केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया हलफनामा

khabar pradhan

संवाददाता

25 April 2025

अपडेटेड: 12:10 PM 0thGMT+0530

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया हलफनामा

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया हलफनामा

वक्फ (संशोधन) कानून 2025 के खिलाफ याचिकाओं को खारिज करने की मांग

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है। सरकार ने अपने प्रारंभिक हलफनामे में कहा कि याचिकाकर्ता इस कानून के प्रावधानों को लेकर गलत और भ्रामक नरेटिव बना रहे हैं। केंद्र ने तर्क दिया कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता, बल्कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए लाया गया है।
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि याचिकाएं इस गलत धारणा पर आधारित हैं कि संशोधन धार्मिक स्वतंत्रता को छीनते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट किसी कानून की समीक्षा केवल दो आधारों पर कर सकता है: विधायी अधिकार की कमी या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन। केंद्र का कहना है कि वक्फ कानून में किए गए बदलाव इनमें से किसी भी आधार को प्रभावित नहीं करते। इसके अलावा, सरकार ने पिछले 100 वर्षों से चली आ रही “वक्फ बाय यूजर” की प्रथा का उल्लेख किया, जिसके तहत केवल पंजीकरण के आधार पर वक्फ संपत्तियों को मान्यता दी जाती थी। नए कानून में इस प्रथा को हटाने और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने जैसे प्रावधान जोड़े गए हैं, जिन्हें याचिकाकर्ताओं ने विवादास्पद बताया है।
केंद्र ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं के प्रयास न्यायिक समीक्षा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। सरकार ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह किसी भी प्रावधान पर रोक लगाने से इनकार करे, क्योंकि यह कानून विधायी प्रक्रिया के तहत पारित किया गया है और इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकना है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर 65 से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं, जो इस कानून को धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताती हैं।
यह मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल रही है, जहां कुछ लोग इसे वक्फ प्रबंधन में सुधार के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप मान रहे हैं। कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि यह तय करेगी कि क्या इस कानून पर कोई अंतरिम रोक लगेगी या इसे लागू करने का रास्ता साफ रहेगा।

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