कांग्रेस नेत्री सरला मिश्रा की मौत का मामला फिर चर्चा में, दिग्गज नेताओं पर गंभीर आरोप
संवाददाता
19 May 2025
अपडेटेड: 11:14 AM 0thGMT+0530
कांग्रेस नेत्री सरला मिश्रा की मौत का मामला फिर चर्चा में, दिग्गज नेताओं पर गंभीर आरोप
कांग्रेस नेत्री सरला मिश्रा की मौत के लगभग 27 साल बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. सरला के भाई अनुराग मिश्रा ने हाल ही में भोपाल के टीटी नगर थाने में पहुंचकर इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, उनके भाई लक्ष्मण सिंह समेत कई राजनेताओं और शासकीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अनुराग का कहना है कि उनकी बहन की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि एक साजिशन हत्या थी, जिसे जानबूझकर आत्महत्या का रूप दिया गया.
टीटी नगर थाना प्रभारी मानसिंह ने अनुराग की शिकायत पर जांच का भरोसा दिया है और कहा है कि वैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी.
कोर्ट ने खारिज की खात्मा रिपोर्ट, दोबारा जांच के आदेश
फरवरी 1997 में सरला मिश्रा की मौत उनके भोपाल स्थित आवास में जलने से हुई थी. तब पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया और साल 2000 में केस फाइल बंद कर दी गई. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि यह खात्मा रिपोर्ट अगले 19 वर्षों तक कोर्ट में पेश ही नहीं की गई. फरवरी 2025 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस रिपोर्ट को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया.
कोर्ट ने रिपोर्ट में भारी खामियां पाई और इसे खारिज कर दिया. न्यायाधीश पलक राय ने अपने आदेश में कहा कि मृतका के मृत्यु पूर्व बयान की कोई मेडिकल पुष्टि नहीं की गई, न ही घटनास्थल से फिंगरप्रिंट लिए गए. साथ ही, जो कागज के टुकड़े घटनास्थल से मिले थे, उनकी स्वतंत्र जांच भी नहीं कराई गई. ऐसे में अदालत ने मामले की दोबारा जांच के निर्देश दिए.
साजिश में शामिल अधिकारियों की भी जांच की मांग
अनुराग मिश्रा ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि इस मामले को आत्महत्या का रूप देने और सबूतों को दबाने में कई पुलिस और चिकित्सा अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही है. इनमें तत्कालीन टी.आई. एस.एम. जेडी, डॉ. सत्यपति, डॉ. योगीराज शर्मा, और महेंद्र सिंह करचुरी जैसे अधिकारी शामिल हैं. अनुराग का आरोप है कि इन सभी ने मिलकर साक्ष्यों को नष्ट किया और राजनीतिक दबाव में आकर मामले को कमजोर किया.
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय राजनीतिक हस्तक्षेप हुआ है, और अब समय आ गया है कि दोषियों की पहचान कर न्याय दिलाया जाए. अनुराग के मुताबिक, न्यायपालिका की सख्ती और पुन: जांच की प्रक्रिया से उन्हें उम्मीद है कि उनकी बहन को न्याय मिलेगा.