वस्तिक, और लक्ष्मी के पदचिह्न बनाएं।
- पूजन स्थल को उत्तर या पूर्व दिशा में सजाएं, जहाँ माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाए।
- पूजन सामग्री
फूल, धूप, दीपक, कपूर, हल्दी, कुंकुम, चावल, मिठाई, सिक्के, कलश, नारियल, पान, सुपारी, चांदी या तांबे का बर्तन, गंगा जल आदि।
- पूजन का क्रम:
(क) आसन ग्रहण और संकल्प:
शुद्ध होकर आसन पर बैठें और संकल्प लें कि आप लक्ष्मी पूजन विधि-विधान से करेंगे।
“ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः” का जप कर पूजा प्रारंभ करें।
(ख) गणेश पूजन:
सर्वप्रथम भगवान गणेश की आराधना करें —
“वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ…”
गणेश जी विघ्नों को दूर करते हैं और कार्य में सफलता देते हैं।
(ग) महालक्ष्मी पूजन:
- लक्ष्मी जी के समक्ष दीप जलाएं।
- फूल, हल्दी, चावल, और सिक्के अर्पित करें।
- माँ लक्ष्मी को लाल वस्त्र, पुष्पमाला, और नैवेद्य अर्पण करें।
- लक्ष्मी स्तोत्र या श्रीसूक्त का पाठ करें:
“ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।”
- कलश में जल भरकर उस पर नारियल और आम के पत्ते रखें, इसे लक्ष्मी का प्रतीक कलश कहा जाता है।
(घ) कुबेर पूजा:
महालक्ष्मी जी के साथ भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है।
वे धन के रक्षक माने जाते हैं।
दीपदान और आरती:
पूजन के बाद लक्ष्मी जी की आरती करें —
“ॐ जय लक्ष्मी माता…”
घर के हर कोने में दीप जलाएं, ताकि पूरा वातावरण प्रकाश और ऊर्जा से भर जाए।
धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक:
- अमावस्या का अंधकार – जीवन के दुःख और अज्ञान का प्रतीक।
- दीपों की रोशनी– आशा, विश्वास और सत्य का प्रतीक।
- महालक्ष्मी– समृद्धि के साथ-साथ शुद्धता और कृतज्ञता की देवी।
- गणेश जी– शुभारंभ और बुद्धि के प्रतीक।
आधुनिक युग में दीपावली की प्रासंगिकता:
आज के युग में, जब मनुष्य बाहरी चमक-दमक में उलझ गया है, दीपावली हमें भीतर झाँकने की प्रेरणा देती है।
- प्रकाश केवल बाहरी नहीं, आंतरिक भी हो:
दीपावली का असली अर्थ है अंतःकरण को प्रकाशित करना —
मन में करुणा, क्षमा और प्रेम का दीप जलाना।
- स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन:
दीपावली का पहला संदेश है — स्वच्छता-
घर की सफाई के साथ-साथ हमें विचारों की सफाई भी करनी चाहिए।
प्राकृतिक दीपक और जैविक सजावट का प्रयोग कर पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है।
- श्रम और नैतिकता से अर्जित धन का सम्मान:
महालक्ष्मी की कृपा उन पर होती है जो ईमानदारी, परिश्रम और विनम्रता से जीवन जीते हैं।
यह पर्व हमें सिखाता है कि धन का सही उपयोग समाज और परिवार के कल्याण में हो।
दीपावली का दार्शनिक संदेश:
दीपावली हमें केवल उत्सव मनाने नहीं, बल्कि आत्म-जागरण की प्रेरणा देती है।
हर दीपक हमें यह सिखाता है कि —
“जैसे एक छोटा दीप अंधकार मिटा सकता है, वैसे ही एक अच्छा विचार जीवन बदल सकता है।”
निष्कर्ष:
बड़ी दीपावली अथवा महालक्ष्मी पूजा केवल धन और उत्सव का प्रतीक नहीं,
बल्कि यह आध्यात्मिक समृद्धि, नैतिकता, और प्रकाश की अनुभूति का पर्व है।
यह हमें याद दिलाती है कि सच्चा धन वही है जो दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाए।
इस पावन अवसर पर हम यह संकल्प लें —
हम अपने भीतर और समाज में प्रकाश, प्रेम और सत्य का दीप जलाएँ।
शुभ दीपावली एवं महालक्ष्मी पूजन की मंगलकामनाएँ!
आपके जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि सदैव बनी रहे l