नेशनल हेराल्ड केस: कांग्रेस का ‘सच vs झूठ’ अभियान

khabar pradhan

संवाददाता

21 April 2025

अपडेटेड: 7:08 AM 0stGMT+0530

नेशनल हेराल्ड केस: कांग्रेस का ‘सच vs झूठ’ अभियान

57 शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, खड़गे का बयान- 'हम नहीं डरेंगे'

57 शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, खड़गे का बयान- ‘हम नहीं डरेंगे’

नेशनल हेराल्ड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पहली चार्जशीट में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और नेता राहुल गांधी का नाम शामिल होने के विरोध में कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने 21 से 27 अप्रैल तक देश के 57 शहरों में 57 प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की घोषणा की है। इस अभियान को ‘कांग्रेस का सच, भाजपा का झूठ’ नाम दिया गया है, जिसके तहत कांग्रेस केंद्र की बीजेपी सरकार पर बदले की राजनीति का आरोप लगाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “हम डरेंगे नहीं, और सच को जनता के सामने लाएंगे।”
अभियान का उद्देश्य और रणनीति
कांग्रेस का यह अभियान नेशनल हेराल्ड केस को लेकर बीजेपी पर हमला करने और जनता के बीच अपनी बात रखने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी का दावा है कि ED और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करके बीजेपी विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस नेशनल हेराल्ड केस की सच्चाई, ED की कार्रवाई की समय-सीमा, और बीजेपी की कथित साजिश को उजागर करेगी।


21 अप्रैल से शुरू होकर 27 अप्रैल तक चलने वाले इस अभियान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, सांसद, और स्थानीय नेता हिस्सा लेंगे। प्रत्येक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों को जोड़कर बीजेपी की नीतियों की आलोचना करेगी। इसके अलावा, ‘संविधान बचाओ रैली’ और अन्य जनसंपर्क कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि जनता तक सीधे पहुंचा जा सके।
खड़गे का बयान
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस अभियान की शुरुआत से पहले एक बयान जारी कर कहा, “नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को निशाना बनाना बीजेपी की बदले की राजनीति का हिस्सा है। हम इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं रहेंगे। कांग्रेस का हर कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर सच बताएगा। हम डरने वाले नहीं हैं।” खड़गे ने यह भी कहा कि बीजेपी की सरकार संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।
नेशनल हेराल्ड केस का पृष्ठभूमि
नेशनल हेराल्ड एक ऐतिहासिक समाचार पत्र है, जिसे 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने शुरू किया था। यह केस यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (YIL) से जुड़ा है, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की हिस्सेदारी है। आरोप है कि YIL ने नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के 90 करोड़ रुपये के कर्ज को 50 लाख रुपये में ले लिया, जिसे धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बताया जा रहा है। ED ने इस मामले में कई बार सोनिया और राहुल से पूछताछ की है, और हाल ही में दायर चार्जशीट में उनका नाम शामिल किया गया है।
कांग्रेस का कहना है कि यह केस राजनीति से प्रेरित है और इसका मकसद गांधी परिवार को बदनाम करना है। पार्टी ने दावा किया है कि नेशनल हेराल्ड एक गैर-लाभकारी संगठन है, और इसमें कोई वित्तीय अनियमितता नहीं हुई।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी ने कांग्रेस के इस अभियान को “नाटक” और “ध्यान भटकाने की कोशिश” करार दिया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, “कांग्रेस को अगर अपनी बेगुनाही पर भरोसा है, तो वे कोर्ट में अपनी बात रखें। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जनता को भ्रमित करने की कोशिश बेकार है।” बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड केस में “सबूतों का पहाड़” है, और कांग्रेस केवल “विक्टिम कार्ड” खेल रही है।
सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के इस अभियान की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। बीजेपी समर्थकों ने इसे “नौटंकी” और “पुरानी रणनीति” बताया, जबकि कांग्रेस समर्थकों ने खड़गे के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि यह “लोकतंत्र बचाने की लड़ाई” है। कुछ यूजर्स ने लिखा, “57 प्रेस कॉन्फ्रेंस से क्या होगा? अगर सचमुच गलत हुआ है, तो कोर्ट में सबूत पेश करें।” वहीं, कुछ ने कांग्रेस के इस कदम को “जमीनी स्तर पर वापसी” की कोशिश बताया।
आगे की रणनीति
कांग्रेस ने इस अभियान को केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी ने संविधान बचाओ रैली, सोशल मीडिया कैंपेन, और जनसभाओं के जरिए जनता तक पहुंचने की योजना बनाई है। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी कुछ शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस या रैलियों में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, कांग्रेस ने अन्य विपक्षी दलों से भी समर्थन मांगा है, ताकि इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके।
यह अभियान नेशनल हेराल्ड केस को लेकर राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को 2025 के आगामी चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, अगर पार्टी ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई, तो यह अभियान केवल प्रतीकात्मक रह सकता है। दूसरी ओर, बीजेपी इसे विपक्ष की हताशा के रूप में पेश कर रही है।
नेशनल हेराल्ड केस और कांग्रेस के इस अभियान पर आने वाले दिनों में और चर्चा होने की उम्मीद है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कांग्रेस अपने ‘सच’ को जनता तक पहुंचाने में सफल होती है, या बीजेपी इसे ‘झूठ’ साबित करने में कामयाब रहती है।

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