सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- आवारा कुत्ते 8 हफ्तों में हटाए जाएं! पशु प्रेमी क्यों है परेशान
संवाददाता
12 August 2025
अपडेटेड: 1:42 PM 0thGMT+0530
12 अगस्त 2025: खबर प्रधान डेस्क-
दिल्ली में लावारिस कुत्तों की समस्या को बेहद गंभीर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक बड़ा आदेश जारी किया। सर्वोच्च अदालत में 8 सप्ताह के भीतर सभी लावारिस कुत्तों को पकड़कर डॉग शेल्टर में भेजने का आदेश दिया है । देश की सबसे बड़ी अदालत में यह साफ किया है कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था की ओर से कुत्तों को पकड़ने में बाधा डाली गई तो उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।
जस्टिस जी पादरी वाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि आवारा कुत्तों को डॉग शेल्टर में रखा जाए और उन्हें सड़कों कॉलोनी और सार्वजनिक स्थानों पर ना छोड़ा जाए।
सुप्रीम कोर्ट का क्या है आदेश:
सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली और एनसीआर में लावारिस आवारा कुत्तों की बढ़ती हुई जनसंख्या को ध्यान में रखकर यह फैसला सुनाया । इसमें सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर एक विशेष स्थान में रखने का आदेश दिया है । कुत्तों के द्वारा बच्चों और बुजुर्गों पर बढ़ते हुए हमले पर चिंता जताई है।
इसके अलावा कोर्ट ने पशु और कुत्ते प्रेमियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्या रेबीज के शिकार बच्चों को यह पशु प्रेमी वापस ला सकते हैं । बच्चों को किसी भी कीमत पर रेबीज का शिकार नहीं होना चाहिए।
दिल्ली में 10 लाख कुत्ते:
दिल्ली में करीब 10 लाख कुत्ते हैं जिसमें से पिछले 1 साल में करीब 25 हजार कुत्ते के काटने के केस है।
इसके अलावा करीब 37 लाख केस पूरे देश में हैं। पिछले 1 साल में करीब 54 मौतें रेबीज से हुई है।
इधर राजधानी भोपाल में:
भोपाल की राजधानी में करीब 25 लाख कुत्ते है । जिसमें से 1 लाख 20 हजार आवारा कुत्ते हैं ।हर साल करीब 20000 लोगों को कुत्ते के काटने के मामले सामने आते हैं ।2025 में जनवरी से लेकर अभी तक भोपाल में 10,769 केस कुत्ते के काटने के हैं।
इनमें से करीब 35 फ़ीसदी मामले शून्य से 15 वर्ष के बच्चे और करीब 10 से 15% मामले में बुजुर्ग व्यक्ति शिकार होते हैं।
कार्रवाई के दौरान विवाद:
कई बार शिकायत करने के दौरान नगर निगम की टीम और स्थानीय लोगों जिसमें से पेट लवर्स के विवाद के कई मामले सामने आते हैं। इनमें से कई पेट लवर्स पर FIR भी हो जाती है ।कई अन्य मामले सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचे।
कुत्तों के काटने से कई बार पेट लवर का स्थानीय लोगों के साथ विवाद गहरा हो जाता है । जिसमें मारपीट जैसी संभावनाएं भी हो जाती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पशु प्रेमी हो रहे परेशान:
आवारा कुत्तों को पकड़ने और उन्हें शेल्टर होने पहुंचने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हंगामा सा मच गया है। जिसमें बॉलीवुड से लेकर राजनेता तक और पशु प्रेमी सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को गलत ठहरा रहे हैं। कई लोग इस फैसले को लागू करना असंभव बता रहे हैं।
पशु प्रेमी रवीना टंडन ने कहा है -आवारा कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या के लिए बेचारे कुत्तों को दोषी ठहराना गलत है। स्थानीय निकाय टीकाकरण और नसबंदी अभियान को ठीक से चलाएं तो यह स्थिति नहीं आएगी। स्थानीय निकायों को अपने क्षेत्र के आवारा कुत्तों की जिम्मेदारी लेना चाहिए । जिसमें से नसबंदी सबसे बड़ी जरूरत है।
राहुल गांधी भी हुए असहमत:
दिल्ली एनसीआर में लावारिस कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है ।इस आदेश पर राहुल गांधी भी असहमत नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि बेजुबान लोगों के साथ ऐसा करना क्रूरता होगी।
राहुल गांधी को मिला मेनका गांधी का साथ:
पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी भी ने भी सुप्रीम कोर्ट को इस फैसले को व्यवहारिक बताया है।
कुत्तों के डर से लोगों ने बाहर निकलना किया बंद:
दिल्ली में करीब 10 लाख लावारिस कुत्ते हैं । इसके अलावा पालतू कुत्ते भी हैं । दिल्ली में हर साल करीब 1 लाख से अधिक लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। जिसमें तीन बड़े अस्पतालों में 91009 कुत्तों के काटने के मामले सामने आए हैं । इसके अलावा लोग निजी अस्पतालों और क्लीनिक में भी रेबीज के टीके लगवाते हैं । जिसमें प्रतिदिन 700 से 800 लोग पीड़ित लोग पहुंच रहे हैं।
लोगों का कहना है कि बुजुर्गों को कई बार कुत्ते काट लेते हैं । अधिक उम्र के लोगों ने बाहर घूमना बंद कर दिया है। घर के बाहर बैठना बंद कर दिया है। परिवार के किसी सदस्य के साथ ही बाहर निकलते हैं। क्योंकि कुत्तों के काटने के मामले बढ़ रहे हैं।
23 जुलाई को एक 3 वर्षीय बच्ची पर लावारिस कुत्तों ने हमला किया था। जिससे बच्चों के चेहरे पर कई गंभीर चोट आई थी। अब वह बच्ची घर से बाहर निकलने से डरती है।
15 वर्षीय एक बच्चा वैभव कुत्तों को देखते ही रास्ता बदल देता है। क्योंकि करीब 5 साल पहले वह घर के नीचे खेल रहा था । तभी कुत्तों में हमला कर दिया था। तभी से कुत्तों को लेकर उसके दिमाग में डर बैठा हुआ है वह डर आज तक निकल नहीं पाया।
द्वारका मोड़ पर रहने वाला कबीर 12वीं का छात्र है। ट्यूशन जाते समय कुत्ते ने हाथ और पेट में कई जगह काट दिया था । आज भी उसे घटना को याद करता हुआ वह सिहर उठता है।
क्या कहता है पशु अधिकार नियम:
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि आवारा कुत्तों को हटाकर सरकारी केंद्र में भेजने का निर्देश नियमों के खिलाफ है।किंतु सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि अभी नियम को भूल जाइए। अभी हकीकत पर ध्यान रखिए कि सार्वजनिक स्थानों पर जहां बच्चे खेलते हैं साइकिल चलाते हैं और बुजुर्ग पार्क और सार्वजनिक स्थलों पर बैठते हैं । उन स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाना जरूरी है। क्योंकि बच्चों को और बुजुर्गों को सुरक्षित रखना है।