CBSE का बड़ा फैसला: अब बोर्ड परीक्षा के लिए पढ़नी होंगी तीन भाषाएं, जानिए क्या हैं नए नियम

khabar pradhan

संवाददाता

10 April 2026

अपडेटेड: 3:30 PM 0thGMT+0530

CBSE का बड़ा फैसला: अब बोर्ड परीक्षा के लिए पढ़नी होंगी तीन भाषाएं, जानिए क्या हैं नए नियम

10 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपने स्कूली पाठ्यक्रम में एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रों के लिए केवल हिंदी और अंग्रेजी भाषा सीखना काफी नहीं होगा। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत बोर्ड ने अब ‘त्रि-भाषा फॉर्मूला’ लागू करने का निर्णय लिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब छात्रों को बोर्ड परीक्षा पास करने के लिए तीन अलग-अलग भाषाएं सीखनी और उनमें पास होना होगा।
कब से लागू होगा यह नियम
यह नया नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा। बोर्ड ने इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई है ताकि छात्रों और स्कूलों पर अचानक से पढ़ाई का बोझ न बढ़े।
नया फॉर्मूला
सीबीएसई ने भाषाओं को तीन श्रेणियों में बांटा है जिन्हें आर-1, आर-2 और आर-3 नाम दिया गया है।
1. पहली भाषा (आर-1) के रूप में छात्र कोई भी एक भाषा चुन सकते हैं।
2. दूसरी भाषा (आर-2) पहली भाषा से अलग होनी चाहिए।
3. तीसरी भाषा (आर-3) पहली और दूसरी दोनों भाषाओं से बिल्कुल अलग होनी चाहिए।
नियम के अनुसार, इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी अनिवार्य हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को भारत की भाषाई विविधता से जोड़ना और उन्हें बहुभाषी बनाना है।
क्लास के अनुसार बदलाव
1. कक्षा 6 से 10 तक: सत्र 2026-27 से कक्षा छह से ही तीसरी भाषा (आर-3) को अनिवार्य कर दिया जाएगा। कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए भी तीन भाषाओं का अध्ययन जरूरी होगा।
2. पुराने छात्रों के लिए: जो छात्र अभी कक्षा 7 या उससे ऊपर की पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें पुराने नियमों के तहत कक्षा 8 तक तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। हालांकि, कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए अब तीसरी भाषा में पास होना अनिवार्य कर दिया गया है।
3. दिव्यांग छात्रों को राहत: बोर्ड ने दिव्यांग छात्रों को इस नियम में थोड़ी राहत दी है, उन्हें केवल एक भाषा पढ़ने की छूट दी जाएगी।
गणित और विज्ञान में भी हुए बदलाव
केवल भाषा ही नहीं, बल्कि बोर्ड ने गणित और विज्ञान जैसे मुख्य विषयों के पैटर्न में भी बदलाव किया है। अब इन विषयों में दो तरह के कोर्स होंगे: स्टैंडर्ड और एडवांस।
1. स्टैंडर्ड कोर्स सभी छात्रों के लिए अनिवार्य (कंपलसरी) होगा।
2. अगर कोई छात्र अपनी मर्जी से एडवांस कोर्स चुनता है, तो उसे 25 अंकों का एक अतिरिक्त एग्जाम देना होगा।
इस पूरे बदलाव का मुख्य मकसद छात्रों के ज्ञान के दायरे को बढ़ाना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। अभिभावकों और छात्रों को अब नए सत्र के हिसाब से अपनी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।

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