कर्नल सोफिया कुरैशी

khabar pradhan

संवाददाता

8 May 2025

अपडेटेड: 11:27 AM 0thGMT+0530

कर्नल सोफिया कुरैशी

carnal sofia qureshi

भारत की ‘शेरनी’ जिसने ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को हिलाया

भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी आज हर भारतीय के दिल में एक प्रेरणा बन चुकी हैं। एक सैनिक परिवार की बेटी, पत्नी और देश की सच्ची सिपाही, सोफिया ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर भारत की ताकत का लोहा मनवाया। 7 मई 2025 को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आतंकी कैंपों को तबाह करने वाले वीडियो दिखाए, जिसने दुनिया को भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का एहसास कराया। लेकिन सोफिया की कहानी सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है—यह एक ऐसी महिला की गाथा है, जिसने अपने दादा और पिता की सैन्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए देश के लिए अनगिनत बलिदान दिए। आइए, इस ‘शेरनी’ की अनसुनी कहानी को विस्तार से जानते हैं।

सैनिक परिवार की बेटी: विरासत से शुरुआत
कर्नल सोफिया कुरैशी का जन्म एक सैनिक परिवार में हुआ। उनके दादा स्वतंत्रता संग्राम के दौर में सैनिक थे, जबकि उनके पिता सेना में इस्लामी उपदेशक के रूप में सेवारत रहे। वडोदरा, गुजरात में पली-बढ़ी सोफिया ने बचपन से ही देशभक्ति और अनुशासन को अपनी रगों में महसूस किया। उनकी मां हलीमा कुरैशी ने बताया, “सोफिया हमेशा अपने पिता और दादा की तरह देश की सेवा करना चाहती थी।” यह सपना तब हकीकत बना, जब सोफिया ने भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया और तेजी से रैंकों में ऊपर उठीं। उनके पति भी सेना में एक सम्मानित अधिकारी हैं, जिससे उनका घर एक सच्चा ‘सैनिक परिवार’ बन गया।

ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान को करारा जवाब
‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की उस साहसिक कार्रवाई का नाम है, जिसने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लिया, जिसमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक शहीद हुए थे। 7 मई 2025 को तड़के 1:05 से 1:30 बजे के बीच भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने 25 मिनट की सटीक कार्रवाई में पाकिस्तान और PoK में नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इनमें मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा और बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के कैंप शामिल थे। कर्नल सोफिया कुरैशी ने इस ऑपरेशन की अगुवाई की और दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सियालकोट के सरजाल कैंप सहित कई आतंकी ठिकानों के तबाह होने के वीडियो दिखाए। उन्होंने स्पष्ट किया, “हमने किसी भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया। यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ थी।”

‘सुखी’ से ‘शेरनी’ तक का सफर
सोफिया को उनके परिवार और दोस्त प्यार से ‘सुखी’ बुलाते हैं, लेकिन युद्ध के मैदान में वह एक ‘शेरनी’ हैं। उनकी नेतृत्व क्षमता और निडरता ने ऑपरेशन सिंदूर को ऐतिहासिक सफलता दिलाई। सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ में कसीदे पढ़े जा रहे हैं। एक X पोस्ट में लिखा गया, “कर्नल सोफिया कुरैशी—एक फौजी बेटी, फौजी बीवी और वतन की शेरनी! ये है भारतीय मुसलमान की हकीकत—सरहद पर जान हाजिर, दिल में तिरंगा।” उनकी इस उपलब्धि ने उन कट्टरवादी सोच को करारा जवाब दिया, जो भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाते हैं। सोफिया ने न केवल आतंकवाद को चुनौती दी, बल्कि सामाजिक एकता का भी संदेश दिया।
महिलाओं के लिए प्रेरणा
सोफिया कुरैशी भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक हैं। विंग कमांडर व्योमिका सिंह, जो ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा थीं, ने कहा, “भारत किसी भी पाकिस्तानी दुस्साहस का जवाब देने को तैयार है।” सोफिया और व्योमिका जैसी महिलाएं न केवल सैन्य क्षेत्र में, बल्कि समाज में भी युवतियों के लिए रोल मॉडल बन रही हैं। सोफिया की मां हलीमा ने गर्व से कहा, “हमने अपनी बहनों और माताओं के सिंदूर का बदला लिया है।” यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के भावनात्मक महत्व को दर्शाता है, जो शहीदों के परिवारों के लिए न्याय का प्रतीक बना।

पाकिस्तान की बौखलाहट, भारत की एकता
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LOC) पर गोलीबारी तेज कर दी, जिसमें कई नागरिक हताहत हुए। भारतीय सेना ने भी जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी चौकियों को भारी नुकसान पहुंचाया। कर्नल सोफिया ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।” उनकी इस दृढ़ता ने न केवल पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया, बल्कि भारत में सभी समुदायों को एकजुट करने का काम किया। X पर एक यूजर ने लिखा, “सोफिया कुरैशी ने दिखा दिया कि देशभक्ति का कोई धर्म नहीं होता।”
सोफिया की अनसुनी कहानी
सोफिया की जिंदगी सिर्फ युद्ध और रणनीति तक सीमित नहीं है। वह एक संवेदनशील इंसान हैं, जो अपने परिवार और समाज के प्रति गहरी जिम्मेदारी रखती हैं। उन्होंने सेना में शामिल होने से पहले सामाजिक कार्यों में भी हिस्सा लिया और सैनिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया। उनकी ट्रेनिंग के दौरान कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने हर बाधा को पार किया। उनके पिता ने उन्हें हमेशा सिखाया, “देश पहले, फिर सब कुछ।” यह सीख उनकी हर कार्रवाई में झलकती है।

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