Share

3 June 2026: खबर प्रधान डेस्क:

नई दिल्ली।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 12वीं के रिजल्ट के मूल्यांकन में हुई बड़ी गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सीधे निर्देश के बाद, सरकार ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके पदों से तुरंत हटा दिया है।
इतना ही नहीं, ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) से जुड़े टेंडर मामले में सामने आई कमियों की जांच के लिए केंद्र सरकार ने एक सदस्यीय कमेटी का गठन भी कर दिया है। इस जांच की जिम्मेदारी कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की सदस्य राधा चौहान को सौंपी गई है, जिन्हें एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।

नए चेहरों को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद, सीनियर आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। वहीं, इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (आईआईएस) के अधिकारी वरुण भारद्वाज को सीबीएसई का नया सचिव बनाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने पहले ही सीबीएसई से ओएसएम (ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग) के जरिए कराए गए मूल्यांकन और इसमें हुई गड़बड़ियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार देर रात यह रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ही यह साफ हो गया था कि दोषी अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।

जानिए कौन हैं लोखंडे प्रशांत और वरुण भारद्वाज:
सीबीएसई के नए चेयरमैन लोखंडे प्रशांत सीताराम अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश (एजीएमयूटी) कैडर के 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वे इससे पहले गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर सेवाएं दे रहे थे।
वहीं सीबीएसई के नए सचिव वरुण भारद्वाज 2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) के अधिकारी हैं। वे वर्तमान में उच्च शिक्षा विभाग में निदेशक के पद पर तैनात थे।

13 मई को रिजल्ट आने के बाद शुरू हुआ था विवाद:
सीबीएसई का यह पूरा विवाद 13 मई को 12वीं का रिजल्ट आने के साथ ही शुरू हुआ था। पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्युएशन) के दौरान कॉपियों को दोबारा जांचने में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पाई गईं। कुछ छात्रों को तो पहली बार में बेहद कम नंबर मिले थे, लेकिन जब उन्होंने री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन किया, तो उनके नंबरों में सीधे 20 से 30 अंकों तक की बढ़ोतरी देखी गई। शुरुआत में बोर्ड ने इन शिकायतों को अनदेखा करने की कोशिश की, लेकिन जब यह मामला गंभीर हो गया, तो पीएमओ ने खुद इसमें दखल दिया।
सूत्रों के अनुसार, पीएमओ इस बात से बेहद नाराज था कि ये गड़बड़ियां खुद सीबीएसई के सामने आने के बाद भी उन्हें सुधारने में बोर्ड असफल रहा और छात्रों को लगातार परेशान होना पड़ा। हालांकि, बोर्ड के चेयरमैन और सचिव को हटाए जाने के बाद भी फिलहाल इस पूरी लापरवाही के लिए वे ही मुख्य जिम्मेदार माने जा रहे हैं।

साइबर हमलों के बीच शुरू हुई थी पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया:
सीबीएसई की 12वीं कक्षा के पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन प्रक्रिया मंगलवार रात से शुरू होनी थी। इसके लिए बोर्ड के अनुसार, एक समय में आठ हजार से अधिक यूजर्स को संभालने की क्षमता वाला पोर्टल तैयार किया गया था। लेकिन इसी बीच दिनभर इस पोर्टल को निशाना बनाकर कई साइबर हमले (डीडॉस अटैक) किए गए, जिससे पोर्टल ठप करने की कोशिश की गई।
सुरक्षा तंत्र सक्रिय होने के कारण इन हमलों को रोक दिया गया। इसके बाद जब रात 10 बजे प्रक्रिया शुरू हुई, तो महज दो मिनट के भीतर 15 लाख से अधिक हिट्स दर्ज किए गए। रात 10 बजे तक करीब 28 हजार से अधिक छात्र सफलतापूर्वक आवेदन कर चुके थे। कॉपियों के मूल्यांकन के लिए अपनाई गई ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में तकनीकी गड़बड़ियों के आरोपों की जांच अब राधा चौहान की कमेटी करेगी, जिसके बाद दोषियों पर अगली कार्रवाई की जाएगी।


Share