डॉक्टर की लापरवाही ने छीन ली गर्भवती महिलाओं की याद्दाश्त

khabar pradhan

संवाददाता

9 April 2025

अपडेटेड: 7:18 AM 0thGMT+0530

डॉक्टर की लापरवाही ने छीन ली गर्भवती महिलाओं की याद्दाश्त

डॉक्टर की लापरवाही ने छीन ली गर्भवती महिलाओं की याद्दाश्त

प्रतिबंधित कंपनी का लगाया इंजेक्शन

रीवा के संजय गांधी मेडिकल कॉलेज में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। वही यहां पांच गर्भवती युवतियां को ब्लैकलिस्टेड कंपनी का इंजेक्शन लगा दिया गया था, जिससे उनकी याददाश्त चली गई। जांच में पता चला कि स्टोरकीपर की गलती से यह इंजेक्शन इस्तेमाल हुआ है। स्टोरकीपर को निलंबित कर दिया गया है।

जिले के संजय गांधी मेडिकल कॉलेज में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां 5 गर्भवती युवतियों को एक ऐसी कंपनी का इंजेक्शन लगा दिया गया, जिसे पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। इस घटना के बाद युवतियां की याददाश्त चली गई है। जांच में पता चला कि हॉस्पिटल के स्टोरकीपर की गलती से यह इंजेक्शन इस्तेमाल हुआ।

इस इंजेक्शन को लेकर विदिशा मेडिकल कॉलेज से अक्टूबर 2024 में शिकायत भी आई थी। तभी से इस दवा पर रोक लगा दी गयी है। हेल्थ कॉर्पोरेशन के एमडी मयंक अग्रवाल ने बताया कि दिसंबर में रिपोर्ट आने के बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। साथी ही उन्होंने बताया कि फार्मासिस्ट ने दवा जारी की, इसलिए उस पर कार्रवाई भी की गई है।

इस पूरे मामले में स्टोरकीपर को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन बाकी अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस लापरवाही के कारण कंपनी पर जुर्माना भी लगाया गया है और उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। यह घटना रीवा के संजय गांधी मेडिकल कॉलेज में हुई।

रीवा के संजय गांधी मेडिकल कॉलेज में 5 गर्भवती युवतियों को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन दिया गया। यह इंजेक्शन गुजरात की रेडिएंट पैरेंटेरल्स लिमिटेड कंपनी ने बनाया था। वही इस कंपनी को दिसंबर में ही ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था क्योंकि इंजेक्शन की क्वालिटी ठीक नहीं थी।

जांच में पता चला कि हॉस्पिटल के स्टोरकीपर प्रवीण उपाध्याय ने गलती से यह इंजेक्शन जारी कर दिया था। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया लेकिन इतनी बड़ी गलती होने के बाद भी बाकी अफसरों पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। यह भी पता चला है कि स्टोर में दवा के तापमान को ठीक से नहीं देखा जा रहा था। दवाइयों का कोई रिकॉर्ड भी नहीं रखा जा रहा था। वही खराब दवाइयों को अच्छी दवाइयों के साथ ही रखा जा रहा था।

कंपनी को 5 वर्ष के लिए डिबार कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि कंपनी 5 वर्ष तक कोई भी सरकारी काम नहीं कर पाएगी। साथ ही, कंपनी को 2 वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट भी किया गया है। कंपनी पर ₹3.01 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है।

सबसे हैरानी की बात यह है कि दिसंबर में इंजेक्शन को खराब घोषित कर दिया गया था। वही इसके बाद इसे पोर्टल पर ब्लॉक कर दिया गया था। इसका अर्थ है कि यह इंजेक्शन इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था साथ ही लेकिन फिर भी 25 फरवरी को स्टोर से 100 वायल निकाले गए और डिलीवरी में इस्तेमाल कर लिए गए। 4 मार्च को जांच टीम ने 70 वायल जब्त किए लेकिन बाकी 30 इंजेक्शन कहां गए, यह किसी को नहीं पता है।

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