भगवान विष्णु की प्रतिमा वाले बयान पर CJI गवई सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर: मचा बवाल!
संवाददाता
19 September 2025
अपडेटेड: 9:57 AM 0thGMT+0530
19 सितंबर 2025: पिछले दिनों मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई की खजुराहो मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद गहरा गया है। पिछले दिनों मंगलवार को बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने मध्य प्रदेश के खजुराहो के एक मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की मरम्मत और रखरखाव का आदेश देने से जुड़ी हुई याचिका को खारिज कर दिया था।
उन्होंने कहा था आप भगवान विष्णु के भक्त हैं तो प्रार्थना करें और ध्यान करें । भगवान से ही मदद मांगे। सोशल मीडिया पर उनकी इस टिप्पणी की गहरी आलोचना हो रही है
वकील विनीत जिंदल और सत्यम सिंह राजपूत ने इस बयान को आस्था पर चोट बताया है । और सीजेआई गवई से अपना बयान वापस लेने और स्पष्टीकरण जारी करने, धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की मांग की है। उन्होंने भगवान विष्णु की मूर्ति पर की गई टिप्पणी का विरोध करते हुए चीफ जस्टिस बी आर गवई को एक खुला पत्र भी लिखा है।
इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि भगवान विष्णु पर इस तरह की टिप्पणियों से मैं स्तब्ध हूं। यह लाखों हिंदुओं की भगवान विष्णु के प्रति आस्था और भक्ति न सिर्फ विश्वास का विषय है, बल्कि उनके आध्यात्मिक अस्तित्व और सांस्कृतिक पहचान का आधार भी है।
विनीत जिंदल ने अपने पत्र में लिखा है कि मैं सनातन धर्म का अनुयाई हूं। और वे भगवान विष्णु पर सनातनी आस्था के विरुद्ध आपत्तिजनक बयान को तुरंत वापस लें। उन्होंने इस पत्र की एक प्रति राष्ट्रपति को भी भेजी है । उन्होंने अनुरोध करते हुए लिखा है सर्वोच्च न्यायालय और माननीय राष्ट्रपति इस मामले की गंभीरता को समझेंगे और भारत में प्रत्येक धर्म की गरिमा को बनाए रखेंगे।
आईए जाने क्या है पूरा मामला:
मध्य प्रदेश के खजुराहो में जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की एक 7 फीट ऊंची मूर्ति है ।जो दशकों से खंडित है। इस मूर्ति की मरम्मत और रखरखाव हेतु सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इस पर चीफ जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सुनवाई से इनकार कर दिया।
और यह कहते हुए इनकार किया कि यह विषय अदालत के क्षेत्र में नहीं आता ,बल्कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन आता है ।इस बीच सीजेआई गवई ने कहा कि आप भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हैं ।आप उन्हीं से प्रार्थना कीजिए ,वही अपने आप को ठीक करेंगे।
क्या कहा अब सीजेआई गवई ने:
सीजेआई गवई ने यह स्पष्ट किया है कि मैं सभी धर्म में विश्वास करता हूं और सभी धर्म का सम्मान करता हूं।
इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ मैंने सुझाव दिया था। मेरी टिप्पणियां केवल इस संदर्भ में थी कि यह मंदिर सिर्फ ए एस आई के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह अदालत के क्षेत्र में नहीं, बल्कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि वह भगवान विष्णु के बड़े भक्त हैं। उनके बयानों को तोड़ मरोड़ कर सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है। हर क्रिया की समान प्रतिक्रिया होती है, लेकिन अब सोशल मीडिया पर आसमान प्रतिक्रिया होने लग गई है।
सीजेआई गवई की टिप्पणी के बाद तीखी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।
विश्व हिंदू परिषद में सीजेआई गवई को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए।
याचिका कर्ताओं ने कहा है कि आजादी के 77 साल के बाद भी मूर्ति की मरम्मत नहीं हो पाई है। मूर्ति की पुनर्स्थापना से इनकार करना श्रद्धालुओं के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।